भारी घाटे के बाद इस एयरोस्पेस शेयर में आया भूचाल, 19% क्रैश हुआ भाव, पर ब्रोकरेज ने दिया ₹444 का टारगेट

भारी घाटे के बाद इस एयरोस्पेस शेयर में आया भूचाल, 19% क्रैश हुआ भाव, पर ब्रोकरेज ने दिया ₹444 का टारगेट

घरेलू शेयर बाजार में लिस्टेड प्रमुख एयरोस्पेस और डिफेंस कंपोनेंट्स निर्माता कंपनी Aequs लिमिटेड (Aequs Ltd) के शेयरों में मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार बिकवाली देखने को मिली। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम सामने आते ही दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई और कंपनी का स्टॉक 242.10 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 19 प्रतिशत तक लुढ़ककर 196.55 रुपये के इंट्राडे लो तक फिसल गया। पिछले कुछ महीनों में शानदार रैली दिखाने और 294.90 रुपये का 52-वीक हाई छूने के बाद अचानक आई इस भारी गिरावट ने खुदरा निवेशकों के होश उड़ा दिए हैं। हालांकि निचले स्तरों पर बिकवाली के दबाव के बीच देश की प्रमुख ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama Institutional Equities) ने इस शेयर पर अपनी खरीदारी की राय बरकरार रखते हुए ₹444 का बड़ा टारगेट प्राइस दिया है।

घाटा दोगुने से अधिक बढ़कर 52 करोड़ पार, क्यों बिगड़े कंपनी के वित्तीय आंकड़े

शेयर में आई इस अचानक गिरावट की मुख्य वजह कंपनी के सितंबर तिमाही (Q2 FY27) के शुद्ध मुनाफे में आई भारी गिरावट और घाटे का गहराना है। एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का शुद्ध घाटा (Net Loss) सालाना आधार पर दोगुने से भी अधिक बढ़ गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जहां कंपनी को 21 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था, वहीं इस साल की दूसरी तिमाही में यह घाटा बढ़कर सीधे 52.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। परिचालन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी, नए प्रोजेक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स के विस्तार पर हुए शुरुआती खर्चों तथा इनपुट कॉस्ट के दबाव ने कंपनी के मुनाफे को बुरी तरह निचोड़ दिया है। इसके चलते कंपनी का कंसोलिडेटेड एबिटा (EBITDA) 51 प्रतिशत गिरकर महज 3.4 प्रतिशत के मार्जिन स्तर पर आ गया, जिसने बाजार के विश्लेषकों को निराश किया।

रेवेन्यू के मोर्चे पर 45% की दमदार छलांग, ऑपरेशंस में दिखी मजबूती

घाटे के बड़े आंकड़ों के बावजूद कंपनी के ऑपरेशंस और ऑर्डर एक्जीक्यूशन के मोर्चे पर एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई है। सितंबर तिमाही के दौरान कंपनी का ऑपरेशंस से होने वाला रेवेन्यू (Revenue from Operations) सालाना आधार पर 45.3 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ 409 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 282 करोड़ रुपये था। इससे यह साफ जाहिर होता है कि वैश्विक और घरेलू एयरोस्पेस ग्राहकों की ओर से कंपनी के उत्पादों की मांग में कोई कमी नहीं आई है। हालांकि, मार्जिन दबाव के कारण कंपनी का एबिट (EBIT) 45 प्रतिशत गिरकर 24.5 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 44.3 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

ब्रोकरेज का क्या है रुख: नुवामा ने क्यों दिया ₹444 का आक्रामक टारगेट

तिमाही नतीजों के बाद दो प्रमुख ब्रोकरेज हाउसेज की राय इस स्टॉक पर पूरी तरह बंटी हुई नजर आई है:

  • नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama): नुवामा ने इस भारी करेक्शन को लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर माना है। ब्रोकरेज ने शेयर पर अपनी 'BUY' (खरीदारी) रेटिंग को बरकरार रखा है और ₹444 प्रति शेयर का टारगेट प्राइस तय किया है। निचले स्तरों (लगभग ₹210-₹211) के मुकाबले यह टारगेट 100 से 110 प्रतिशत से अधिक के बंपर अपसाइड पोटेंशियल की ओर इशारा करता है। नुवामा का तर्क है कि एयरोस्पेस सेक्टर में ऑर्डर की विजिबिलिटी काफी मजबूत है और शुरुआती विस्तार लागत घटने के बाद कंपनी के मार्जिन में तेज रिकवरी देखने को मिलेगी।

  • जेएम फाइनेंशियल (JM Financial): इसके विपरीत घरेलू ब्रोकरेज जेएम फाइनेंशियल ने सतर्क रुख अपनाते हुए शेयर पर अपनी 'रेड्यूस' (Reduce) रेटिंग बनाए रखी है। हालांकि उन्होंने मार्जिन पर दबाव को देखते हुए भी अपने पुराने टारगेट प्राइस 220 रुपये को बढ़ाकर 245 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

आईपीओ लिस्टिंग से लेकर अब तक का उतार-चढ़ाव भरा सफर

Aequs का आईपीओ पिछले साल दिसंबर के महीने में 124 रुपये के इश्यू प्राइस पर आया था और बाजार में इसकी लिस्टिंग करीब 13 फीसदी प्रीमियम के साथ 140 रुपये के भाव पर हुई थी। इस पब्लिक इश्यू के जरिए कंपनी ने 670 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और लगभग 251.81 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) जुटाया था। लिस्टिंग के बाद शुरुआती महीनों में शेयर में भारी बिकवाली आई थी और मार्च 2026 में यह स्टॉक 113.30 रुपये के ऑल-टाइम लो तक गिर गया था। इसके बाद अगले सात महीनों से भी कम समय में डिफेंस और एयरोस्पेस बूम के दम पर स्टॉक में 160 प्रतिशत से अधिक की तूफानी रिकवरी देखी गई और यह 294 रुपये के पार निकला।

खुदरा निवेशकों के लिए रणनीति और तकनीकी आउटलुक

तकनीकी चार्ट्स पर 19 प्रतिशत के क्रैश के बाद यह शेयर अपने अहम शॉर्ट-टर्म सपोर्ट लेवल्स को तोड़ चुका है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब कोई कंपनी बड़े पैमाने पर कैपेक्स कर रही होती है, तो उसके तिमाही नतीजों में मार्जिन पर अस्थाई दबाव आना स्वाभाविक होता है।

जो निवेशक पहले से इस शेयर में बने हुए हैं, उन्हें घबराहट में पैनिक सेलिंग करने से बचना चाहिए और अगले एक-दो तिमाहियों में मार्जिन रिकवरी के संकेतों का इंतजार करना चाहिए। वहीं नए निवेशकों को गिरते हुए शेयर को तुरंत खरीदने की जल्दबाजी करने के बजाय स्टॉक को 190 से 200 रुपये के दायरे में बेस बनाने देना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक हर गिरावट पर छोटी-छोटी किस्तों में संचय (Accumulation) की रणनीति पर विचार कर सकते हैं।

(डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण केवल ब्रोकरेज रिपोर्ट्स और सार्वजनिक वित्तीय आंकड़ों पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी शेयर में पूंजी लगाने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)