सनी देओल की अपकमिंग फिल्म 'सूर्या' से आपत्तिजनक सीन हटाने की मांग: दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाने वाली याचिका की खारिज

सनी देओल की अपकमिंग फिल्म 'सूर्या' से आपत्तिजनक सीन हटाने की मांग: दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलीज पर रोक लगाने वाली याचिका की खारिज

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की बहुप्रतीक्षित अपकमिंग एक्शन-ड्रामा फिल्म 'सूर्या: अंत से आरंभ तक' (Suryaa: Ant Se Aarambh Tak) अपनी रिलीज से ठीक पहले कानूनी पचड़े और विवादों में घिर गई है। फिल्म के टीजर और प्रोमोशनल वीडियो में चिकित्सा पेशे (Medical Profession), डॉक्टरों और अस्पतालों को लेकर दिखाए गए दृश्यों और संवादों पर मेडिकल समुदाय ने कड़ा ऐतराज जताया था। डॉक्टरों के एक वर्ग ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर फिल्म की थियेट्रिकल रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने और आपत्तिजनक सीन्स व डायलॉग्स को हटाने की मांग की थी। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को इस जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने और सुनवाई करने से साफ इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया है।

चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कानूनी आधार सामने रखा है।

हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका? अदालत ने साफ कही यह बात

डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि एक ही मुद्दे पर अदालत में कई समानांतर कार्यवाहियां (Multiple Proceedings) चलाने का कोई औचित्य नहीं बनता।

अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया:

"हमें इस जनहित याचिका (PIL) पर अलग से विचार करने का कोई वैध कारण नजर नहीं आता, क्योंकि डॉक्टरों के समुदाय की ओर से इस मुद्दे को पहले ही हाई कोर्ट के समक्ष उठाया जा चुका है। जब इसी अदालत की एकल पीठ (Single-Judge Bench) में पहले से एक याचिका विचाराधीन है, तो एक ही विषय पर कई अलग-अलग कार्यवाहियां जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता चाहें तो एकल जज के समक्ष चल रहे मामले में अपनी बात रख सकते हैं या सक्षम वैधानिक प्राधिकरणों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।'

कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील निशांत गौतम ने भी अदालत को अवगत कराया कि फिल्म के सर्टिफिकेशन (प्रमाणन) की प्रक्रिया केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के समक्ष वर्तमान में चल रही है। इससे पहले सोमवार को जस्टिस अमित महाजन की एकल पीठ ने चार डॉक्टरों द्वारा दायर इसी तरह की एक अन्य याचिका पर पहले ही नोटिस जारी कर रखा है, जिसकी अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय है।

डॉक्टरों ने किन दृश्यों और संवादों पर जताई थी सख्त आपत्ति?

यह जनहित याचिका ऑल इंडिया डॉक्टर्स संस्था की लीगल सेल के उपाध्यक्ष नचिकेता भाटिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के राष्ट्रीय प्रवक्ता व मेडिकल प्रोफेशनल डॉ. ध्रुव चौहान द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क था कि फिल्म 'सूर्या' के टीजर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को अत्यंत नकारात्मक और भ्रष्ट रूप में चित्रित किया गया है।

याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु:

  • 'प्रिस्क्रिप्शन नहीं, कमीशन लिखते हैं': टीजर में सनी देओल के एक तीखे संवाद—'डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन नहीं, कमीशन लिखते हैं'—पर डॉक्टरों ने गहरी आपत्ति जताई। याचिका में कहा गया कि इससे ऐसा आभास होता है मानो पूरा मेडिकल प्रोफेशन केवल मरीजों के आर्थिक शोषण, अनावश्यक जांचें (Diagnostic Tests) करवाने और कमीशनखोरी में लिप्त है।

  • स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा: याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और मेडिकल कर्मचारियों के खिलाफ शारीरिक हिंसा और तोड़फोड़ को सही व वीरतापूर्ण कार्य (Heroic Act) के रूप में पेश किया गया है।

  • विश्वास और सुरक्षा को खतरा: याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि इस तरह के एकतरफा चित्रण से आम जनता और डॉक्टरों के बीच का विश्वास टूटेगा, जिससे अस्पतालों में डॉक्टरों के प्रति आक्रोश और हिंसक घटनाओं में इजाफा हो सकता है। यह सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 की धारा 5B के प्रावधानों का भी उल्लंघन करता है।

क्या है फिल्म 'सूर्या' और कब होने जा रही है रिलीज?

एम. पद्मकुमार के निर्देशन में बनी फिल्म 'सूर्या: अंत से आरंभ तक' एक क्राइम-थ्रिलर और एक्शन फिल्म है, जिसमें सनी देओल एक सशक्त और आक्रामक मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। यह फिल्म मलयालम की बहुचर्चित फिल्म 'जोसेफ' (Joseph) की आधिकारिक हिंदी रीमेक बताई जा रही है। फिल्म 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए निर्धारित है।

फिल्म के निर्माताओं का पक्ष रहा है कि यह एक पूरी तरह काल्पनिक सिनेमाई कहानी है, जिसका उद्देश्य किसी पेशे का अपमान करना नहीं बल्कि समाज में व्याप्त कुछ बुराइयों और अपराध के खिलाफ एक व्यक्ति के संघर्ष को दर्शाना है।

आगे क्या होगा? 16 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरें

डिवीजन बेंच द्वारा जनहित याचिका खारिज किए जाने से फिल्म के निर्माताओं को प्राथमिक राहत जरूर मिली है, लेकिन कानूनी तलवार पूरी तरह हटी नहीं है। एकल पीठ के समक्ष 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई बेहद अहम होगी। उसी दिन यह तय होगा कि सीबीएफसी फिल्म को किस सर्टिफिकेशन के साथ पास करता है और क्या टीजर या फिल्म के कुछ विवादास्पद संवादों में कोई बदलाव या डिस्क्लेमर जोड़ने के निर्देश दिए जाते हैं या नहीं। फिलहाल हाई कोर्ट के इस रुख से 20 नवंबर को फिल्म की तय रिलीज का रास्ता काफी हद तक साफ नजर आ रहा है।