रामायण पार्ट-2 : दिवाली 2027 नहीं, अब 2028 में रिलीज होगा सीक्वल; निर्माता नमित मल्होत्रा ने बताया 'मास्टर प्लान'
मुंबई: निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित और भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी महाकाव्य फिल्म 'रामायण' को लेकर एक बड़ा आधिकारिक अपडेट सामने आया है। रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता) और यश (रावण) स्टारर इस भव्य फ्रेंचाइजी के दूसरे भाग यानी 'रामायण: पार्ट-2' के लिए सिनेप्रेमियों को अब थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ेगा। पहले जहां इस सीक्वल को दिवाली 2027 में बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी थी, वहीं अब इसे आधिकारिक रूप से आगे बढ़ाकर 2028 तक के लिए पोस्टपोन कर दिया गया है।
फिल्म के निर्माता और ऑस्कर विजेता विजुअल इफेक्ट्स कंपनी DNEG के प्रमुख नमित मल्होत्रा ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत के दौरान रिलीज डेट आगे बढ़ाने की पुष्टि की है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के दूसरे भाग के क्लाइमैक्स और ग्रैंड फिनाले को लेकर बनाए गए अपने खास 'मास्टर प्लान' का भी खुलासा किया।
2027 की बजाय 2028 में क्यों आएगा पार्ट-2? नमित मल्होत्रा ने बताई वजह
एक अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन पोर्टल (E! News) को दिए साक्षात्कार में निर्माता नमित मल्होत्रा ने बताया कि 'रामायण' जैसी महागाथा को वैश्विक स्तर पर सही स्वरूप में प्रस्तुत करने के लिए जल्दबाजी में कोई भी कदम नहीं उठाया जा सकता:
"शुरुआत में जब हमने पहले पार्ट की घोषणा की थी, तब हमारी सोच इसे भारत से दुनिया भर में जाने वाली एक भारतीय फिल्म के रूप में देखने की थी। लेकिन जैसे-जैसे इस फिल्म का प्रोडक्शन आगे बढ़ा, हम एक ऐसे मोड़ पर पहुंचे जहां हमारे पास इस फिल्म के दो अलग-अलग मास्टर वर्जन तैयार हो रहे हैं। इसके इंग्लिश वर्जन के लिए एक अलग एडिट और ओरिजिनल हिंदी स्क्रिप्ट को फिर से नए सिरे से रीराइट किया गया है ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने उनकी अपनी शैली में पेश किया जा सके। इतनी विशालकाय फिल्म के साथ पूरा न्याय करने के लिए हमें एक अतिरिक्त साल की जरूरत है। जब आप पार्ट-2 देखेंगे, तो वह बिल्कुल अलग दुनिया और अलग कहानी होगी। हम कोई भी काम हड़बड़ी में नहीं करना चाहते। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब इसका ग्रैंड फिनाले आए, तो वह उस ऐतिहासिक भव्यता के साथ डिलीवर हो जिसका वह हकदार है।"
पार्ट-1 और पार्ट-2 की कहानी का खाका: कहां से शुरू होगा सीक्वल?
निर्माता ने फिल्म के दोनों भागों की पटकथा के विभाजन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है:
-
रामायण: पार्ट-1: पहला भाग मुख्य रूप से भगवान श्रीराम के प्रारंभिक जीवन, भाइयों (लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न) के अटूट प्रेम, सीता स्वयंवर, अयोध्या से वनवास और मर्यादा पुरुषोत्तम के दिव्य अवतार के उद्देश्य को स्थापित करने पर केंद्रित रहेगा।
-
रामायण: पार्ट-2 (ग्रैंड फिनाले): असली संघर्ष, सीता हरण, किष्किंधा में सुग्रीव-हनुमान जी से मिलन, समुद्र पर राम सेतु निर्माण और रावण (यश) के साथ होने वाले महायुद्ध को दूसरे भाग में पूरी भव्यता के साथ दिखाया जाएगा। चूंकि युद्ध के दृश्यों, वानर सेना और लंका दहन के लिए हाई-एंड वीएफएक्स (VFX) और स्पेशल इफेक्ट्स की दरकार है, इसलिए पोस्ट-प्रोडक्शन टीम को अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
क्या 2 पार्ट की जगह 'ट्रायलॉजी' बन सकती है रामायण?
बातचीत के दौरान नमित मल्होत्रा ने एक और दिलचस्प संकेत दिया कि 'रामायण' को आगे चलकर तीन भागों (Trilogy) में भी बदला जा सकता है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस महाकाव्य को तीन फिल्मों की श्रृंखला के रूप में ही सोचा गया था, लेकिन बाद में कहानी को समेटकर दो भागों में ढालने का निर्णय लिया गया।
हालांकि, मल्होत्रा ने कहा कि जब पहला भाग सिनेमाघरों में रिलीज होकर दर्शकों के सामने आएगा, तो उसके फीडबैक, समीक्षाओं और वैश्विक दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर मेकर्स एक बार फिर समीक्षा कर सकते हैं कि क्या कहानी में कुछ जोड़ने या इसे तीसरे भाग तक विस्तारित करने की आवश्यकता है। फिलहाल मेकर्स का पूरा ध्यान पार्ट-1 को तकनीकी और भावनात्मक रूप से निर्दोष बनाने पर टिका है।
दो अलग रन-टाइम और दो मास्टर वर्जन की रणनीति
मेकर्स की यह योजना भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार देखी जा रही है:
-
भारतीय/घरेलू वर्जन: यह वर्जन भारतीय दर्शकों की सांस्कृतिक संवेदनाओं, विस्तृत गीतों, संवादों और पौराणिक भावनात्मकता के अनुरूप पूरे रन-टाइम के साथ रिलीज होगा।
-
इंटरनेशनल/ग्लोबल वर्जन: पश्चिमी और गैर-भारतीय दर्शकों के लिए तैयार किए गए वर्जन में रन-टाइम को थोड़ा क्रिस्प रखा जाएगा, संवादों की बनावट पश्चिमी कथावाचन के अनुकूल होगी और विजुअल्स को हॉलीवुड मानकों के अनुसार संपादन टेबल पर ढाला जाएगा।
फिल्म इंडस्ट्री के विश्लेषकों का मानना है कि नमित मल्होत्रा का सीक्वल को 2028 तक टालने का फैसला व्यावसायिक दृष्टि से जोखिम भरा नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा मास्टरस्ट्रोक है। 'बाहुबली' और 'अवतार' जैसी वैश्विक फ्रेंचाइजीज ने भी अपने सीक्वल के वीएफएक्स और विजुअल स्केल को परफेक्ट करने के लिए पर्याप्त समय लिया था। अब दर्शकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय सिनेमा की यह सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्तुति वैश्विक मंच पर क्या कीर्तिमान रचती है।