OTT पर मौजूद 5 एपिसोड की इस रोंगटे खड़े करने वाली वेब सीरीज को देखने से पहले थाम लें दिल

OTT पर मौजूद 5 एपिसोड की इस रोंगटे खड़े करने वाली वेब सीरीज को देखने से पहले थाम लें दिल

डिजिटल स्ट्रीमिंग और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हर हफ्ते दर्जनों थ्रिलर, क्राइम और सस्पेंस प्रोजेक्ट्स दस्तक देते हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं बल्कि दर्शक के जेहन में एक गहरा खौफ छोड़ जाती हैं। अगर आप भी रात के सन्नाटे में हॉरर और साइकोलॉजिकल सस्पेंस देखने के शौकीन हैं, तो ओटीटी स्पेस में एक ऐसी सीरीज मौजूद है जिसे देखने के लिए वाकई जिगरे में बड़ा दम चाहिए। महज 5 एपिसोड की यह मिनी-सीरीज इतनी डरावनी और तनावपूर्ण है कि इसे अकेले देखने की गलती करने पर रात को नींद आना दूभर हो सकता है।

नए घर में शिफ्ट हुई मां-बेटी और शुरू हुआ अजीब घटनाओं का खौफनाक सिलसिला

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली सीरीज का नाम 'कन्नामूची' है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) पर दर्शकों को सिहरने पर मजबूर कर रही है। कहानी की शुरुआत प्रिया नाम की एक सिंगल मदर के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपने पति की आकस्मिक मौत के गहरे सदमे से उबरने और अपनी जिंदगी की एक नई शुरुआत करने के लिए अपनी मासूम बेटी के साथ चेन्नई के एक नए अपार्टमेंट में शिफ्ट होती है। प्रिया की बेटी न तो बोल सकती है और न ही सुन सकती है। नई शुरुआत की उम्मीदों के साथ घर में कदम रखते ही दोनों मां-बेटी को उस फ्लैट के भीतर अजीबोगरीब सायों, खौफनाक आवाजों और अस्वाभाविक गतिविधियों का आभास होने लगता है।

आंख-मिचौली के खेल में गायब हुई मासूम बच्ची और खुली 20 साल पुरानी मर्डर मिस्ट्री

कहानी में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ उस वक्त आता है जब फ्लैट के अंदर 'हाइड एंड सीक' (आंख-मिचौली) खेलते हुए प्रिया की दिव्यांग बेटी अचानक रहस्यमयी तरीके से गायब हो जाती है। बंद दरवाजों और सुनसान कमरों के बीच जब बदहवास मां अपनी बच्ची की तलाश शुरू करती है, तो परत-दर-परत उस अपार्टमेंट का ऐसा काला अतीत सामने आता है जिसे जानकर किसी की भी रूह कांप जाए। जांच और खोजबीन के दौरान पता चलता है कि उस फ्लैट में सालों पहले एक शख्स ने आत्महत्या की थी। बच्ची की तलाश करते-करते प्रिया 20 साल पुरानी एक अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री के केंद्र में जा पहुंचती है। अब क्या वह सुपरनैचुरल ताकतों के चंगुल से अपनी बेटी को जिंदा बचा पाएगी, यही इस कहानी का मुख्य रोमांच है।

सस्पेंस, साइकोलॉजिकल ड्रामा और बैकग्राउंड स्कोर का परफेक्ट मिश्रण

निर्देशक अविनाश हरिहरन के सधे हुए निर्देशन में तैयार हुई यह सीरीज पारंपरिक भूतिया कहानियों की तरह केवल चीख-पुकार पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि दिमाग के साथ एक साइकोलॉजिकल खेल खेलती है। सीरीज में आराध्या, शम्मा कसिम (पूर्णा) और विवेक प्रसन्ना ने अपने-अपने किरदारों में जान फूंक दी है। विशेष रूप से एक मूक-बधिर बच्ची की मां के रूप में लाचारी, खौफ और अटूट मातृत्व के जज्बातों को जिस शिद्दत से पर्दे पर उतारा गया है, वह दिल को छू जाता है। सीरीज का सिनेमैटोग्राफी वर्क, डार्क टोन लाइटिंग और सन्नाटे को चीरता हुआ बैकग्राउंड म्यूजिक हर सीन में तनाव को सातवें आसमान पर पहुंचा देता है।

20 से 30 मिनट के 5 एपिसोड: एक सिटिंग में देखने लायक बिंज-वॉच कंटेंट

इस मिनी-सीरीज की सबसे बड़ी यूएसपी इसका कसा हुआ स्क्रीनप्ले और छोटा रनटाइम है। सीरीज में कुल 5 एपिसोड हैं और हर एपिसोड की अवधि मात्र 20 से 30 मिनट के बीच रखी गई है। इसमें कोई गैर-जरूरी मेलोड्रामा या खिंचाव नहीं है; हर एपिसोड के अंत पर मिलने वाला क्लिफहैंगर दर्शकों को अगला एपिसोड प्ले करने पर विवश कर देता है। आईएमडीबी (IMDb) पर इसे 6.3 की सम्मानजनक रेटिंग हासिल है। मूल रूप से तमिल में बनी इस सीरीज की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसे हिंदी, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में भी डब कर उपलब्ध कराया गया है, जिससे पूरे देश के सिनेमा प्रेमी इसका लुत्फ उठा रहे हैं।

अकेले देखने से बचें, हॉरर प्रेमियों के लिए वीकेंड की बेस्ट वॉचलिस्ट

मनोरंजन समीक्षकों और ओटीटी दर्शकों का एकमत से यही कहना है कि अगर आप कमजोर दिल वाले हैं तो देर रात लाइट बंद करके इसे अकेले देखने की गलती कतई न करें। घर के सन्नाटे में इस सीरीज के दृश्य और साउंड इफेक्ट्स आपके दिमाग पर गहरा असर छोड़ सकते हैं। हालांकि, यदि आप सच्चे हॉरर-मिस्ट्री के शौकीन हैं और वीकेंड पर किसी ऐसी सीरीज की तलाश में हैं जो शुरू होते ही खत्म होने तक आपको कुर्सी से बांधे रखे, तो 'कन्नामूची' आपकी वॉचलिस्ट में शीर्ष पर होनी चाहिए।