जाली दस्तावेजों पर ब्रिटेन पहुंचे 14 पंजाबी, भारत प्रत्यर्पण की तैयारी में जुटी पुलिस
पंजाब में अवैध आव्रजन और कबूतरबाजी के खिलाफ चल रही व्यापक मुहिम के बीच एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां जाली ई-वीजा के सहारे पंजाब के 14 युवाओं को अवैध तरीके से यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) पहुंचा दिया गया। यूके बॉर्डर फोर्स और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया इनपुट साझा होने के बाद इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की कलई खुल गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब पुलिस ने संबंधित ट्रेवल एजेंटों और बिचौलियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है, साथ ही अवैध रूप से ब्रिटेन की धरती पर मौजूद सभी 14 नागरिकों को भारत वापस लाने के लिए औपचारिक प्रत्यर्पण (Extradition) और निर्वासन प्रक्रिया की कागजी कार्रवाई तेज कर दी है।
विदेश जाने की चाहत रखने वाले युवाओं की मजबूरी और सपनों का फायदा उठाकर सक्रिय यह गिरोह फर्जी इलेक्ट्रॉनिक वीजा और छेड़छाड़ किए गए पासपोर्ट दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन 14 यात्रियों को भारत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से फर्जी अप्रूवल लेटर और जाली ई-वीजा प्रिंटआउट के सहारे कुछ ट्रांजिट देशों के रास्ते ब्रिटेन के हीथ्रो और अन्य हवाई अड्डों पर उतारा गया। ब्रिटिश इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की गहन डिजिटल जांच के दौरान जब वीजा रेफरेंस नंबर संबंधित डेटाबेस से मेल नहीं खाए, तब जाकर इस सुनियोजित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।
फर्जी ई-वीजा का इंटरनेशनल सिंडिकेट: लाखों रुपये ऐंठकर थमाए जाली दस्तावेज
शुरुआती पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि जालंधर, होशियारपुर, मोगा और नवांशहर के स्थानीय एजेंटों ने अंतरराष्ट्रीय रैकेट से साठगांठ कर इन युवाओं और उनके परिवारों से प्रति व्यक्ति 20 से 35 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली थी। एजेंटों ने पीड़ितों को यह भरोसा दिलाया था कि ब्रिटेन सरकार के इलेक्ट्रॉनिक वीजा सिस्टम के जरिए सीधे वर्क परमिट या टूरिस्ट एंट्री की वैध अनुमति दिला दी गई है। हालांकि, तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि शातिर ठगों ने आधिकारिक पोर्टल की हुबहू नकल कर नकली अप्रूवल पीडीएफ तैयार की थी, जिसे सामान्य जांच में पकड़ना मुश्किल था।
पंजाब पुलिस की विशेष अपराध शाखा और एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने इस मामले में नामजद एजेंटों के दफ्तरों और ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। कई कंप्यूटर हार्ड ड्राइव, फर्जी मुहरें, जाली बैंक स्टेटमेंट्स और बड़ी संख्या में संदिग्ध पासपोर्ट जब्त किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक सामान्य धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि यह संगठित साइबर अपराध, वित्तीय हेराफेरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर उल्लंघन है, जिसमें हवाई अड्डों पर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के जरिए यूके प्रशासन से संपर्क, जल्द जारी होगा रेड कॉर्नर नोटिस
विदेश में फंसे इन 14 नागरिकों की कानूनी वापसी सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए ब्रिटिश उच्चायोग व यूके होम ऑफिस के साथ समन्वय स्थापित किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि आरोपी व्यक्ति स्थानीय अदालतों में शरण या कानूनी राहत पाने का प्रयास करते हैं, तो भारत सरकार उनके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड और जाली दस्तावेजों के पुख्ता सबूत पेश कर प्रत्यर्पण संधि के प्रावधानों को लागू करेगी। इसके साथ ही फरार मुख्य मास्टरमाइंड ट्रेवल एजेंटों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) और इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पंजाब पुलिस ने आम नागरिकों और युवाओं से एक बार फिर अपील की है कि वे विदेश जाने के लिए केवल विदेश मंत्रालय द्वारा पंजीकृत और प्रमाणित भर्ती एजेंटों (Protector of Emigrants Approved Agents) की ही सेवाएं लें। बिना सत्यापन के सोशल मीडिया विज्ञापनों और अनाधिकृत बिचौलियों के झांसे में आकर अपनी जीवनभर की पूंजी और करियर दांव पर न लगाएं, क्योंकि फर्जी दस्तावेजों पर विदेश पहुंचने पर न केवल कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ता है, बल्कि हमेशा के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध भी लग जाता है।