व्हीलचेयर क्रिकेट: पंजाब को हराकर चंडीगढ़ ने जीती ट्रॉफी, मैदान में दिखा अद्भुत जज्बा
सपनों और हौसलों को जब खेल का मंच मिल जाए, तो शारीरिक अक्षमताएं केवल शब्द बनकर रह जाती हैं। शनिवार को चंडीगढ़ के ऐतिहासिक सेक्टर-10 स्थित डीएवी कॉलेज के खेल मैदान पर कुछ ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जिसने खेल और मानवीय जीवटता की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित कर दिया। व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन चंडीगढ़ की देखरेख में आयोजित दोस्ताना टी-20 सीरीज के रोमांचक मुकाबलों में चंडीगढ़ की टीम ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पंजाब की टीम को दोनों शुरुआती मुकाबलों में करारी शिकस्त देकर प्रतिष्ठित विनर ट्रॉफी पर कब्जा जमा लिया। हालांकि इस महामुकाबले का असली आकर्षण स्कोरबोर्ड पर दर्ज रन या जीत-हार के आंकड़े नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की आंखों में जलती हुई जीत की अदम्य ललक और मैदान पर दिखाई गई अद्भुत खेल भावना रही।
मैदान में दाखिल होते ही हर दर्शक का ध्यान उन खिलाड़ियों पर टिक गया, जो अपनी व्हीलचेयर के पहियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर बाउंड्री के पार गेंद पहुंचाने के लिए तैयार खड़े थे। चंडीगढ़ की टीम ने पहले मुकाबले से ही बेहद आक्रामक रणनीति अपनाई और बल्लेबाजी, गेंदबाजी व फील्डिंग—तीनों ही विभागों में पंजाब के ऊपर निरंतर मानसिक व तकनीकी दबाव बनाए रखा। जैसे ही विजयी रन बना और अंपायर ने अंतिम आउट का इशारा किया, चंडीगढ़ के खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के पहियों से पहिया मिलाकर और तिरंगा लहराकर मैदान में जो विजय उत्सव मनाया, उसने पूरे स्टेडियम में मौजूद हर शख्स की आंखें गर्व से नम कर दीं।
पहियों पर बैठकर गेंदबाजी और बल्लेबाजी का हैरतअंगेज संतुलन, जब बाउंड्री पार गिरी गेंद
व्हीलचेयर पर बैठकर पेशेवर स्तर पर गेंदबाजी करना तकनीकी दृष्टिकोण से कितना कठिन है, इसका प्रमाण मैदान पर हर गेंद के साथ मिल रहा था। सामान्य गेंदबाजों के विपरीत व्हीलचेयर गेंदबाज के पास रन-अप का कोई सहारा नहीं होता। उन्हें पूरी तरह से अपने कंधों, बाजुओं और कलाई के बल पर शरीर का संतुलन साधते हुए गेंद को सही लाइन, लेंथ और वांछित गति प्रदान करनी पड़ती थी। इसके बावजूद चंडीगढ़ और पंजाब के गेंदबाजों ने जिस धारदार गति और अचूक एक्यूरेसी के साथ स्विंग व टर्न का प्रदर्शन किया, उसने तकनीकी विशेषज्ञों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
वहीं दूसरी छोर पर तैयार बल्लेबाज भी किसी से कम साबित नहीं हुए। व्हीलचेयर पर बंधे होने के बावजूद बल्लेबाजों की टाइमिंग और हैंड-आई कोऑर्डिनेशन इतना सटीक था कि गेंद आते ही उन्होंने मैदान के चारों तरफ आकर्षक कवर ड्राइव, कट और पुल शॉट्स की झड़ी लगा दी। जब-जब बल्ले से निकली गेंद हवा में तैरती हुई सीमारेखा के बाहर छह रनों के लिए गिरती, पूरा डीएवी कॉलेज मैदान सीटियों और दर्शकों की जोरदार तालियों से गूंज उठता था। हर चौके और छक्के के बाद डगआउट में बैठे खिलाड़ियों का जोश यह बता रहा था कि शरीर चाहे व्हीलचेयर पर हो, पर उनका आत्मविश्वास आसमान छू रहा था।
फील्डिंग में दिखी चीते जैसी फुर्ती: पहियों से रोकी गेंद, हवा में उड़कर बचाए निश्चित बाउंड्री
इस ऐतिहासिक मुकाबले का सबसे रोमांचक और सांसें रोक देने वाला पहलू खिलाड़ियों की अभूतपूर्व फील्डिंग रही। गेंद जैसे ही 30 गज के घेरे से बाहर किसी भी दिशा में तेजी से निकलती, फील्डर बिना एक पल गंवाए अपनी दोनों हथेलियों से व्हीलचेयर के रिम को पूरी ताकत से घुमाते हुए चीते की रफ्तार से गेंद का पीछा करने निकल पड़ते थे। कई मौकों पर तो खिलाड़ियों ने गेंद को बाउंड्री पार जाने से रोकने के लिए सीधे अपनी व्हीलचेयर को गेंद की दिशा में स्लाइड कर दिया, जिससे गेंद पहियों से टकराकर रुक गई।
गेंद को व्हीलचेयर से ब्लॉक करने के तुरंत बाद खिलाड़ी बिजली की तेजी से नीचे झुकते, गेंद को एक हाथ से उठाते और सीधे विकेटकीपर या गेंदबाज के दस्तानों में सटीक थ्रो फेंकते। खिलाड़ियों द्वारा विकेट बचाने और सिंगल रन को रोकने के लिए मैदान पर किया गया यह आत्मसमर्पण और फुर्ती पेशेवर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के स्तर से कम नहीं थी। इस अद्भुत समर्पण ने साबित कर दिया कि जब दिल में जज्बा और देश-समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो, तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती।
'स्ट्रॉन्गर विदाउट ड्रग्स' का सशक्त सामाजिक संदेश, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बढ़ाया हौसला
यह पूरा टूर्नामेंट केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे ‘स्ट्रॉन्गर विदाउट ड्रग्स’ (Stronger Without Drugs) के एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील सामाजिक मिशन के तहत आयोजित किया गया था। मैदान में पसीना बहा रहे इन दिव्यांग योद्धाओं ने समाज, विशेषकर पंजाब और चंडीगढ़ की युवा पीढ़ी को यह कड़ा और सकारात्मक संदेश दिया कि यदि शारीरिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करने के बावजूद कोई व्यक्ति खेल के जरिए अपनी मंजिल तय कर सकता है, तो किसी भी सामान्य युवा को नशे के अंधकार में भटकने का कोई हक नहीं है।
खिलाड़ियों के इस अद्वितीय जज्बे को सलाम करने और उनका हौसला अफजाई करने के लिए पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया विशेष रूप से मैदान पर पहुंचे। राज्यपाल कटारिया ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों से हाथ मिलाकर उनका परिचय प्राप्त किया और उनके अदम्य साहस की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी समाज के सच्चे रोल मॉडल और प्रेरणास्रोत हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया है कि व्हीलचेयर कोई बेबसी नहीं, बल्कि विजय पथ पर आगे बढ़ने का एक पहिया है। अंत में विजेता चंडीगढ़ टीम को चमचमाती ट्रॉफी सौंपी गई और उपविजेता पंजाब टीम के खिलाड़ियों को भी उनकी शानदार खेल भावना के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।