रावण के पुतले पर सीएम मान, विधायक व मेयर के चेहरे: लुधियाना में अकाली पार्षद सहित 7 पर FIR दर्ज

रावण के पुतले पर सीएम मान, विधायक व मेयर के चेहरे: लुधियाना में अकाली पार्षद सहित 7 पर FIR दर्ज

लुधियाना। पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में विजयादशमी के पावन अवसर पर रावण दहन की परंपरा राजनीतिक तनातनी और कानूनी दांव-पेंच का अखाड़ा बन गई। शहर में दशहरा उत्सव के दौरान रावण के पुतले के दस चेहरों पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, स्थानीय आम आदमी पार्टी के विधायक और नगर निगम के मेयर के पोस्टर चिपकाए जाने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस कृत्य को गंभीर राजनीतिक दुराशय, सार्वजनिक अव्यवस्था और मानहानि से जोड़ते हुए लुधियाना पुलिस ने त्वरित कानूनी शिकंजा कसा है। पुलिस ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के एक प्रमुख स्थानीय पार्षद सहित कुल सात लोगों के खिलाफ विभिन्न गैर-जमानती और संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दशहरे के पावन पर्व पर राजनीतिक प्रतिशोध का अखाड़ा बना पुतला दहन स्थल

दशहरा असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन लुधियाना के एक इलाके में आयोजित इस कार्यक्रम का स्वरूप उस समय अचानक बदल गया जब ग्राउंड में खड़े किए गए रावण के पुतले पर उपस्थित लोगों की नजर पड़ी। सामान्यतः रावण के पुतले पर पौराणिक दशानन का स्वरूप दर्शाया जाता है, लेकिन यहां पुतले के अलग-अलग मुखों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान, इलाके के विधायक और मेयर की बड़ी-बड़ी तस्वीरें चिपकाई गई थीं। स्थानीय निवासियों और वहां मौजूद श्रद्धालुओं में यह दृश्य देखकर कानाफूसी शुरू हो गई। देखते ही देखते यह खबर सोशल मीडिया पर फैल गई और आयोजन स्थल पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगने लगा।

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी रोष, थाने के बाहर प्रदर्शन और शिकायत दर्ज

जैसे ही इस घटनाक्रम की सूचना आम आदमी पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों और समर्थकों को मिली, वे भारी संख्या में एकत्रित हो गए। कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक पदों की मर्यादा तार-तार करने और संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री व जन प्रतिनिधियों की छवि को जानबूझकर जनता की नजरों में धूमिल करने का सोचा-समझा षड्यंत्र करार दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की औपचारिक शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई गई। शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाया गया कि अकाली दल से जुड़े नेताओं ने शहर की शांति व्यवस्था को भंग करने और लोगों की धार्मिक भावनाओं की आड़ में राजनीतिक द्वेष साधने के इरादे से यह आपत्तिजनक कृत्य किया है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: अकाली पार्षद सहित 7 नामजद आरोपियों पर केस दर्ज

मामले की संवेदनशीलता और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका को भांपते हुए लुधियाना पुलिस कमिश्नरेट तुरंत हरकत में आया। मौके पर पहुंचकर पुलिस बल ने स्थिति का मुआयना किया और पुतले पर लगी विवादित तस्वीरों व वीडियो फुटेज को साक्ष्य के तौर पर अपने कब्जे में लिया। जांच के शुरुआती निष्कर्षों के आधार पर पुलिस ने शिरोमणि अकाली दल के मौजूदा पार्षद, उनके कुछ नजदीकी समर्थकों और आयोजन से जुड़े कुल सात व्यक्तियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कर ली। इन आरोपियों पर समाज में वैमनस्यता फैलाने, शांति भंग करने की नीयत से उकसाने और जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक ठेस पहुंचाने से संबंधित सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

शिअद ने आरोपों को बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई, प्रशासनिक विफलता पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, एफआईआर दर्ज होने के बाद शिरोमणि अकाली दल के खेमे में भी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और सत्ता का दुरुपयोग करार दिया है। अकाली दल के नेताओं का कहना है कि लुधियाना शहर की बदहाल सड़कों, सीवरेज की समस्याओं, नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार और विकास कार्यों की नाकामी को दर्शाने के लिए कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप से जनता की नाराजगी जाहिर की थी। विपक्ष का आरोप है कि आम आदमी पार्टी की सरकार अपनी प्रशासनिक असफलताओं पर सवाल उठाने वालों की आवाज को मुकदमों और पुलिसिया दबाव के जरिए दबाने की कोशिश कर रही है।

स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल, संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई गई

इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ही शहर के संबंधित इलाके में राजनीतिक तनाव साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। किसी भी संभावित टकराव या हंगामे से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून हाथ में लेने, धार्मिक त्योहारों के मंच से अराजकता फैलाने या माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्षेत्र में पीसीआर वैन की गश्त तेज कर दी गई है और पुलिस बल नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रहा है।

लोकतांत्रिक विरोध और सार्वजनिक मर्यादा के बीच खिंचती सीमा रेखा

लुधियाना का यह विवाद केवल एक प्राथमिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पंजाब की राजनीति में विरोध प्रदर्शन के घटते स्तर पर भी नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में नीतियों, फैसलों और प्रशासनिक खामियों का कड़ा विरोध करने का अधिकार हर राजनीतिक दल को है, लेकिन धार्मिक प्रतीकों और सामाजिक पर्वों के मंच का इस्तेमाल करके किसी के चेहरे को रावण के पुतले पर मढ़ना राजनीतिक शुचिता के खिलाफ जाता है। फिलहाल पूरे पंजाब की निगाहें लुधियाना पुलिस की आगामी जांच और आरोपियों की धरपकड़ पर टिकी हुई हैं।