दिलजीत के दिल्ली कॉन्सर्ट पर विवाद: चंडीगढ़ के प्रोफेसर की शिकायत पर बाल अधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर को भेजा नोटिस

दिलजीत के दिल्ली कॉन्सर्ट पर विवाद: चंडीगढ़ के प्रोफेसर की शिकायत पर बाल अधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर को भेजा नोटिस

पंजाबी गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ के दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू (JLN) स्टेडियम में आयोजित लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कॉन्सर्ट के आयोजन से ठीक पहले उनके चुनिंदा गानों में शराब, नशा और बंदूक संस्कृति के महिमामंडन को लेकर कानूनी पेच फंस गया है। इस मामले में चंडीगढ़ के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर ने आपत्ति दर्ज कराते हुए दिल्ली पुलिस और बाल अधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। प्रोफेसर की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर (CP) को आधिकारिक नोटिस जारी कर तुरंत आवश्यक कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित इस मेगा म्यूजिकल इवेंट को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्साह बना हुआ था, लेकिन इस शिकायत और आयोग के हस्तक्षेप के बाद आयोजन स्थल से लेकर कानूनी गलियारों तक हलचल मच गई है। बाल आयोग ने नाबालिगों और युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए पुलिस प्रशासन को कानून सम्मत निगरानी रखने को कहा है।

चंडीगढ़ के प्रोफेसर ने उठाई आपत्ति: युवा पीढ़ी पर नशे और हिंसा के प्रचार का आरोप

इस पूरे विवाद की शुरुआत चंडीगढ़ निवासी प्रोफेसर द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के साथ हुई। प्रोफेसर ने अपनी याचिका में साफ तौर पर कहा कि दिलजीत दोसांझ के कई लोकप्रिय गानों जैसे 'पटियाला पैग' और '5 तारा' के बोल खुलेआम शराब पीने और नशाखोरी को कूल लाइफस्टाइल के तौर पर पेश करते हैं। शिकायतकर्ता का तर्क है कि जब लाइव कॉन्सर्ट में हजारों की संख्या में किशोर और युवा दर्शक जुटते हैं, तो इस प्रकार के गानों का उनके कोमल मन पर गंभीर और नकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है।

प्रोफेसर ने जोर देकर कहा कि कला और संगीत की आड़ में शराब, तंबाकू, ड्रग्स अथवा आक्रामकता को बढ़ावा देने वाले गीतों का सार्वजनिक मंचों पर प्रदर्शन किशोर न्याय (जुवेनाइल जस्टिस) अधिनियम और बाल संरक्षण के बुनियादी नियमों का खुला उल्लंघन है। शिकायत में मांग की गई कि कॉन्सर्ट के दौरान ऐसे किसी भी ट्रैक के लाइव गायन पर पूर्ण रोक लगाई जाए, जिससे नई पीढ़ी को नशे की तरफ धकेलने वाली संस्कृति से बचाया जा सके।

बाल संरक्षण आयोग का दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कड़ा नोटिस: नियमों का पालन कराने का अल्टीमेटम

चंडीगढ़ से मिली इस संवेदनशील शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) ने त्वरित कार्रवाई की। आयोग ने दिल्ली के पुलिस आयुक्त (CP) को एक विस्तृत पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया और मामले में तत्काल दखल देने को कहा। आयोग ने निर्देश दिया कि जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित इस शो में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और कानूनी प्रावधानों के तहत तय नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

आयोग के नोटिस में मुख्य रूप से तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया है: पहला, मंच से शराब और नशीले पदार्थों को प्रमोट करने वाले गीतों की प्रस्तुति पर कड़ी निगरानी रखी जाए। दूसरा, आयोजन स्थल पर नाबालिग बच्चों को शराब परोसने अथवा उपलब्ध कराने पर पूरी तरह पाबंदी हो और इसके लिए सख्त आईडी वेरिफिकेशन किया जाए। तीसरा, कॉन्सर्ट में साउंड प्रेशर लेवल (ध्वनि तीव्रता) को नियंत्रित रखा जाए, ताकि तेज आवाज के कारण बच्चों की सुनने की क्षमता को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

दिल्ली पुलिस और आयोजकों के सामने सुरक्षा एवं गाइडलाइंस की दोहरी चुनौती

आयोग का नोटिस दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचते ही पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक कॉन्सर्ट के आयोजकों को स्पष्ट हिदायत दी जा रही है कि किसी भी कानून या बाल संरक्षण प्रावधान का उल्लंघन पाए जाने पर सीधे तौर पर आयोजक संस्था जिम्मेदार होगी। सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक डायवर्जन के साथ-साथ अब पुलिस की एक विशेष टीम कॉन्सर्ट के भीतर साउंड नॉर्म्स और एक्साइज नियमों की निगरानी में जुट गई है।

जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के आसपास के इलाकों में पहले से ही भारी ट्रैफिक दबाव को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वहीं आयोजकों से लिखित हलफनामा और अंडरटेकिंग लेने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि मंच से किसी भी आपत्तिजनक या नशे को बढ़ावा देने वाले कंटेंट की प्रस्तुति न हो सके।

सेलिब्रिटी कॉन्सर्ट्स और सांस्कृतिक जिम्मेदारी पर फिर छिड़ी राष्ट्रीय बहस

यह पहला मौका नहीं है जब दिलजीत दोसांझ के गानों को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो; इससे पहले भी तेलंगाना सरकार और अन्य राज्यों के आयोजनों के दौरान उन्हें इसी तरह के कानूनी नोटिस मिल चुके हैं। इस ताजा विवाद ने एक बार फिर मुख्यधारा के संगीत, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच के संतुलन पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। समाजशास्त्रियों और शिक्षाविदों का मानना है कि पॉप कल्चर के बड़े आइकन के रूप में कलाकारों का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वे अपने गानों से ऐसा संदेश न दें जो युवाओं को गलत दिशा में प्रेरित करे।

फिलहाल सभी की निगाहें दिल्ली पुलिस की अंतिम कार्रवाई और खुद दिलजीत दोसांझ की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कॉन्सर्ट के दौरान नियमों की अनदेखी हुई, तो आयोजकों के खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।