'पीएम मोदी ने परिवार के मुखिया की तरह सुनी छात्रों की आवाज', राघव चड्ढा ने एंटी-पेपर लीक बिल का किया जोरदार समर्थन, जानें नए कानून की खास बातें
राज्यसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान एक नया सियासी समीकरण और कड़ा रुख देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (AAP) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने इस विधेयक का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने इस बिल को देश का पहला समर्पित 'एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क' करार दिया, जो सालों से छात्रों की मेहनत बर्बाद कर रहे माफियाओं पर नकेल कसेगा।
'पीएम मोदी ने परिवार के मुखिया की तरह लिया फैसला'
चर्चा के दौरान चड्ढा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों के हित में बेहद त्वरित और प्रभावी कदम उठाए हैं। चड्ढा के मुताबिक, "प्रधानमंत्री ने सिर्फ सरकार के प्रमुख के तौर पर नहीं, बल्कि एक परिवार के मुखिया की तरह छात्रों की पीड़ा को गहराई से समझा और कड़े फैसले लिए।" उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब कोई पेपर लीक होता है, तो सिर्फ एक कागज का टुकड़ा लीक नहीं होता, बल्कि लाखों छात्रों का आत्मविश्वास, सपने और भविष्य भी लीक हो जाता है।
NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाने पर जोर
हाल ही में हुए नीट (NEET) विवाद का जिक्र करते हुए राघव चड्ढा ने सरकार के एक्शन प्लान की तारीफ की। उन्होंने सीबीआई (CBI) जांच, एसआईटी (SIT) का गठन, एनटीए (NTA) में बड़े प्रशासनिक बदलाव और नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में बनी विशेषज्ञ टास्क फोर्स का स्वागत किया। इसके साथ ही उन्होंने यह महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया कि भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित कर देना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश ही न बचे।
10 साल की सजा और 10 करोड़ का जुर्माना: संगठित अपराध पर वार
इस नए कानून के तहत पेपर लीक को अब एक 'संगठित अपराध' की श्रेणी में रखा जाएगा। चड्ढा ने स्पष्ट किया कि अब कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, सॉल्वर गैंग और भ्रष्ट अधिकारियों की खैर नहीं है। इस बिल में अपराधियों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का सख्त प्रावधान है। अपराधों को गैर-जमानती बनाने के साथ-साथ समयबद्ध जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी मजबूत व्यवस्थाएं भी इस कानून का अहम हिस्सा हैं।
छात्र आंदोलनों पर राजनीति न हो: पंजाब और कर्नाटक का उदाहरण
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि एक परीक्षा सिर्फ रैंक तय करती है, किसी छात्र की असल कीमत नहीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्र आंदोलनों का राजनीतिकरण कर अपना स्वार्थ नहीं साधना चाहिए। स्थानीय और राज्यों के उदाहरण देते हुए उन्होंने पंजाब में नायब तहसीलदार, पीएसटीईटी, फार्मेसी और आबकारी निरीक्षक भर्ती में हुई कथित धांधली, तथा कर्नाटक में पेपर लीक मामले (जिसमें मंत्री के पीए की गिरफ्तारी हुई) का भी प्रमुखता से जिक्र किया।
चड्ढा ने अपने भाषण का समापन यह कहते हुए किया कि यह आर-पार की लड़ाई मेरिट और माफिया के बीच है। उनका यह कदम सुर्खियां बटोरने के लिए नहीं, बल्कि देश के परीक्षा तंत्र को पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के समाधान के लिए है।