पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: आयोग का बिगुल, 12 नवंबर से होगी EVM-VVPAT की जांच
चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा आम चुनाव भले ही अभी दूर नजर आ रहे हों, लेकिन प्रशासनिक और चुनावी मशीनरी ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। भारत निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देशों के तहत पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की दिशा में सबसे अहम बुनियादी कदम उठाने की घोषणा कर दी है। राज्य के सभी 23 जिलों में स्थित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) मशीनों की पहली स्तरीय जांच यानी फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) का काम 12 नवंबर से विधिवत शुरू होने जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य मतदान के दिन तक मशीनों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से सटीक और संदेह से परे रखना है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक ब्योरे के मुताबिक, लोकतंत्र के इस बड़े उत्सव की तकनीकी नींव को मजबूत करने के लिए यह शुरुआती कवायद बेहद अनिवार्य मानी जाती है। आयोग का मानना है कि समय रहते तकनीकी और भौतिक परीक्षण पूरा कर लेने से अंतिम समय में किसी भी तरह की तकनीकी बाधा या राजनीतिक विवाद की गुंजाइश खत्म हो जाती है। इसके साथ ही जिलों के तमाम निर्वाचन अधिकारियों, इंजीनियरों और राजनीतिक प्रतिनिधियों को इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पंजाब में 12 नवंबर से शुरू होगा फर्स्ट लेवल चेकिंग का महाअभियान
चुनाव प्रक्रिया के नियमों के अनुसार, चुनाव से काफी पहले हर राज्य में वेयरहाउस में सुरक्षित रखी गई मशीनों का सघन परीक्षण किया जाता है। पंजाब में 12 नवंबर से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के तहत आयोग के अधिकृत इंजीनियर राज्य के हर जिले का दौरा करेंगे। ये इंजीनियर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) जैसी शीर्ष तकनीकी निर्माण कंपनियों से आते हैं। इनके द्वारा कंट्रोल यूनिट (CU), बैलेट यूनिट (BU) और वीवीपैट (VVPAT) की यांत्रिक और सॉफ्टवेयर संबंधी हर छोटी-बड़ी जांच की जाएगी।
इस जांच प्रक्रिया के दौरान इंजीनियर प्रत्येक मशीन को चालू करके देखेंगे कि कहीं कोई सर्किट या प्रिंटिंग से जुड़ी खराबी तो नहीं है। जिन मशीनों में मामूली खामी भी पाई जाएगी, उन्हें तुरंत मुख्य स्टॉक से अलग कर सुरक्षित कारखाने में तकनीकी सुधार के लिए वापस भेजा जाएगा। केवल वही मशीनें अगले चरण के लिए स्वीकृत होंगी जो जांच के सभी कड़े मानकों को शत-प्रतिशत पूरा करेंगी। इस प्रकार की तकनीकी स्क्रूटनी से मतदाताओं के मन में वोटिंग सिस्टम के प्रति अटूट विश्वास कायम रहता है।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खुलेगा स्ट्रॉन्ग रूम
चुनाव आयोग की पारदर्शी कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि फर्स्ट लेवल चेकिंग की पूरी प्रक्रिया राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों के सामने की जाती है। पंजाब के सभी जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को लिखित नोटिस भेजकर आमंत्रित करें।
स्ट्रॉन्ग रूम का ताला राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ही खोला जाएगा और उनके सामने ही मशीनों की सीलिंग और अनसीलिंग का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। चेकिंग हॉल के भीतर राजनीतिक दलों के एजेंट खुद मौजूद रहकर यह देख सकेंगे कि इंजीनियर किस तरह मशीनों का परीक्षण कर रहे हैं। यदि किसी दल के प्रतिनिधि को किसी मशीन की स्थिति पर कोई संदेह होता है, तो वह मौके पर ही अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है, जिसका निवारण चुनाव अधिकारी द्वारा तत्काल रिकॉर्ड पर किया जाएगा।
मॉक पोल से होगी मशीनों की वास्तविक सटीकता की सीधी पड़ताल
तकनीकी जांच पूरी होने के बाद मशीनों की विश्वसनीयता परखने के लिए बड़े पैमाने पर मॉक पोल आयोजित किए जाएंगे। आयोग के नियमों के मुताबिक, कुल उपलब्ध मशीनों में से औसतन पांच प्रतिशत मशीनों को रैंडम आधार पर चुना जाता है। इसके बाद राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में इन चुनिंदा मशीनों पर कम से कम 1200 से 1500 तक डमी वोट डाले जाते हैं।
इस प्रक्रिया में यह देखा जाता है कि बैलेट यूनिट पर दबाया गया बटन, कंट्रोल यूनिट में दर्ज हुआ मत और वीवीपैट से निकली कागजी पर्ची में कोई अंतर तो नहीं है। मॉक पोल समाप्त होने के बाद मतों की गिनती की जाती है और वीवीपैट पर्चियों से उसका मिलान कराया जाता है। इस मिलान का बाकायदा पंचनामा तैयार होता है जिस पर उपस्थित दलों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। यह प्रक्रिया इस बात की गारंटी देती है कि मतदान के वास्तविक दिन कोई भी मशीन गलत परिणाम दर्ज नहीं करेगी।
थ्री-टियर सुरक्षा घेरा और 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से होगी स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी
ईवीएम और वीवीपैट वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पंजाब पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के समन्वय से एक अभेद्य सुरक्षा खाका तैयार किया गया है। 12 नवंबर से जब यह प्रक्रिया शुरू होगी, तब से लेकर जांच समाप्त होने और मशीनों के पुनः सील होने तक वेयरहाउस के चारों ओर त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी।
वेयरहाउस परिसर और चेकिंग हॉल के हर कोने पर हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लाइव फुटेज जिला मुख्यालय और राज्य मुख्यालय के कंट्रोल रूम में 24 घंटे देखी जा सकेगी। किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति को उस परिसर के 100 मीटर के दायरे में भी फटकने की अनुमति नहीं होगी। चेकिंग हॉल में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह वरिष्ठ अधिकारी हो, इंजीनियर हो या राजनीतिक एजेंट, सभी का मेटल डिटेक्टर से सघन परीक्षण किया जाएगा और उन्हें अपने मोबाइल फोन या इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बाहर ही जमा कराने होंगे।
पंजाब के 23 जिलों में प्रशासनिक मशीनरी अलर्ट, जिलाधिकारियों को मिले विशेष निर्देश
राज्य के सभी 23 जिलों के डिप्टी कमिश्नरों, जो पदेन जिला चुनाव अधिकारी भी होते हैं, को इस पूरी प्रक्रिया का नोडल इंचार्ज बनाया गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला, बठिंडा, फिरोजपुर से लेकर पठानकोट और मोहाली तक, हर जिले में लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक बंदोबस्त समय रहते पूरे होने चाहिए।
जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वेयरहाउस में पर्याप्त रोशनी, अग्निशामक यंत्र, निर्बाध बिजली आपूर्ति और आपातकालीन बैकअप की व्यवस्था चाक-चौबंद रहे। साथ ही चेकिंग में शामिल होने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं ताकि वे आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों और सुरक्षा प्रोटोकॉल से भलीभांति अवगत रहें। जिला स्तर पर दैनिक प्रगति रिपोर्ट तैयार कर राज्य निर्वाचन मुख्यालय को भेजी जाएगी।
स्वतंत्र और निष्पक्ष 2027 चुनाव की दिशा में चुनाव आयोग का यह कदम क्यों है निर्णायक
आधुनिक चुनावी प्रक्रिया में जनविश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। पंजाब की राजनीतिक तासीर हमेशा से बेहद जागरूक और संवेदनशील रही है। ऐसे में चुनाव से काफी पहले प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर देना और राजनीतिक दलों को विश्वास में लेकर पारदर्शी प्रक्रिया शुरू करना चुनाव आयोग की परिपक्वता को दर्शाता है।
12 नवंबर से शुरू हो रहा यह चरण यह तय करेगा कि राज्य के करीब 25 हजार से अधिक संभावित मतदान केंद्रों के लिए पर्याप्त और दोषरहित मशीनें समय पर तैयार रहें। मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना कि उनका एक-एक वोट सुरक्षित है और सही जगह दर्ज हो रहा है, किसी भी लोकतंत्र की आत्मा है। पंजाब में आयोग की यह समयबद्ध शुरुआत 2027 के महासमर को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और तकनीक-सम्मत बनाने की दिशा में एक ठोस और सराहनीय पहल है।