AAP में भगदड़ पर बोले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह—पार्टी छोड़ने वालों को सिर्फ BJP में मिलेगी जगह

AAP में भगदड़ पर बोले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह—पार्टी छोड़ने वालों को सिर्फ BJP में मिलेगी जगह

चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में सियासी हलचल एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गई है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची कथित अंदरूनी खींचतान और नेताओं के पार्टी छोड़ने के सिलसिले पर पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। चंडीगढ़ स्थित पंजाब कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए परगट सिंह ने साफ शब्दों में दो टूक चेतावनी दी कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भागने वाले अवसरवादी नेताओं के लिए कांग्रेस के दरवाजे पूरी तरह बंद हैं। ऐसे नेताओं को अब सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में ही शरण मिलेगी।

इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में परगट सिंह के साथ पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला, पूर्व कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू और डॉ. राजकुमार वेरका समेत पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। नेताओं ने संयुक्त रूप से भगवंत मान सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए दावा किया कि पंजाब में बदलाव का दावा करने वाली पार्टी अब अंदरूनी कलह और जनता के मोहभंग के कारण ताश के पत्तों की तरह बिखर रही है।

'आप' की स्थिति रेत की दीवार जैसी, कांग्रेस के पास 117 सीटों पर मजबूत चेहरे

प्रेस वार्ता में परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी की मौजूदा संगठनात्मक स्थिति की तुलना 'रेत की दीवार' से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह रेत की दीवार पानी के एक हल्के थपेड़े से ढह जाती है, ठीक उसी तरह आम आदमी पार्टी का ढांचा पंजाब में भरभरा कर गिर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधायक, पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता अब नेतृत्व की नीतियों से त्रस्त होकर किनारा कर रहे हैं। परगट सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग पिछले साढ़े चार साल तक सत्ता की मलाई खाते रहे और रेत माफिया व अन्य भ्रष्ट तंत्र से जुड़े रहे, वे अब आगामी चुनावी नतीजों को भांपकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भाग रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर दलबदलुओं की शरणस्थली नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कैडर आधारित और ऐतिहासिक पार्टी है, जिसके पास पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर निष्ठावान, जुझारू और जीतने योग्य स्थानीय उम्मीदवारों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने उन कार्यकर्ताओं की अनदेखी कभी नहीं करेगी जिन्होंने कठिन समय में विपक्ष में रहकर जमीन पर पसीना बहाया है। पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं के लिए साफ संदेश है कि वे कांग्रेस की तरफ उम्मीद भरी नजरों से न देखें, उनके लिए केवल भाजपा का ही रास्ता खुला है, क्योंकि भाजपा पंजाब में ऐसे नेताओं को शामिल कराने की जल्दबाजी में है जिनका कोई जनाधार नहीं बचा है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी अत्यंत दुर्लभ और अपवादजनक स्थिति में केवल पार्टी हाईकमान ही कोई अंतिम फैसला ले सकता है, लेकिन आम तौर पर दल-बदलुओं के लिए दरवाजे बंद हैं।

प्रताप सिंह बाजवा का तीखा हमला: 50 हजार करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप

पत्रकार वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखे वित्तीय और प्रशासनिक आरोप जड़े। बाजवा ने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार वर्षों के शासनकाल में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान राज्य में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का सुनियोजित भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मॉडल की नकल करने के चक्कर में पंजाब के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। आबकारी नीति, रेत खनन और प्रचार-प्रसार के नाम पर जनता के खून-पसीने की कमाई को पानी की तरह बहाया गया है।

प्रताप बाजवा ने राज्य की कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज पंजाब में व्यापारी, किसान और आम नागरिक खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नशा विरोधी कार्यकर्ता परमिंदर सिंह झोटा की मानसा में दिनदहाड़े हुई हत्या का जिक्र करते हुए बाजवा ने कहा कि सरकार नशे के खात्मे का केवल खोखला दावा कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि नशा तस्करों के हौसले बुलंद हैं और आवाज उठाने वालों को खामोश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस का इस्तेमाल विपक्ष के नेताओं की आवाज दबाने और दिल्ली के राजनीतिक आकाओं के इशारे पर बदले की भावना से कार्रवाई करने के लिए किया जा रहा है। बाजवा ने एलान किया कि कांग्रेस जल्द ही पंजाब के इतिहास की सबसे बड़ी महारैली आयोजित करने जा रही है, जिसमें एक लाख से अधिक कार्यकर्ताओं का जनसैलाब उमड़ेगा और मान सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश खुलकर सामने आएगा।

पहली सूची के बाद आप में बगावत: टिकट कटने की आशंका और नेताओं का पलायन

दरअसल, पंजाब की सियासत में इस ताजा बयानबाजी की पृष्ठभूमि आम आदमी पार्टी द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर जारी की गई 40 उम्मीदवारों की पहली सूची के बाद तैयार हुई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस पहली सूची में केवल मौजूदा विधायकों को तरजीह दी गई, जबकि कई मजबूत दावेदारों और आंतरिक रूप से नाराज नेताओं को दरकिनार कर दिया गया। सूची जारी होते ही कई हलकों में असंतोष की चिंगारी भड़क उठी और पार्टी के कई नेता बगावती रुख अपनाते हुए पाला बदलने की तैयारी में जुट गए।

परगट सिंह ने इसी संदर्भ को रेखांकित करते हुए सवाल उठाया कि जो नेता साढ़े चार साल तक सत्ता का सुख भोगते रहे, वे ऐन चुनाव से पहले टिकट कटने की आशंका के चलते अपनी ही पार्टी से भागने पर क्यों मजबूर हैं? उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा को फिर से मैदान में उतारकर यह साबित कर दिया है कि उसका भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा महज एक मुखौटा था। इसके अलावा 40 उम्मीदवारों में मात्र चार महिलाओं को स्थान देने पर भी परगट सिंह ने हमला बोला और कहा कि महिलाओं को एक हजार रुपये देने का वादा करने वाली पार्टी ने टिकट वितरण में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। मानसा जैसी चर्चित सीट से उम्मीदवार घोषित न कर पाने को भी उन्होंने सरकार के डर और विफलता का प्रमाण बताया।

पंजाब का सियासी त्रिकोण: भाजपा की शरण में बागी और कांग्रेस की चुनावी बिसात

पंजाब के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला गहराता जा रहा है। परगट सिंह के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी का यह पहला आक्रामक और स्पष्ट नीतिगत रुख है, जिसने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है। हॉकी के मैदान पर भारतीय टीम की कप्तानी कर चुके ओलंपियन परगट सिंह अब कांग्रेस संगठन को एक अनुशासित इकाई के रूप में ढालने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका संदेश साफ है कि पार्टी केवल उन चेहरों को आगे लाएगी जो विचारधारा और संगठन के प्रति समर्पित हैं, न कि उन मौसमी नेताओं को जो चुनावी हवा देखकर पाला बदलते हैं।

दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी से छिटक रहे नेताओं के लिए भाजपा सबसे सुलभ मंच बनती दिख रही है, क्योंकि भाजपा पंजाब के ग्रामीण और शहरी इलाकों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए किसी भी दल के जाने-माने चेहरों को अपने पाले में लाने के लिए तत्पर है। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि दागी और अवसरवादी नेताओं को पार्टी में शामिल करने से जनता के बीच नकारात्मक संदेश जाता है। कांग्रेस की यह स्पष्ट घेराबंदी सत्तारूढ़ दल के उन असंतुष्ट नेताओं के लिए बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है, जो टिकट कटने की सूरत में कांग्रेस की तरफ उम्मीद भरी नजरें गड़ाए बैठे थे।

आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में दलबदल का यह खेल और तेज होने के आसार हैं। परगट सिंह और प्रताप सिंह बाजवा की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस ने यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस अब न सिर्फ आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाएगी, बल्कि आम आदमी पार्टी की कमजोर नस को पकड़कर शासन, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान को कटघरे में खड़ा करेगी।