'बगावत और भगदड़ के डर से AAP ने जल्दबाजी में उतारे 40 उम्मीदवार': पंजाब चुनाव की पहली सूची पर राजा वड़िंग का सीधा हमला
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा 40 प्रत्याशियों की पहली सूची घोषित किए जाने के बाद राज्य का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। सत्तारूढ़ दल के इस चुनावी दांव पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बेहद तीखा पलटवार किया है। नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ चुनावी रणनीति पर घंटों चले मंथन के बाद लुधियाना से सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी पर सीधा हमला बोला। राजा वड़िंग ने दो-टूक कहा कि आम आदमी पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा किसी आत्मविश्वास या जनसमर्थन के दम पर नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर सुलग रही भारी बगावत और विधायकों के पाला बदलने के खौफ में आकर की है।
वड़िंग ने कहा कि साढ़े चार साल के कार्यकाल के बाद आज जमीनी स्तर पर सरकार के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश है। पार्टी के अपने विधायक और पदाधिकारी जानते हैं कि जनता के बीच उनका जाना दूभर हो चुका है। ऐसे में कई मौजूदा विधायक और टिकट के दावेदार अन्य राजनीतिक दलों के संपर्क में थे। इस संभावित टूट, भगदड़ और खुले असंतोष को दबाने के लिए पार्टी हाईकमान ने आनन-फानन में 40 सीटों पर नामों पर मुहर लगाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सब कुछ नियंत्रण में है, जबकि असलियत इसके ठीक उलट है।
'बगावत और भगदड़ के खौफ में आई लिस्ट': वड़िंग ने खोली AAP की रणनीति
राजा वड़िंग ने आम आदमी पार्टी के पिछले चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए टिकट वितरण के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी का यह पुराना रिकॉर्ड रहा है कि वह चुनाव से काफी पहले पहली और दूसरी सूची जारी कर माहौल बनाने का ढोंग करती है, लेकिन जैसे ही अंदरूनी खींचतान बढ़ती है या समीकरण बिगड़ने लगते हैं, वे चुपचाप घोषित प्रत्याशियों के टिकट काट देते हैं या उनके हलके बदल देते हैं।
वड़िंग ने दावा किया कि इस 40 उम्मीदवारों की सूची को किसी भी सूरत में अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। आने वाले दिनों में जब स्थानीय कार्यकर्ताओं और टिकट से वंचित किए गए कद्दावर नेताओं का गुस्सा सड़कों पर फूटेगा, तो आम आदमी पार्टी को अपने ही फैसले वापस लेने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जो पार्टी खुद को सिद्धांतों और आंतरिक लोकतंत्र की मिसाल बताती थी, वह आज अपने ही चुने हुए प्रतिनिधियों पर भरोसा नहीं कर पा रही है और उन्हें बांधकर रखने के लिए जल्दबाजी में घोषणाओं का सहारा ले रही है।
पहली सूची में वित्त मंत्री हरपाल चीमा का नाम नदारद, वड़िंग ने उठाए तीखे सवाल
राजा वड़िंग ने सूची की राजनीतिक बारीकियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सरकार का कामकाज इतना ही बेदाग और मजबूत था, तो पहली ही किस्त में कैबिनेट के वरिष्ठ और कद्दावर चेहरों को क्यों छोड़ दिया गया? उन्होंने विशेष तौर पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के संस्थापक दौर से जुड़े और सरकार के सबसे अहम मंत्रालय को संभालने वाले वरिष्ठ नेता का नाम 40 उम्मीदवारों में शामिल न होना कई गहरे संदेह पैदा करता है।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने केवल उन्हीं सीटों पर नाम घोषित किए हैं जहां फिलहाल विरोध को कुछ हफ्तों के लिए दबाया जा सकता है, लेकिन जहां अंदरूनी टकराव चरम पर है और जहां मंत्रियों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी सबसे ज्यादा है, वहां नेतृत्व फैसला लेने की हिम्मत नहीं जुटा सका है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट स्तर के वरिष्ठ नेताओं की सीटों पर पसरा यह सस्पेंस साबित करता है कि सरकार के शीर्ष स्तर पर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
सीएम भगवंत मान के तंज पर पलटवार: 'जो पहले नाम बदलते रहे, वो हमें नसीहत न दें'
उल्लेखनीय है कि पहली सूची में मुख्यमंत्री भगवंत मान को संगरूर जिले के धूरी विधानसभा क्षेत्र से दोबारा मैदान में उतारा गया है। अपनी उम्मीदवारी के ऐलान के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मान ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा था कि कांग्रेस हमेशा बगावत के डर से आखिरी वक्त तक टिकट फंसाए रखती है, जबकि आम आदमी पार्टी जमीनी हकीकत और पारदर्शिता के दम पर समय रहते अपने लड़ाके मैदान में उतारती है।
मुख्यमंत्री के इस बयान पर पलटवार करते हुए राजा वड़िंग ने कहा कि भगवंत मान को दूसरों को नसीहत देने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है जहां हर कार्यकर्ता और दावेदार की बात सुनी जाती है और बाकायदा सर्वे तथा जमीनी कार्यकर्ताओं की रायशुमारी के बाद टिकट तय होते हैं। वड़िंग ने तंज कसा कि आम आदमी पार्टी में फैसले दिल्ली के रिमोट कंट्रोल से लिए जाते हैं और वहां स्थानीय नेताओं की आवाज को दबाने के लिए इस तरह की हड़बड़ाहट दिखाई जाती है।
चरणजीत सिंह चन्नी का सीधा वार: 'मान को हराने के लिए कोई बड़ा चेहरा नहीं, आम कार्यकर्ता काफी'
दिल्ली की इस बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने भी भगवंत मान सरकार के खिलाफ चौतरफा हमला बोला। चन्नी ने कहा कि राज्य में पिछले साढ़े चार साल के दौरान विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं। उन्होंने सरकार पर अवैध खनन, शराब नीति और वित्तीय कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए। चन्नी ने कहा कि जिस बदलाव के नाम पर जनता ने इन्हें सत्ता सौंपी थी, उसने पंजाब को कर्ज, नशे और बदहाल कानून-व्यवस्था के दलदल में धकेल दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के धूरी से चुनाव लड़ने पर चन्नी ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कांग्रेस को किसी बहुत बड़े चेहरे या वीआईपी उम्मीदवार को उतारने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस का एक साधारण, समर्पित और निष्ठावान बूथ स्तर का कार्यकर्ता ही भगवंत मान को उनकी अपनी विधानसभा सीट पर हराने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि धूरी की जनता मुख्यमंत्री के खोखले दावों को देख चुकी है और इस बार वह झूठे वादों के झांसे में नहीं आने वाली।
राहुल गांधी और खरगे का 2027 चुनावी ब्लूप्रिंट: 4 नवंबर को संगरूर में शक्ति प्रदर्शन
राजा वड़िंग और चन्नी की यह तीखी प्रतिक्रिया नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ हुई दो घंटे की उच्चस्तरीय बैठक के तुरंत बाद सामने आई है। इस रणनीतिक बैठक में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।
बैठक में तय किया गया कि कांग्रेस पूरी आक्रामकता के साथ चुनावी समर में उतरेगी। पार्टी आगामी 4 नवंबर को संगरूर में एक विशाल रैली का आयोजन करने जा रही है, जिसमें करीब एक लाख कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस रैली का समन्वय पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला को सौंपा गया है। इसके साथ ही पंजाब कांग्रेस अगले 15 दिनों के भीतर अपना चुनावी घोषणा पत्र (मैनिफेस्टो) तैयार करने का काम पूरा कर लेगी, जिसमें किसानों, युवाओं के रोजगार, नशा उन्मूलन और राज्य के उद्योगों को बचाने के लिए ठोस रोडमैप पेश किया जाएगा।
मालवा से दोआबा तक सियासी हलचल: टिकटों के ऐलान के बाद बगावत की बिसात
आम आदमी पार्टी की ओर से 40 उम्मीदवारों की घोषणा के बाद मालवा, माझा और दोआबा के कई हलकों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। जिन विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट दिया गया है, वहां पार्टी के भीतर ही टिकट की उम्मीद लगाए बैठे दावेदार अब खुलकर नाराजगी जताने लगे हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दल कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा भी असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों का ऐलान करना एक बड़ा जोखिम भी बन सकता है। इससे जहां घोषित प्रत्याशियों को प्रचार का लंबा समय मिलता है, वहीं टिकट से वंचित नेताओं को बगावत की जमीन तैयार करने और दूसरे विकल्पों की ओर जाने का भी पर्याप्त वक्त मिल जाता है। राजा वड़िंग के इस ताजा हमले ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस आने वाले दिनों में सत्ताधारी दल के इसी आंतरिक असंतोष को सबसे बड़ा हथियार बनाकर चुनावी मैदान में घेराबंदी करने जा रही है।