'नशे पर राजनीति नहीं, उनका दर्द समझने की जरूरत...', यात्रा से पहले पीड़ित परिवारों से मिले सुनील जाखड़; मान सरकार पर बोला तीखा हमला

'नशे पर राजनीति नहीं, उनका दर्द समझने की जरूरत...', यात्रा से पहले पीड़ित परिवारों से मिले सुनील जाखड़; मान सरकार पर बोला तीखा हमला

पंजाब की जवानी को दीमक की तरह चाट रहे नशे के गंभीर संकट के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यव्यापी जन-आंदोलन छेड़ दिया है। भाजपा की बहुचर्चित 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के औपचारिक आगाज से ठीक पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन परिवारों से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया, जिन्होंने नशे के अंधकार में अपने जवान बेटों, भाइयों और घर के कमाऊ सदस्यों को खो दिया है। इस भावुक और संवेदनशील मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा के दिग्गज नेता सुनील जाखड़ ने दो टूक शब्दों में कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था या आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि यह उन उजड़े हुए आशियानों का असहनीय दर्द है जिसे समझने की जरूरत है। जाखड़ ने राजनीतिक दलों से इस राष्ट्रीय त्रासदी पर सस्ती बयानबाजी और राजनीति बंद करने की अपील करते हुए भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

पीड़ित परिवारों के आंसू देख भावुक हुए नेता, सुनीं दिल दहला देने वाली दास्तानें

यात्रा शुरू होने से पहले आयोजित इस विशेष बैठक में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए दर्जनों पीड़ित परिवार शामिल हुए। किसी मां ने अपने 20 साल के इकलौते बेटे की नशे के ओवरडोज से हुई मौत का दर्द बयां किया, तो किसी बेबस पिता ने घर का सारा सामान बिकने के बाद भी औलाद को न बचा पाने की दास्तान सुनाई। परिवारों की व्यथा सुनकर हॉल में मौजूद तमाम नेता और कार्यकर्ता भावुक हो गए।

सुनील जाखड़ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने परिजनों के पास बैठकर उन्हें सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि यह यात्रा केवल राजनीतिक पदयात्रा नहीं, बल्कि नशे के सौदागरों के खिलाफ एक निर्णायक सामाजिक लड़ाई है। नेताओं ने कहा कि जब तक पंजाब के हर गांव और गली से नशे के नेटवर्क की जड़ें नहीं उखाड़ दी जातीं, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

'नशे पर सियासत बंद हो, पहले उस मां का दर्द समझें जिसने अपना बेटा खोया'

बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए सुनील जाखड़ ने बेहद संजीदा अंदाज में कहा, "नशे का मुद्दा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने या एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का विषय नहीं है। राजनीति करने से पहले उन परिवारों की आंखों में झांक कर देखिए जिनके घर के चिराग सदा के लिए बुझ चुके हैं।"

जाखड़ ने कहा कि नशा किसी एक पार्टी, धर्म या जाति का नुकसान नहीं कर रहा, बल्कि यह पंजाब के पूरे भविष्य और आने वाली पीढ़ियों को तबाह कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार और समाज पीड़ित परिवारों के आंसुओं को अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं मानेंगे, तब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। हमें नशा पीड़ितों को अपराधी की तरह देखने के बजाय उन्हें मानसिक और चिकित्सीय सहयोग देकर मुख्यधारा में लौटाना होगा, जबकि नशा बेचने वाले सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करना होगा।

छोटे प्यादों की गिरफ्तारी से नहीं मिटेगा नशा, बड़े माफिया पर हो सख्त प्रहार

पंजाब सरकार द्वारा नशा मुक्ति को लेकर किए जा रहे दावों पर तीखा हमला बोलते हुए सुनील जाखड़ ने कहा कि राज्य में केवल दिखावे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस सिर्फ सड़क पर चंद ग्राम नशीला पदार्थ लेकर घूमने वाले नशे के आदी युवकों या छोटे प्यादों को पकड़कर जेलों में डाल देती है और अपनी पीठ थपथपाने लगती है।

जाखड़ ने सवाल किया कि आखिर वे बड़े मगरमच्छ और अंतरराष्ट्रीय नशा तस्कर कब सलाखों के पीछे जाएंगे जो सीमा पार से और दूसरे रास्तों से पंजाब के भीतर करोड़ों-अरबों रुपये का ड्रग्स सप्लाई कर रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि बिना राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के इतना बड़ा ड्रग रैकेट फल-फूल ही नहीं सकता। जब तक बड़े माफियाओं की जड़ों पर हथौड़ा नहीं चलेगा, तब तक पंजाब की गलियां नशे से मुक्त नहीं हो सकतीं।

4000 किलोमीटर की नशा मुक्त यात्रा से जगाएंगे जन-जागरण

भाजपा नेताओं ने बताया कि इस अभियान के तहत पार्टी पूरे पंजाब में करीब 4,000 किलोमीटर की लंबी यात्रा निकालने जा रही है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव और कस्बों में जाकर युवाओं और आम जनता को जागरूक करना, नशा तस्करों के खिलाफ सामाजिक लामबंदी तैयार करना और पीड़ित परिवारों को नशामुक्ति व पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाना है।

नेताओं ने स्पष्ट किया कि भाजपा कार्यकर्ता हर जिले में जाकर प्रशासन को नशा बिक्री के हॉटस्पॉट्स की सूची सौंपेंगे और अगर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो जनता के साथ मिलकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। पंजाब को फिर से 'रंगला पंजाब' बनाने के लिए इस अभिशाप का खात्मा पहली और आखिरी शर्त है।

पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली पर उठाए सवाल

सुनील जाखड़ ने सरकारी नशामुक्ति केंद्रों (De-addiction and Rehabilitation Centers) की खस्ताहाली पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर और काउंसलर मौजूद हैं और न ही जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई केंद्रों में इलाज के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है, जिसकी वजह से युवा वहां से निकलने के बाद दोबारा नशे की गर्त में गिर जाते हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार स्वास्थ्य के बजट का बड़ा हिस्सा नशामुक्ति और युवाओं के स्किल डेवलपमेंट पर खर्च करे ताकि भटके हुए युवाओं को रोजगार देकर सम्मानजनक जीवन दिया जा सके।

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