एशियाई पैरा खेलों में भारत का ऐतिहासिक डंका: आधे दल के साथ जीते रिकॉर्ड 114 पदक

एशियाई पैरा खेलों में भारत का ऐतिहासिक डंका: आधे दल के साथ जीते रिकॉर्ड 114 पदक

अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय पैरा एथलीटों ने अपने अदम्य साहस, असाधारण जीवटता और बेजोड़ खेल कौशल के दम पर एक नया स्वर्णिम इतिहास लिख दिया है। हाल ही में संपन्न हुए एशियाई पैरा खेलों में भारतीय दल ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ और ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में शीर्ष चार देशों में जगह बनाई। कुल 114 पदकों के ऐतिहासिक आंकड़े के साथ भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इस ऐतिहासिक पदक तालिका में भारतीय खिलाड़ियों ने 30 स्वर्ण (Gold), 35 रजत (Silver) और 49 कांस्य (Bronze) पदक अपने नाम किए। तिरंगे की इस अभूतपूर्व शान ने पूरे देश को गर्व से सराबोर कर दिया है और हर कोने से इन दिव्यांग चैंपियनों के जज्बे को सलाम किया जा रहा है।

भारतीय दल का यह प्रदर्शन कई मायनों में अद्वितीय और ऐतिहासिक माना जा रहा है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एशियाई पैरा खेलों में भारत का चौथा स्थान हासिल करना देश में आधुनिक खेल अवसंरचना, उचित प्रशिक्षण और पैरा खिलाड़ियों को मिल रहे नीतिगत प्रोत्साहन का प्रत्यक्ष परिणाम है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे पारंपरिक खेल महाशक्तियों के कड़े मुकाबले के बीच भारतीय खिलाड़ियों ने जिस निरंतरता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, उसने यह साबित कर दिया है कि भारतीय खेल जगत में अब पैरा एथलीट किसी भी बड़े मंच पर शीर्ष स्थान हासिल करने की पूर्ण क्षमता रखते हैं।

पीटी उषा ने खिलाड़ियों के जज्बे को किया सलाम: 'लाखों युवाओं को प्रेरित करेगा यह प्रदर्शन'

भारतीय पैरा एथलीटों की इस ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि पर भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष और 'उड़नपरी' के नाम से विख्यात महान एथलीट पीटी उषा ने रविवार को खुलकर बधाई दी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन की मुक्तकंठ से सराहना की। पीटी उषा ने आधिकारिक बयान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए संदेश में कहा कि भारतीय दल द्वारा जीता गया प्रत्येक पदक केवल धातु का एक टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत घंटों की कठोर तपस्या, पसीने और कभी न हार मानने वाले अटूट जज्बे का जीवंत प्रमाण है।

आईओए अध्यक्ष ने भावुक शब्दों में लिखा कि हमारे इन असाधारण चैंपियनों, उनके समर्पित प्रशिक्षकों (कोच) और पूरे सहयोगी स्टाफ की मेहनत रंग लाई है। आप सभी देश का असली गौरव हैं। इसी तरह चमकते रहें और वैश्विक मंच पर भारत के लिए नई ऊंचाइयों को छूते रहें। पीटी उषा ने विशेष तौर पर इस बात को रेखांकित किया कि जीवन की तमाम शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बाधाओं को पार कर इन एथलीटों ने जो गौरव हासिल किया है, वह देश के करोड़ों सामान्य और दिव्यांग युवाओं को जीवन के किसी भी क्षेत्र में बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का असीम साहस प्रदान करेगा।

आधे खिलाड़ियों के दल के साथ तोड़ा हांगझोउ का रिकॉर्ड, जापान में गूंजा राष्ट्रगान

इस बार के एशियाई पैरा खेलों के परिणाम इसलिए भी ज्यादा चौंकाने वाले और प्रभावशाली हैं क्योंकि भारत ने जापान में आयोजित इन खेलों के लिए महज 168 खिलाड़ियों का एक अत्यंत संतुलित और सीमित दल मैदान में उतारा था। यदि इसकी तुलना पिछले यानी वर्ष 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित पैरा एशियाई खेलों से की जाए, तो उस समय भारत ने लगभग दोगुना बड़ा दल भेजा था। हांगझोउ में भारत ने 108 पदक जीते थे, जिसमें 27 स्वर्ण पदक शामिल थे।

लेकिन इस बार जापान की धरती पर लगभग आधी संख्या में पहुंचे भारतीय जांबाजों ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। सीमित दल होने के बावजूद न केवल कुल पदकों की संख्या 108 से बढ़कर 114 पर पहुंच गई, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि स्वर्ण पदकों की संख्या भी 27 से उछलकर 30 के पार पहुंच गई। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि भारतीय दल की 'स्ट्राइक रेट' और पोडियम फिनिश करने की क्षमता में गुणवत्ता के स्तर पर भारी इजाफा हुआ है।

पैरा एथलेटिक्स बना भारत का सबसे मजबूत स्तंभ, अकेले ट्रैक एंड फील्ड से आए 65 मेडल

भारत के इस ऐतिहासिक पदक अभियान में सबसे बड़ा और प्रभावी योगदान पैरा एथलेटिक्स (ट्रैक एंड फील्ड) स्पर्धाओं का रहा। कुल 114 पदकों में से आधे से अधिक पदक अकेले एथलेटिक्स के विभिन्न आयोजनों से आए। भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों ने भाला फेंक (जैवलीन थ्रो), गोला फेंक (शॉट पुट), चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो), ऊंची कूद और लंबी दूरी की दौड़ जैसी कठिन स्पर्धाओं में विदेशी प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ते हुए कुल 65 पदक अपनी झोली में डाले।

यह संख्या वर्ष 2023 के हांगझोउ खेलों के मुकाबले 12 पदक अधिक है। एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों के इस एकतरफा दबदबे ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब तकनीक, स्ट्रेंथ और रणनीति के मामले में दुनिया के किसी भी विकसित देश से पीछे नहीं है। खिलाड़ियों के इस धमाकेदार प्रदर्शन के दम पर देश भर में जश्न का माहौल है और केंद्र सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारों ने भी इन पदक विजेता खिलाड़ियों के लिए नकद पुरस्कारों और सम्मान समारोहों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यह ऐतिहासिक प्रदर्शन आगामी पैरालंपिक खेलों के लिए भी भारतीय दल की तैयारियों को एक ठोस और मजबूत आधारशिला प्रदान करता है।