ऋषभ पंत के साथ वनडे में नाइंसाफी? 3 साल में सिर्फ एक मौका मिलने पर भड़के आकाश चोपड़ा
भारतीय क्रिकेट टीम के आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को लेकर क्रिकेट गलियारों में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। लाल गेंद की क्रिकेट में अपनी मैच विनर छवि साबित कर चुके पंत को सीमित ओवरों के क्रिकेट, खासकर 50 ओवर के प्रारूप (वनडे) में लगातार नजरअंदाज किए जाने पर पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज और जाने-माने क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। चोपड़ा का मानना है कि पिछले तीन वर्षों में पंत को जिस तरह से बेंच पर बैठाया गया है और उन्हें लगातार मौके नहीं दिए गए हैं, वह किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास को चोट पहुंचाने जैसा है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि जब एक खिलाड़ी अपने दम पर बड़े मैच जिताने का माद्दा रखता है, तो उसे प्रारूप के आधार पर इस तरह दरकिनार करना समझ से परे है।
तीन साल में सिर्फ एक मौका: आकाश चोपड़ा ने उठाए चयन नीति पर सवाल
आकाश चोपड़ा ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर टीम इंडिया के हालिया संयोजन और मध्यक्रम की रणनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि दिसंबर 2022 में भीषण सड़क दुर्घटना से उबरकर मैदान पर शानदार वापसी करने के बावजूद पंत को 50 ओवर के प्रारूप में वो जगह नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। चोपड़ा ने कहा कि अगर किसी खिलाड़ी को 36 महीनों की लंबी अवधि में केवल एक या दो वनडे मुकाबलों में ही अंतिम एकादश का हिस्सा बनाया जाएगा, तो वह अपनी निरंतरता और फॉर्म को कैसे साबित कर पाएगा। टेस्ट क्रिकेट में पंत की असाधारण पारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इंग्लैंड में शतक जड़कर वनडे सीरीज जिताने वाले खिलाड़ी को इस कदर भुला देना भारतीय क्रिकेट की चयन प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
केएल राहुल बनाम ऋषभ पंत: मध्यक्रम में विकेटकीपर की खींचतान
भारतीय वनडे टीम में पिछले कुछ समय से केएल राहुल पहली पसंद विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में खेल रहे हैं। नंबर पांच पर राहुल के लगातार स्थिर और परिपक्व प्रदर्शन ने निसंदेह उन्हें इस स्थान का पक्का दावेदार बनाया है। आकाश चोपड़ा ने राहुल की उपयोगिता और शानदार बल्लेबाजी की सराहना की, लेकिन उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बैकअप या रोटेशन के नाम पर पंत को पूरी तरह से उपेक्षित रखना टीम के भविष्य के लिए घातक हो सकता है। 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर टीम इंडिया को एक मजबूत और आक्रामक मध्यक्रम की दरकार है। आकाश के अनुसार, अगर पंत को केवल रिजर्व खिलाड़ी के रूप में ही ड्रेसिंग रूम में रखा जाएगा और मैच प्रैक्टिस नहीं दी जाएगी, तो किसी बड़े टूर्नामेंट में अचानक जरूरत पड़ने पर वे बिना लय के उतरने को मजबूर होंगे, जो टीम के हित में नहीं है।
आंकड़ों की गवाही: इंग्लैंड दौरे की वह यादगार शतकीय पारी
क्रिकेट विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ऋषभ पंत का वनडे करियर अभी तक उनकी टेस्ट उपलब्धियों की बराबरी नहीं कर पाया है, लेकिन इसका एक बड़ा कारण उन्हें एक तय बैटिंग ऑर्डर पर लंबे समय तक मौका न मिलना भी रहा है। 2022 के इंग्लैंड दौरे पर मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड में खेली गई उनकी 125 रनों की नाबाद पारी को याद करते हुए चोपड़ा ने कहा कि जब शीर्ष क्रम ढह गया था, तब पंत ने अकेले दम पर मैच का पासा पलट कर भारत को ऐतिहासिक सीरीज दिलाई थी। उस पारी ने साबित कर दिया था कि वे वनडे क्रिकेट में भी मैच फिनिश करने की पूरी क्षमता रखते हैं। इसके बावजूद चोट से वापसी के बाद उन्हें मुख्य रूप से टेस्ट और टी20 तक ही सीमित रखा गया, जबकि वनडे फॉर्मेट में उन्हें अपनी पारी संवारने के लिए पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए थे।
क्या 2027 विश्व कप की योजना में फिट बैठेंगे ऋषभ पंत?
आगामी समय में भारतीय टीम को कई द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेलनी हैं और टीम मैनेजमेंट के सामने मध्यक्रम को लचीला और आक्रामक बनाने की बड़ी चुनौती है। बाएं हाथ का बल्लेबाज होने के नाते पंत विपक्षी स्पिनरों और फील्डिंग रणनीतियों को पूरी तरह तहस-नहस करने का हुनर रखते हैं। आकाश चोपड़ा का तर्क है कि आधुनिक वनडे क्रिकेट में स्ट्राइक रेट और बाउंड्री हिटिंग क्षमता किसी भी टीम की जीत में सबसे बड़ा अंतर पैदा करती है। ऐसे में यदि ऋषभ पंत को आगामी घरेलू और विदेशी दौरों पर लगातार खेलने का अवसर नहीं दिया जाता, तो यह न केवल खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी होगी बल्कि भारतीय टीम भी एक बेहद मूल्यवान एक्स-फैक्टर को गंवा देगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य कोच और चयनकर्ता आकाश चोपड़ा की इस तीखी आलोचना के बाद अपनी रणनीतियों में क्या बदलाव लाते हैं।