क्या खत्म हो रहा है टी-20 का सफर? जानिए तीसरे मैच के बाद भुवी का फ्यूचर प्लान

क्या खत्म हो रहा है टी-20 का सफर? जानिए तीसरे मैच के बाद भुवी का फ्यूचर प्लान

भारतीय क्रिकेट टीम के स्विंग मास्टर कहे जाने वाले अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के लिए अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में वापसी की यह सीरीज अब तक किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुई है। लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरे भुवी से उम्मीद थी कि वे अपनी सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग से कीवी बल्लेबाजों को परेशान करेंगे, लेकिन शुरुआती तीन टी-20 मुकाबलों में वे पूरी तरह बेअसर नजर आए। न तो नई गेंद से उन्हें शुरुआती सफलताएं मिल रही हैं और न ही वे डेथ ओवरों में बल्लेबाजों पर अंकुश लगा पा रहे हैं। इस लचर प्रदर्शन के बाद अब खेल प्रेमियों और चयनकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस सीरीज के साथ ही भुवनेश्वर के अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लग जाएगा।

तीसरे टी-20 मुकाबले तक भुवनेश्वर कुमार ने कुल 12 ओवर गेंदबाजी की, जिसमें उन्होंने 139 रन लुटाए और उनके खाते में केवल एक ही विकेट आया। टी-20 जैसे तेज-तर्रार प्रारूप में 11 से अधिक की इकोनॉमी रेट से रन देना किसी भी मुख्य तेज गेंदबाज के लिए चिंता का बड़ा सबब है। न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने भुवी की गेंदों पर पावरप्ले से लेकर अंतिम ओवरों तक खुलकर प्रहार किए हैं। जहां एक तरफ युवा गेंदबाज कम रन खर्च कर विकेट निकाल रहे हैं, वहीं भुवी का यह अनुभवहीन जैसा दिखना टीम प्रबंधन के सामने भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

तीसरे टी-20 के बाद भुवी ने तोड़ी चुप्पी: क्या है आगे का प्लान?

इस निराशाजनक प्रदर्शन और टीम से बाहर होने की बढ़ती आशंकाओं के बीच भुवनेश्वर कुमार ने अपने आगे के करियर और आगामी योजनाओं को लेकर खुलकर बात की है। तीसरे टी-20 के बाद जब उनसे भविष्य के रोडमैप और टी-20 टीम में जगह को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे फिलहाल बहुत आगे की बातें सोचकर खुद पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहते। भुवी ने स्पष्ट किया कि उतार-चढ़ाव क्रिकेट के खेल का एक अभिन्न हिस्सा हैं और वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चकाचौंध या आलोचनाओं से ध्यान हटाकर अपनी बुनियादी गेंदबाजी पर काम करेंगे।

भुवनेश्वर कुमार ने अपने अगले कदम का खुलासा करते हुए साफ किया कि वे भारतीय घरेलू 50-ओवर टूर्नामेंट विजय हजारे ट्रॉफी में पूरी तरह से हिस्सा लेंगे। भुवी ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य लगातार लंबे स्पेल फेंकना, अपनी फिटनेस को नए सिरे से परखना और अपनी पुरानी लय को वापस हासिल करना है। घरेलू क्रिकेट खेलकर वे खुद को मैच-फिट रखना चाहते हैं ताकि चयनकर्ताओं के पास उनका मजबूत विकल्प हमेशा उपलब्ध रहे।

क्या अब वनडे टीम में वापसी की राह तलाश रहे हैं भुवनेश्वर?

टी-20 प्रारूप में बढ़ती गति और आक्रामकता के बीच यह संकेत मिलने लगे हैं कि भुवनेश्वर कुमार का ध्यान अब धीरे-धीरे 50-ओवर यानी वनडे क्रिकेट की तरफ मुड़ सकता है। भारतीय तेज गेंदबाजों की लगातार चोटों और वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते आगामी बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए अनुभव की हमेशा जरूरत पड़ती है। भुवी ने भी यह माना है कि वनडे में उनके पास अपनी स्विंग और कलाकारी दिखाने के लिए ज्यादा ओवर और समय मिलता है, जहां शुरुआती 10 ओवरों का खेल टेस्ट जैसा ही संवेदनशील होता है।

विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने का फैसला इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अगर भुवनेश्वर घरेलू वनडे मैचों में गेंद से कसी हुई शुरुआत दिलाते हैं और बड़े स्पेल बिना किसी फिटनेस परेशानी के पूरे करते हैं, तो चयनकर्ता एक बार फिर अनुभवी बैकअप सीमर के तौर पर उनके नाम पर विचार कर सकते हैं। खुद भुवी का मानना है कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट के बड़े प्रारूप में वे अभी भी भारतीय टीम के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

आईपीएल की सफलता और इंटरनेशनल क्रिकेट का अंतर

इस सीरीज में भुवी के संघर्ष ने हर किसी को इसलिए हैरान किया है क्योंकि आईपीएल में उनका हालिया फॉर्म बेहद शानदार रहा था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलते हुए उन्होंने पिछले दो सीजनों में कुल 45 विकेट चटकाए थे और टीम की खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का स्तर, विदेशी मैदानों की परिस्थितियां और विपक्षी बल्लेबाजों की आक्रामकता आईपीएल से बिल्कुल जुदा साबित हुई।

भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल ने भी तीसरे मुकाबले से पहले इस बात को स्वीकार किया था कि चार साल बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी करना आसान नहीं होता। उन्होंने भुवी को सलाह दी थी कि वे किसी को कुछ साबित करने की होड़ में न पड़ें, बल्कि अपनी स्वाभाविक ताकत यानी गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने पर ही ध्यान दें। बहरहाल, तीसरे मैच के बाद अब बाकी बचे मुकाबलों में भुवी को अंतिम एकादश में जगह मिलेगी या नहीं, यह टीम के थिंक-टैंक पर निर्भर करेगा।

आगे की राह: क्या घरेलू प्रदर्शन से फिर संवरेगा करियर?

भुवनेश्वर कुमार अब अपने करियर के उस मोड़ पर हैं जहां हर एक मुकाबला उनके भविष्य का फैसला तय करता है। भारतीय तेज गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह, मयंक यादव और प्रिंस यादव जैसे कई युवा और तेज गेंदबाज कतार में खड़े हैं, जो लगातार 140+ किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं। ऐसे माहौल में केवल अनुभव के सहारे टीम में बने रहना संभव नहीं है।

भुवी के लिए अब एकमात्र रास्ता घरेलू क्रिकेट के मैदानों से होकर गुजरता है। विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी राज्य टीम के लिए उतरकर उन्हें न सिर्फ विकेटों का अंबार लगाना होगा, बल्कि अपनी पुरानी स्विंग और नियंत्रण का मुजाहिरा भी पेश करना होगा। अगर वे घरेलू सर्किट में चमकने में सफल रहते हैं, तो भारतीय टीम के दरवाजे उनके लिए पूरी तरह बंद नहीं होंगे, अन्यथा यह न्यूजीलैंड सीरीज उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी अध्याय साबित हो सकती है।