'लोग ये बोलना बंद कर दें कि वो सिर्फ अंधाधुंध बल्ला चलाता है': अभिषेक शर्मा के मुरीद हुए मोहम्मद कैफ
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और अपनी सटीक राय के लिए पहचाने जाने वाले मोहम्मद कैफ ने युवा विस्फोटक ओपनर अभिषेक शर्मा का खुलकर समर्थन किया है। अंतरराष्ट्रीय मंच और आईपीएल में अपनी निडर बल्लेबाजी से गेंदबाजों में खौफ भरने वाले अभिषेक शर्मा को लेकर अक्सर क्रिकेट गलियारों में यह तर्क दिया जाता है कि वे अंधाधुंध बल्ला घुमाते हैं और उनके पास पारी को संवारने का धैर्य नहीं है। कुछ आलोचक तो उनकी इस शैली को लापरवाह तक करार दे देते हैं। इसी आलोचनात्मक सोच पर कड़ा प्रहार करते हुए मोहम्मद कैफ ने दो टूक शब्दों में कहा है कि लोग अब यह फिजूल की बातें बोलना पूरी तरह बंद कर दें कि अभिषेक शर्मा केवल आंख मूंदकर शॉट खेलते हैं।
कैफ ने स्पष्ट किया कि पहली ही गेंद से विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। टी-20 क्रिकेट का प्रारूप अब पूरी तरह से बदल चुका है और यहां संभलकर खेलने से ज्यादा महत्व पहली गेंद से विरोधी टीम के हौसले पस्त करने का है। अभिषेक के पास शॉट मेकिंग की जो रेंज, टाइमिंग और निडरता है, वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बहुत कम खिलाड़ियों में देखने को मिलती है। जब कोई खिलाड़ी पहली गेंद से बाउंड्री खोजने का जोखिम उठाता है, तो स्वाभाविक है कि वह कभी-कभार जल्दी भी आउट होगा, लेकिन इसे उसकी कमजोरी नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए।
'लोग ये बोलना बंद कर दें कि...': कैफ ने किस बात पर जताई कड़ी आपत्ति?
मोहम्मद कैफ ने क्रिकेट विश्लेषकों और सोशल मीडिया पर राय बनाने वाले आलोचकों को सीधे निशाने पर लिया। कैफ ने कहा कि जब अभिषेक शर्मा 15 से 20 गेंदों में 45 या 50 रन बनाकर आउट हो जाते हैं, तो लोग तुरंत उनकी तकनीक और टेंपरामेंट पर सवाल उठाने लगते हैं। आलोचक कहने लगते हैं कि वे सिर्फ तुक्के से शॉट मारते हैं, उनमें लंबी पारी खेलने की समझ नहीं है या वे गैर-जिम्मेदाराना क्रिकेट खेलते हैं। कैफ ने इस सोच को पूरी तरह संकीर्ण और दकियानूसी करार दिया।
कैफ का तर्क है कि भारत को पिछले कई आईसीसी टी-20 टूर्नामेंट्स में इसी रक्षात्मक रवैये की वजह से असफलता का मुंह देखना पड़ा था, जहां हमारे शीर्ष क्रम के बल्लेबाज शुरुआती ओवरों में सिर्फ आंखें जमाने की कोशिश करते थे। अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी उस पुरानी और थकी हुई सोच को तोड़ रहे हैं। वे पावरप्ले के छह ओवरों का ऐसा निर्मम इस्तेमाल करते हैं कि मैच का रुख वहीं तय हो जाता है। कैफ ने जोर देकर कहा कि अगर कोई खिलाड़ी 200 से अधिक के स्ट्राइक रेट से खेल रहा है, तो टीम प्रबंधन को उसे बैक करना चाहिए, न कि उस पर एंकर रोल निभाने का दबाव बनाना चाहिए।
युवराज सिंह के शागिर्द की तकनीक: केवल ताकत नहीं, क्लास भी है मौजूद
अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी उनका बैकलिफ्ट और डाउनस्वींग है, जिसमें उनके मेंटॉर और भारत के महान ऑलराउंडर युवराज सिंह की साफ झलक दिखाई देती है। मोहम्मद कैफ ने इस तकनीकी पहलू पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि जो लोग अभिषेक को सिर्फ एक स्लागर या अंधाधुंध हिटर समझते हैं, उन्हें क्रिकेट की बुनियादी समझ ही नहीं है। अभिषेक के बैकफुट पंच, शॉर्ट-आर्म जैब और कवर के ऊपर से इनसाइड-आउट लॉफ्टेड शॉट किसी भी क्लासिक बल्लेबाज की श्रेणी में आते हैं।
कैफ ने याद दिलाया कि युवराज सिंह ने अभिषेक के खेल पर सालों तक काम किया है। युवराज की निगरानी में अभिषेक ने न केवल अपनी आक्रामकता को निखारा है, बल्कि तेज गति वाली शॉर्ट गेंदों को पुल करने और स्पिनरों के खिलाफ क्रीज का इस्तेमाल करने की कला भी सीखी है। जब गेंद 145 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आती है, तो सिर्फ अंधाधुंध बल्ला चलाने से गेंद सीमा रेखा के बाहर 90 मीटर दूर नहीं गिरती, उसके लिए गजब की टाइमिंग, कलाई का जोर और मानसिक स्पष्टता चाहिए होती है। अभिषेक के पास यह सारी खूबियां मौजूद हैं।
आधुनिक टी-20 क्रिकेट और इंटेंट का असली पैमाना: क्यों जरूरी हैं ऐसे खिलाड़ी?
कैफ ने भारतीय क्रिकेट के बदलते मिजाज का विश्लेषण करते हुए बताया कि मुख्य कोच गौतम गंभीर और मौजूदा टीम लीडरशिप भी इसी तरह के आक्रामक और बेखौफ क्रिकेट की वकालत कर रही है। अब टी-20 क्रिकेट में 50 गेंदों में 60 रन बनाने वाले बल्लेबाजों का दौर खत्म हो चुका है। अब जमाना 25 गेंदों में 60 रन ठोकने वालों का है। अभिषेक शर्मा इस नए भारतीय क्रिकेटिंग डीएनए के सबसे सटीक प्रतिनिधि हैं।
जब अभिषेक क्रीज पर उतरते हैं, तो विरोधी टीम का कप्तान कभी भी अपने पसंदीदा फील्ड प्लेसमेंट को सेट नहीं कर पाता। गेंदबाज पहली ही गेंद से इस दबाव में रहता है कि अगर उसने लाइन या लेंथ में मामूली सी भी चूक की, तो गेंद स्टैंड्स में मिलेगी। यह जो मानसिक दबाव एक आक्रामक बल्लेबाज बनाता है, उसका फायदा नॉन-स्ट्राइकर छोर पर खड़े बल्लेबाज और आने वाले मिडिल ऑर्डर को पूरे मैच में मिलता है। कैफ का मानना है कि ऐसे खिलाड़ी मैच के नतीजे अकेले अपने दम पर तय करते हैं।
आगे की राह: क्या आलोचकों के बयानों को पीछे छोड़ टी-20 के स्थायी सितारे बनेंगे अभिषेक?
मोहम्मद कैफ ने भारतीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं को भी यह नसीहत दी कि अभिषेक शर्मा जैसे दुर्लभ प्रतिभा वाले खिलाड़ी को लगातार 15 से 20 मैचों का अटूट समर्थन मिलना चाहिए। अगर वे दो या तीन पारियों में शून्य या कम स्कोर पर आउट भी हो जाएं, तो भी उनके खेलने के अंदाज पर पाबंदी नहीं लगानी चाहिए। किसी भी आक्रामक खिलाड़ी को अगर आउट होने का डर दिखा दिया जाए, तो वह अपनी स्वाभाविक आक्रामकता खो बैठता है और एक औसत खिलाड़ी बनकर रह जाता है।
भारतीय क्रिकेट को इस समय अभिषेक शर्मा जैसे मैच-विनर की सख्त जरूरत है जो बिना किसी झिझक के सामने वाली टीम पर टूट पड़े। कैफ के इस बेबाक बयान ने न केवल अभिषेक के आत्मविश्वास को एक बड़ा संबल दिया है, बल्कि उन तमाम आलोचकों के मुंह पर भी ताला लगा दिया है जो टी-20 क्रिकेट को अब भी 90 के दशक के चश्मे से देखने की भूल कर रहे हैं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में अभिषेक का यह बल्ला जब और गरजेगा, तो आलोचकों के पास खामोश रहने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा।