'यशस्वी जायसवाल के साथ कोई नाइंसाफी नहीं': बैटिंग कोच ने तोड़ी चुप्पी, प्लेइंग 11 से बाहर रहने पर दिया दो-टूक बयान
भारतीय क्रिकेट टीम के आक्रामक और युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को लेकर क्रिकेट प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच छिड़ी चर्चा पर अब टीम प्रबंधन की ओर से स्पष्ट रुख सामने आ गया है। टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीतने वाले यशस्वी को जब भी किसी महत्वपूर्ण मुकाबले की अंतिम एकादश (Playing XI) से बाहर रखा जाता है, तो सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्टूडियो तक 'नाइंसाफी' की बहस तेज हो जाती है। अब इस पूरे मामले पर भारतीय टीम के बैटिंग कोच ने खुलकर अपनी बात रखी है और साफ कर दिया है कि यशस्वी के साथ किसी भी स्तर पर कोई गलत व्यवहार या नाइंसाफी नहीं हो रही है। कोच के मुताबिक, टीम संयोजन और मौजूदा रणनीतियों के चलते कभी-कभी बेहतरीन खिलाड़ियों को भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
'प्रतिभा पर कोई संदेह नहीं, लेकिन टीम संतुलन सर्वोपरि': बैटिंग कोच का दो-टूक जवाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया संवाद के दौरान बैटिंग कोच ने यशस्वी जायसवाल की बेमिसाल काबिलियत की जमकर तारीफ की, लेकिन साथ ही कड़े चयन नियमों का भी हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्लेइंग 11 का चयन केवल व्यक्तिगत प्रतिभा के आधार पर नहीं बल्कि विरोधी टीम, पिच की स्थिति और टीम के संपूर्ण संतुलन को देखकर किया जाता है। कोच ने कहा कि यशस्वी भारतीय क्रिकेट का वर्तमान और भविष्य दोनों हैं, लेकिन जब शीर्ष क्रम में पहले से ही स्थापित और शानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज मौजूद हों, तो एक तय रणनीति के तहत ही फैसला लेना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि टीम प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी खिलाड़ी को बाहर बैठाने से पहले उसके पीछे के ठोस क्रिकेटिंग कारणों को साफ तौर पर साझा किया जाता है।
ड्रेसिंग रूम की बातचीत: यशस्वी को अपने मौके का इंतजार करने की सलाह
बैटिंग कोच ने खुलासा किया कि टीम मैनेजमेंट लगातार युवा खिलाड़ियों से संवाद बनाए रखता है ताकि उनके आत्मविश्वास में कोई कमी न आए। यशस्वी जायसवाल को भी यह स्पष्ट समझा दिया गया है कि बेंच पर बैठने का मतलब यह कतई नहीं है कि उनकी अहमियत कम हो गई है। कोच के अनुसार, भारतीय क्रिकेट में बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत है कि हर स्थान के लिए दो से तीन विश्वस्तरीय दावेदार कतार में खड़े हैं। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत होना पड़ता है। यशस्वी को नेट्स में अपनी तकनीक को और अधिक धार देने, परिस्थितियों के अनुसार खेल की गति बदलने और जब भी मौका मिले, उसे दोनों हाथों से लपकने के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
आंकड़ों की गवाही: तीनों प्रारूपों में यशस्वी का अब तक का असाधारण सफर
यशस्वी जायसवाल ने बेहद कम समय में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में रनों का अंबार लगाने के बाद जब उन्हें टेस्ट क्रिकेट की कैप सौंपी गई, तो उन्होंने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ रिकॉर्डतोड़ पारियां खेलकर खुद को साबित किया। बैक-टू-बैक दोहरे शतक और स्पिनरों के खिलाफ उनके आक्रामक फुटवर्क ने उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक युवा ओपनर्स की फेहरिस्त में ला खड़ा किया है। सीमित ओवरों के क्रिकेट में भी उनकी स्ट्राइक रेट और पहली गेंद से बाउंड्री ढूंढने की क्षमता असाधारण रही है। यही कारण है कि जब भी उन्हें टीम से बाहर रखा जाता है, तो प्रशंसकों का नाराज होना स्वाभाविक लगता है, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबा करियर बनाने के लिए ऐसे दौर से हर महान खिलाड़ी को गुजरना पड़ता है।
आधुनिक क्रिकेट और रोटेशन पॉलिसी: धैर्य ही बनेगा सफलता की कुंजी
आज के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में कार्यभार प्रबंधन (Workload Management) और रोटेशन पॉलिसी किसी भी टीम की प्राथमिक जरूरत बन चुकी है। बैटिंग कोच ने यह भी रेखांकित किया कि आगामी बड़े टूर्नामेंट्स और विदेशी दौरों को देखते हुए यशस्वी को भरपूर मौके मिलेंगे। क्रिकेट जानकारों का भी यही मानना है कि रोहित शर्मा, विराट कोहली जैसे दिग्गजों ने भी अपने शुरुआती वर्षों में बेंच पर लंबा वक्त बिताया था और उस धैर्य ने ही उन्हें मानसिक रूप से फौलादी बनाया। यशस्वी के पास असाधारण भूख और अनुशासन है, और बैटिंग कोच का यह बयान साफ करता है कि टीम प्रबंधन उन्हें लंबी रेस का घोड़ा मानता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी मुकाबलों में जब भी यशस्वी को बल्ला थामने का मौका मिलता है, तो वे कोच के इस भरोसे पर किस तरह खरे उतरते हैं।