'वैभव सूर्यवंशी से भी बेहतर हैं शुभमन गिल': पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता ने युवा सनसनी की तुलना पर तोड़ी चुप्पी

'वैभव सूर्यवंशी से भी बेहतर हैं शुभमन गिल': पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता ने युवा सनसनी की तुलना पर तोड़ी चुप्पी

भारतीय घरेलू क्रिकेट और आयु वर्ग प्रतियोगिताओं में ताबड़तोड़ पारियों से सुर्खियों में आए बिहार के 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट गलियारों में इन दिनों जबरदस्त चर्चा छिड़ी हुई है। बेहद कम उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में शतक और आईपीएल की नीलामी में इतिहास रचकर रातों-रात सनसनी बने वैभव की तुलना अब देश के स्थापित दिग्गजों से की जाने लगी है। हालांकि, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता ने इस अत्यधिक हाइप और जल्दबाजी में की जा रही तुलनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका स्पष्ट मानना है कि प्रतिभा के बुनियादी स्तर, तकनीकी परिपक्वता और तीनों प्रारूपों के दबाव को झेलने के मामले में शुभमन गिल आज भी कहीं आगे हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस उभरते हुए युवा खिलाड़ी के करियर को सुरक्षित रखने के लिए एक बेहद गंभीर और व्यावहारिक सलाह भी साझा की है।

'हाइप से बचें': पूर्व चयनकर्ता ने शुभमन गिल की तकनीक और क्लास को सराहा

पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता ने क्रिकेट प्रशंसकों और विश्लेषकों को जमीन पर रहने की नसीहत देते हुए कहा कि किसी युवा खिलाड़ी की शुरुआती झलक देखकर उसकी तुलना सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित कर चुके खिलाड़ियों से करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने रेखांकित किया कि शुभमन गिल ने अंडर-19 विश्व कप, इंडिया-ए के कठिन विदेशी दौरों और फिर रणजी ट्रॉफी में लगातार रनों का पहाड़ खड़ा करके भारतीय टीम के तीनों प्रारूपों में अपनी जगह पक्की की है। गिल की बैकफुट तकनीक, स्विंग और गति के खिलाफ सहजता, और मुश्किल परिस्थितियों में लंबी पारियां खेलने का धैर्य उन्हें आधुनिक क्रिकेट के सबसे संपूर्ण बल्लेबाजों में शुमार करता है। पूर्व चयनकर्ता के अनुसार, वैभव सूर्यवंशी निसंदेह एक असाधारण और दुर्लभ प्रतिभा हैं, लेकिन खेल के हर विभाग—खासकर दबाव प्रबंधन और तकनीकी अनुशासन—में शुभमन गिल उनसे कहीं बेहतर और परिपक्व हैं।

15 साल की उम्र में भारी उम्मीदों का बोझ: वैभव सूर्यवंशी के लिए जरूरी नसीहत

कम उम्र में मिलने वाली शोहरत और भारी वित्तीय अनुबंध अक्सर युवा खिलाड़ियों के खेल पर नकारात्मक असर डालते हैं। इसी बात को रेखांकित करते हुए पूर्व चयनकर्ता ने वैभव सूर्यवंशी को मीडिया की चकाचौंध और सोशल मीडिया की सनसनीखेज सुर्खियों से दूर रहने की दो-टूक सलाह दी है। उन्होंने कहा कि 15 साल की उम्र किसी खिलाड़ी के सीखने, बुनियादी तकनीक को निखारने और अपनी शारीरिक ताकत को विकसित करने का समय होती है। अगर इस उम्र में किसी खिलाड़ी के दिमाग में यह बात बैठ जाए कि वह पहले से ही परिपूर्ण है या किसी स्थापित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर से बेहतर है, तो उसका स्वाभाविक विकास वहीं रुक जाता है। चयनकर्ता ने वैभव के कोच और परिजनों को भी आगाह किया कि वे युवा बल्लेबाज को बाहरी शोर से बचाएं और केवल क्रीज पर लंबे समय तक डटे रहने की आदत पर ध्यान केंद्रित करने दें।

घरेलू क्रिकेट की भट्टी में तपना ही बनाएगा लंबी रेस का घोड़ा

क्रिकेट इतिहास गवाह है कि दर्जनों युवा प्रतिभाएं शुरुआती वर्षों में असाधारण चमक बिखेरने के बाद घरेलू क्रिकेट के कड़े इम्तिहान में गुमनाम हो गईं। पूर्व चयनकर्ता ने इस बात पर जोर दिया कि वैभव सूर्यवंशी को रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और सीके नायडू ट्रॉफी जैसी लंबी अवधि की घरेलू प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से लाल गेंद से खेलना चाहिए। चार दिवसीय और पांच दिवसीय मैचों में अलग-अलग तरह की पिचों पर गुणवत्तापूर्ण तेज गेंदबाजी और चतुर स्पिनरों का सामना करने से ही किसी बल्लेबाज की असली परीक्षा होती है। जब तक कोई बल्लेबाज विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों और दबाव भरे हालात में लगातार दो से तीन घरेलू सत्रों में रन नहीं बना लेता, तब तक उसे अगली पीढ़ी का सुपरस्टार घोषित करना जल्दबाजी होगी। शुभमन गिल ने भी इसी राह पर चलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए खुद को तैयार किया था।

क्या भविष्य के सुपरस्टार बन सकते हैं वैभव सूर्यवंशी?

वैभव सूर्यवंशी के पास निडर शॉट चयन और गेंद को तेजी से सीमा रेखा के पार भेजने का असाधारण कौशल मौजूद है। उनकी टाइमिंग और आत्मविश्वास ने ही चयनकर्ताओं और फ्रेंचाइजियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। क्रिकेट जानकारों का मानना है कि यदि वैभव पूर्व चयनकर्ता की दी गई सलाह को गंभीरता से लेते हैं और अपने अहंकार को खेल के आड़े नहीं आने देते, तो उनके पास भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा बनने की पूरी क्षमता है। किसी भी खिलाड़ी का सफर केवल एक या दो रिकॉर्ड पारियों से नहीं बल्कि एक दशक से अधिक समय तक लगातार प्रदर्शन करने से तय होता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वैभव सूर्यवंशी इस शुरुआती शोहरत और पूर्व चयनकर्ता की सख्त नसीहत को अपने करियर के लिए किस रूप में इस्तेमाल करते हैं।