मेरठ कलेक्ट्रेट पर भाकियू टिकैत का उग्र प्रदर्शन: बैरिकेडिंग तोड़कर अंदर घुसे किसान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत और किसान राजनीति के गढ़ मेरठ में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू-टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर पर जोरदार धावा बोलकर उग्र प्रदर्शन किया। गन्ना भुगतान में देरी, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता, भारी-भरकम बिजली बिलों और भूमि अधिग्रहण के उचित मुआवजे की मांगों को लेकर सैकड़ों की संख्या में जुटे किसानों ने प्रशासनिक व्यवस्था की चूलें हिला दीं। किसानों के आक्रोश और भारी संख्या को देखते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों ने लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग लगाकर त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों के तेवर इतने तीखे थे कि उन्होंने पुलिस के सारे बंदोबस्त को पलभर में ध्वस्त कर दिया।
भारी पुलिस बल के सामने टूटे बैरिकेड्स, कलेक्ट्रेट में मची अफरातफरी
सुबह से ही मेरठ जिले के विभिन्न गांवों, देहात क्षेत्रों और कस्बों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बाइकों पर सवार होकर किसान चौधरी चरण सिंह पार्क और कमिश्नरी चौराहे के पास जुटना शुरू हो गए थे। हाथों में भाकियू के हरे-सफेद झंडे लिए और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए किसानों का विशाल हुजूम जैसे ही कलेक्ट्रेट गेट की ओर बढ़ा, पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मुख्य द्वार पर ही रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और किसानों के बीच जोरदार धक्का-मुक्की हुई। देखते ही देखते उत्तेजित किसानों ने सुरक्षा के लिए लगाए गए भारी लोहे के बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका और पुलिस की घेराबंदी को तोड़ते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर दाखिल हो गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम से कलेक्ट्रेट में अपने सरकारी काम कराने आए आम नागरिकों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।
परिसर में दरी बिछाकर शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना
कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर दाखिल होने के बाद भाकियू कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक सामने दरी बिछा दी और जमीन पर बैठकर विशाल पंचायत शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी नेताओं ने साफ कर दिया कि जब तक जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक उनका यह धरना समाप्त नहीं होगा। धरने के दौरान कलेक्ट्रेट के विभिन्न कार्यालयों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया। भाकियू नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन लगातार किसानों की गंभीर समस्याओं की अनदेखी कर रहा है और अधिकारियों के रवैये से पश्चिमी यूपी का अन्नदाता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
गन्ना मूल्य भुगतान, स्मार्ट मीटर और भूमि अधिग्रहण पर फूटा गुस्सा
पंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कई प्रमुख मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। किसान नेताओं ने कहा कि आगामी पेराई सत्र सिर पर है, लेकिन चीनी मिलों ने पिछले सत्र का गन्ना बकाया अब तक पूरी तरह नहीं चुकाया है, जिससे किसानों के सामने परिवार चलाने और अगली फसल की बुवाई का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में जबरन लगाए जा रहे बिजली के स्मार्ट मीटरों का कड़ा विरोध करते हुए किसानों ने कहा कि इससे अनाप-शनाप बिल आ रहे हैं और ट्यूबवेलों की बिजली दरों में मनमानी की जा रही है। हाईवे और विकास परियोजनाओं के नाम पर अधिग्रहित की जा रही उपजाऊ जमीनों के लिए सर्किल रेट के अनुसार उचित मुआवजा न मिलने पर भी किसानों ने गहरी नाराजगी जताई।
प्रशासनिक अफसरों से वार्ता, मांगे न मानने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
कलेक्ट्रेट में बढ़ते तनाव और हंगामे को नियंत्रित करने के लिए अपर जिलाधिकारी (नगर), नगर मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसान नेताओं से वार्ता कर उनका मांग पत्र लिया और समस्याओं के त्वरित निस्तारण का आश्वासन दिया। हालांकि भाकियू के जिला अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि स्थानीय प्रशासन और शासन स्तर से निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन केवल मेरठ तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों ने हुंकार भरी कि आने वाले दिनों में पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कमिश्नरी मुख्यालयों और दिल्ली की सीमाओं पर एक बार फिर ऐतिहासिक चक्का जाम किया जाएगा।