'पति की वैकेंसी': 36 साल की महिला ने Google Form से निकाले शादी के आवेदन, मिले 240 से ज्यादा रिश्ते

'पति की वैकेंसी': 36 साल की महिला ने Google Form से निकाले शादी के आवेदन, मिले 240 से ज्यादा रिश्ते

आज के डिजिटल दौर में जब जीवनसाथी की तलाश पारंपरिक बिचौलियों से निकलकर टिंडर, बंबल और शादी डॉट कॉम जैसी मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स के एल्गोरिदम पर टिक गई है, तब एक महिला ने प्यार और शादी की तलाश का ऐसा अनोखा रास्ता चुना जिसने इंटरनेट की दुनिया में तहलका मचा दिया है। आधुनिक डेटिंग कल्चर की सतही चैटिंग, टाइमपास और 'घोस्टिंग' से बुरी तरह ऊब चुकी 36 साल की एक आत्मनिर्भर महिला ने अपने लिए एक उपयुक्त जीवनसाथी खोजने के लिए कॉरपोरेट हायरिंग की तर्ज पर 'पति की वैकेंसी' निकाल दी। महिला ने इसके लिए बाकायदा एक विस्तृत गूगल फॉर्म (Google Form) तैयार किया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। नतीजा इतना चौंकाने वाला रहा कि महज कुछ ही हफ्तों के भीतर महिला के पास 240 से ज्यादा संभावित दूल्हों के आवेदन आ पहुंचे।

डेटिंग ऐप्स के खोखलेपन से तंग आकर अपनाया कॉरपोरेट रिक्रूटमेंट का तरीका

पारंपरिक डेटिंग ऐप्स पर घंटों स्वाइप करने और दर्जनों निरर्थक डेट्स पर जाने के बाद महिला को यह अहसास हुआ कि आज के प्लेटफॉर्म्स पर लोग गंभीर रिश्तों के प्रति ईमानदार नहीं हैं। अक्सर प्रोफाइल में दी गई जानकारियां अधूरी, भ्रामक या पूरी तरह झूठी होती हैं। इसके अलावा कई दिनों तक चैटिंग करने के बाद पता चलता है कि दोनों के जीवन के बुनियादी मूल्य, आर्थिक सोच या भविष्य के लक्ष्य आपस में बिल्कुल मेल नहीं खाते।

इस तरह के भावनात्मक और मानसिक भटकाव से बचने के लिए महिला ने सोचा कि जिस तरह कंपनियां एक सही कर्मचारी को नियुक्त करने के लिए एक पारदर्शी और सटीक आवेदन प्रक्रिया अपनाती हैं, ठीक उसी तरह जीवन के सबसे बड़े फैसले यानी शादी के लिए भी एक सीधा और स्पष्ट पैमाना क्यों न तय किया जाए। इसी विचार के साथ महिला ने खुद का एक कस्टमाइज्ड 'हसबैंड एप्लीकेशन फॉर्म' डिजाइन किया।

गूगल फॉर्म में पूछे गए तीखे और दिलचस्प सवाल: सादगी से लेकर आर्थिक सोच तक का टेस्ट

महिला द्वारा तैयार किया गया यह फॉर्म कोई साधारण फॉर्म नहीं था, बल्कि इसमें जीवन के हर छोटे-बड़े पहलू को शामिल किया गया था। इस फॉर्म के जरिए महिला यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि केवल वही पुरुष आवेदन करें जो सचमुच शादी और एक परिपक्व रिश्ते को लेकर गंभीर हैं। फॉर्म में बुनियादी जानकारियों जैसे उम्र, ऊंचाई, पेशा और शहर के अलावा कई ऐसे सवाल शामिल थे जो आम तौर पर पहली या दूसरी डेट पर लोग पूछने से कतराते हैं।

फॉर्म में मुख्य रूप से यह पूछा गया था कि आवेदक शादी को लेकर क्या नजरिया रखता है, उसके जीवन के दीर्घकालिक लक्ष्य क्या हैं, और वह वित्तीय प्रबंधन को कैसे देखता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण, घरेलू जिम्मेदारियों के बंटवारे पर राय, बच्चों को लेकर योजना और किसी कठिन परिस्थिति या तनाव के समय विवादों को सुलझाने का तरीका जैसे व्यावहारिक प्रश्न भी शामिल किए गए थे। महिला ने यह भी साफ कर दिया था कि उन्हें कोई 'सुपरमैन' नहीं चाहिए, बल्कि एक ऐसा साथी चाहिए जो भावनात्मक रूप से परिपक्व हो, अपनी गलतियां स्वीकार कर सके और जिंदगी में एक सच्चा दोस्त बनकर रहे।

महज कुछ ही दिनों में आए 240 से ज्यादा आवेदन: इंजीनियर से लेकर उद्यमी तक कतार में

जैसे ही यह अनोखा गूगल फॉर्म सोशल मीडिया और इंटरनेट कम्युनिटीज में वायरल हुआ, पुरुषों की ओर से प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। 36 साल की उम्र में इस तरह की बेबाक और पारदर्शी पहल को लोगों ने हाथों-हाथ लिया। देश और विदेश के अलग-अलग हिस्सों से सॉफ्टवेयर इंजीनियर, कॉर्पोरेट मैनेजर, डॉक्टर, स्टार्टअप फाउंडर्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स ने इस फॉर्म को गंभीरता से भरकर सबमिट किया।

महिला के अनुसार, 240 से अधिक आवेदनों में से अधिकांश पुरुषों ने अपने जवाब बेहद ईमानदारी, विस्तार और संजीदगी से लिखे थे। कई आवेदकों ने यह भी स्वीकार किया कि वे भी आधुनिक डेटिंग ऐप्स के खेल से थक चुके थे और इस तरह का सीधा, पारदर्शी और स्पष्ट तरीका उन्हें बेहद व्यावहारिक और राहत देने वाला लगा।

शॉर्टलिस्टिंग और वर्चुअल इंटरव्यू: मॉडर्न स्वयंवर का अगला पड़ाव

कॉरपोरेट स्टाइल में आवेदन मांगने के बाद अब महिला इन सभी 240 फॉर्म्स की बारीकी से समीक्षा और स्क्रूटनी कर रही है। महिला ने बताया कि वे सभी उत्तरों को पढ़कर आवेदकों की सोच, भावनात्मक जुड़ाव और जीवन मूल्यों का मिलान अपनी प्राथमिकताओं से कर रही हैं।

इसके बाद पहले दौर में चयनित उम्मीदवारों के साथ छोटी वर्चुअल बातचीत (वीडियो कॉल) तय की जा रही है, ताकि आमने-सामने की सहजता और वाइब को परखा जा सके। यदि दोनों को बातचीत सकारात्मक और अनुकूल लगती है, तभी औपचारिक रूप से व्यक्तिगत मुलाकात या डेट की योजना बनाई जाएगी। इंटरनेट पर इस पूरे प्रयोग को '21वीं सदी का आधुनिक स्वयंवर' करार दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: व्यावहारिक कदम या शादी का बाजारीकरण?

इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया है। एक बड़े वर्ग का मानना है कि यह महिला द्वारा उठाया गया एक बेहद परिपक्व, साहसी और समय बचाने वाला कदम है। समर्थकों का तर्क है कि जब जीवनसाथी चुनने जैसा फैसला पूरी जिंदगी को प्रभावित करता है, तो शुरुआत से ही ईमानदारी और स्पष्टता रखना किसी भी ड्रामे या बाद के तलाक से कहीं बेहतर है।

वहीं दूसरी ओर, कुछ आलोचकों का मानना है कि शादी जैसे पवित्र और भावनात्मक संबंध को कॉरपोरेट नौकरी की तरह इंटरव्यू और फॉर्म्स तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि प्यार और आपसी समझ अचानक मिलने वाले अहसासों और वक्त के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है। बावजूद इसके, इस महिला के अनूठे प्रयोग ने यह साबित कर दिया है कि आज की पीढ़ी रिश्तों में झूठ और बनावटीपन के बजाय पारदर्शिता और स्पष्ट अपेक्षाओं को सबसे ज्यादा तरजीह दे रही है।