सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, 8 साल पुराने मामले में बढ़ीं मुश्किलें

सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, 8 साल पुराने मामले में बढ़ीं मुश्किलें

आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद चंद्रशेखर आजाद की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने करीब आठ साल पुराने एक आपराधिक मामले में सुनवाई के दौरान सांसद के लगातार अनुपस्थित रहने पर सख्त रुख अपनाया है। बार-बार समन और नोटिस जारी होने के बावजूद अदालत में पेश न होने के कारण विशेष अदालत ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है।

अदालत के इस कड़े फैसले के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। वादी पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष यह दलील दी गई कि सांसद कानून की प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहे हैं और तारीखों पर जानबूझकर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इस पर न्यायाधीश ने कड़ा संज्ञान लेते हुए पुलिस को वारंट तामील कराने और आगामी 23 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई तय करने का आदेश दिया है।

क्या है 2018 का पूरा मामला: शादी समारोह में हथियार और थप्पड़ मारने का आरोप

यह पूरा विवाद वर्ष 2018 का है, जब गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र स्थित वृंदावन गार्डन में एक शादी समारोह आयोजित था। शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार (निवासी नूरपुर, मसूरी, गाजियाबाद) के अनुसार, वह भी उस विवाह समारोह में शरीक होने पहुंचे थे। इसी दौरान चंद्रशेखर आजाद अपने कई समर्थकों और सुरक्षा गार्डों के साथ वहां पहुंचे। धर्मेंद्र ने जब चंद्रशेखर और उनके लोगों से यह सवाल पूछ लिया कि शादी में इतने हथियार और राइफलें क्यों लेकर आए हैं, तो विवाद भड़क गया।

शिकायत के मुताबिक, चंद्रशेखर आजाद ने गुस्से में आकर जवाब दिया कि दिखाई नहीं दे रहा कि ये राइफलें हैं। इसके बाद चंद्रशेखर, उनके साथी गुलजार सिद्दीकी और अन्य अज्ञात समर्थकों ने धर्मेंद्र के साथ गाली-गलौज करते हुए कथित तौर पर मारपीट की और थप्पड़ जड़ दिया। पीड़ित ने आरोप लगाया कि उन्हें बीच-बचाव करने पर जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। बाद में पुलिस ने मामले में आईपीसी की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की और जांच पूरी करते हुए चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी।

संपत्ति कुर्की और धारा 82-83 की कार्रवाई की मांग: क्या जेल जाएंगे सांसद?

अदालत में धर्मेंद्र कुमार के अधिवक्ता भजनलाल गौतम ने कड़ा पक्ष रखते हुए कहा कि चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ पहले भी जमानती व गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके थे। इसके बावजूद 28 सितंबर को नियत पेशी पर भी वह उपस्थित नहीं हुए। वादी के वकील ने अदालत से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 82 (फरार घोषित करने की प्रक्रिया) और धारा 83 (संपत्ति की कुर्की) के तहत आदेश जारी करने की मांग की है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि गैर जमानती वारंट जारी होने का मतलब सीधे जेल जाना नहीं होता, लेकिन अगर तय समयसीमा के भीतर सांसद अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण नहीं करते हैं या व्यक्तिगत रूप से पेश होकर वारंट रिकॉल कराने की अर्जी नहीं लगाते हैं, तो पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का अधिकार मिल जाता है। अब सांसद की विधिक टीम पर निर्भर करेगा कि वे उच्च अदालत से राहत की गुहार लगाते हैं या एमपी-एमएलए कोर्ट में हाजिर होकर अपनी जमानत याचिका दाखिल करते हैं।

यूपी की सियासत पर असर: संगठनात्मक दौरों के बीच कानूनी झटका

नगीना लोकसभा सीट पर जीत हासिल करने के बाद चंद्रशेखर आजाद लगातार उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के विस्तार, जनाधार मजबूत करने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। वे राज्य के विभिन्न जिलों में लगातार यात्राएं और रैलियां कर रहे हैं। ऐसे समय में 8 साल पुराने केस में गैर जमानती वारंट जारी होना उनके सियासी अभियानों के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

विरोधी दल जहां इस मामले को लेकर कानून व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के आचरण पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह एक मामूली विवाद का पुराना मामला है जिसे बेवजह तूल दिया जा रहा है और कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में उचित जवाब दाखिल कर दिया जाएगा।