प्रगट सिंह के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही AAP का चौतरफा हमला
पंजाब कांग्रेस में हुए बड़े संगठनात्मक फेरबदल के तहत अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक प्रगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। हालांकि, उनके ताजपोशी के चंद घंटों के भीतर ही सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रगट सिंह की पुरानी राजनीतिक और प्रशासनिक फाइलों को खोल दिया है।
आप प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रगट सिंह के पूर्ववर्ती अकाली दल और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान उठाए गए कदमों और उनकी खामोशी पर सीधा हमला बोला। आप नेताओं का कहना है कि चेहरा बदलने से कांग्रेस के पाप नहीं धुलेंगे और प्रगट सिंह को पंजाब की जनता के सामने कई संवेदनशील मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
1158 असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती: शिक्षा मंत्री रहते हुए युवाओं के साथ धोखे का आरोप
आप ने सबसे बड़ा हमला चरणजीत सिंह चन्नी सरकार के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री रहे प्रगट सिंह के कार्यकाल में हुई 1158 असिस्टेंट प्रोफेसर और लाइब्रेरियन भर्ती प्रक्रिया को लेकर किया।
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कानूनी पेच और युवाओं का भविष्य: आप नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रगट सिंह ने चुनाव से ठीक पहले जल्दबाजी और प्रक्रियागत खामियों के साथ इस भर्ती का विज्ञापन निकाला था, जिसके चलते यह भर्ती अदालती मुकदमों में उलझ गई और सैकड़ों योग्य उम्मीदवारों का भविष्य वर्षों तक अधर में लटका रहा।
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सड़क पर उतरे युवाओं की अनदेखी: पार्टी ने याद दिलाया कि जब चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति पत्रों की मांग को लेकर पानी की टंकियों और सड़कों पर धरना दे रहे थे, तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने उनकी जायज मांगों का ठोस समाधान निकालने के बजाय केवल खोखले आश्वासन दिए थे।
नशा और बेअदबी के मामलों पर साधी गई चुप्पी पर घेरा
आम आदमी पार्टी ने प्रगट सिंह के अकाली दल से जुड़े पुराने राजनीतिक सफर और बाद में कांग्रेस सरकार में भागीदारी का हवाला देते हुए नशा और बेअदबी के संवेदनशील मुद्दों पर भी उन्हें आड़े हाथों लिया:
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अकाली दल में रहते हुए खामोशी: आप प्रवक्ताओं ने कहा कि जब पंजाब में नशे का नेटवर्क पैर पसार रहा था और बरगाड़ी बेअदबी कांड के बाद कोटकपूरा व बहबल कलां में गोलीकांड हुआ, तब प्रगट सिंह सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल का हिस्सा थे। पार्टी ने सवाल किया कि उस दौरान उन्होंने इस्तीफा देकर जनता के पक्ष में आवाज क्यों नहीं उठाई?
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कांग्रेस शासन में रिपोर्ट पर अमल न होना: इसके अलावा, जब कांग्रेस सत्ता में आई और कैप्टन अमरिंदर सिंह व चरणजीत सिंह चन्नी की सरकारें बनीं, तब भी बेअदबी के दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने और ड्रग्स तस्करों की एसटीएफ (STF) रिपोर्ट पर सख्त कार्रवाई कराने में प्रगट सिंह विफल रहे। आप का दावा है कि प्रगट सिंह केवल कुर्सी की राजनीति करते रहे हैं और गंभीर मामलों में उन्होंने हमेशा समझौते किए।
राजा वड़िंग के इस्तीफे पर कांग्रेस की अंदरूनी कलह उजागर
आप नेताओं ने कांग्रेस के इस नेतृत्व परिवर्तन को पार्टी की आंतरिक गुटबाजी का नतीजा करार दिया। राजा वड़िंग द्वारा पद छोड़ने के बाद यह बात खुलकर सामने आ चुकी है कि पंजाब कांग्रेस में चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, नवजोत सिंह सिद्धू और अब प्रगट सिंह के गुटों के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है।
आप ने तंज कसते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस चाहे जितने भी अध्यक्ष बदल ले, लेकिन राज्य की जनता उसके नशा, माफिया और घोटालों से जुड़े पिछले 10-15 वर्षों के ट्रैक रिकॉर्ड को कभी नहीं भूलेगी।
प्रगट सिंह के अध्यक्ष बनते ही शुरू हुए इस सियासी घमासान ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में भर्तियों, नशा और बेअदबी के मुद्दों पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच बयानबाजी और तेज होने वाली है।