पंजाब को नशा व संक्रमण मुक्त बनाने का मान सरकार का मास्टरप्लान: नशा मुक्ति केंद्रों में अनिवार्य होगी 'ट्रिपल एच' स्क्रीनिंग

पंजाब को नशा व संक्रमण मुक्त बनाने का मान सरकार का मास्टरप्लान: नशा मुक्ति केंद्रों में अनिवार्य होगी 'ट्रिपल एच' स्क्रीनिंग

पंजाब को नशा और संक्रामक बीमारियों से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार ने एक व्यापक मास्टरप्लान तैयार किया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' के तहत अब प्रदेश भर के सभी सरकारी नशा मुक्ति और पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) केंद्रों में 'ट्रिपल एच' (Triple-H) स्क्रीनिंग को सीधे उपचार प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य नशे की लत से जूझ रहे मरीजों को न केवल नशे के चंगुल से बाहर निकालना है, बल्कि संक्रमित सुइयों और सिरिंजों के साझा इस्तेमाल से फैलने वाली गंभीर रक्त जनित बीमारियों की समय रहते पहचान कर उनका सटीक इलाज सुनिश्चित करना है।

क्या है 'ट्रिपल एच' (Triple-H) स्क्रीनिंग?

'ट्रिपल एच' के तहत तीन प्रमुख और जानलेवा वायरल संक्रमणों की एक साथ जांच की जाती है:

  1. HIV (ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस): शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करने वाला वायरस।

  2. Hepatitis B (हेपेटाइटिस-बी): लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला वायरल संक्रमण।

  3. Hepatitis C (हेपेटाइटिस-सी): रक्त के जरिए फैलने वाला क्रॉनिक लिवर संक्रमण।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इंट्रावेनस ड्रग यूजर्स (नसों में इंजेक्शन के जरिए नशा करने वाले) में ये तीनों वायरस सबसे तेजी से फैलते हैं। कई बार ये संक्रमण बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक शरीर में मौजूद रहते हैं और लिवर सिरोसिस या ऑर्गन फेलियर का कारण बन जाते हैं। समय पर जांच होने से मरीज को एंटी-वायरल थेरेपी और उचित चिकित्सकीय परामर्श देकर पूरी तरह स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है।

कैंपों के इंतजार से मुक्ति: सीधे एडमिशन और रीहैब से जुड़ेगा टेस्ट

अब तक पंजाब में एचआईवी और हेपेटाइटिस की जांच के लिए हर दो-तीन महीने में समय-समय पर विशेष मेडिकल कैंप लगाए जाते थे। इस पुरानी व्यवस्था में कई खामियां थीं—यदि कोई मरीज कैंप के दिन उपस्थित नहीं होता था, तो उसे अगले टेस्ट के लिए हफ्तों या महीनों इंतजार करना पड़ता था। इसके अलावा, कितने मरीजों की जांच छूटी और कितनों को फॉलो-अप इलाज मिला, इसका सटीक रिकॉर्ड रखना कठिन होता था।

नई व्यवस्था के तहत:

  • ऑन-अराइवल टेस्टिंग: नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल होते ही मरीज की प्राथमिक मेडिकल स्क्रीनिंग का हिस्सा ट्रिपल एच टेस्ट होगा।

  • निःशुल्क जांच व दवाएं: यदि जांच में कोई मरीज संक्रमित पाया जाता है, तो उसे सरकार द्वारा संचालित आम आदमी क्लीनिकों और जिला अस्पतालों के नेटवर्क से जोड़कर मुफ्त दवाएं और निरंतर चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध कराई जाएगी।

  • निजी केंद्रों में शुरुआत: निजी नशा मुक्ति केंद्रों में इस व्यवस्था को पहले ही हरी झंडी दी जा चुकी है और अब इसे सभी सरकारी केंद्रों में पूरी ताकत के साथ लागू किया जा रहा है।

सामाजिक पुनर्वास और समग्र स्वास्थ्य पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल नशा छुड़ाना भर नहीं है, बल्कि युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक तरीके से फिर से स्थापित करना है।

इस मास्टरप्लान के लागू होने से पंजाब में रक्त जनित संक्रामक रोगों के ट्रांसमिशन नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे पर पड़ने वाला दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक बोझ भी काफी कम होगा।