₹5 बढ़े पेट्रोल के दाम और डीजल में भी उछाल: सबसे बड़ी प्राइवेट कंपनी नायरा एनर्जी ने दिया महंगाई का झटका
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों और रिफाइनरी लागत के बढ़ते दबाव के बीच आम जनता को वाहन ईंधन पर बड़ा झटका लगा है। देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा विक्रेता कंपनी 'नायरा एनर्जी' (Nayara Energy) ने पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमतों में सीधे ₹5 प्रति लीटर और डीजल के दामों में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है।
नायरा एनर्जी की यह नई दरें देशभर में उसके सभी 7,100 से अधिक पेट्रोल पंपों पर शनिवार से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। इस बढ़ोतरी के बाद जहां-जहां नायरा के फ्यूल स्टेशन हैं, वहां पेट्रोल और डीजल भरवाना काफी महंगा हो गया है। उदाहरण के तौर पर, मध्य प्रदेश के भोपाल में नायरा के पंप पर पेट्रोल बढ़कर ₹119.54 प्रति लीटर और डीजल ₹102.64 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।
सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर क्या है स्थिति? क्या वहां भी बढ़े दाम?
निजी कंपनी द्वारा ईंधन के दाम बढ़ाए जाने के बाद वाहन चालकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी पेट्रोल पंपों पर भी तेल महंगा हो गया है?
राहत की बात यह है कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—ने अपनी खुदरा दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। देश के कुल 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा नेटवर्क इन्हीं तीन सरकारी कंपनियों के पास है। इसके अलावा रिलायंस-बीपी (Jio-bp) ने भी फिलहाल अपने पंपों पर कीमतों में कोई फेरबदल नहीं किया है। लिहाजा, सरकारी और जियो-बीपी के आउटलेट्स पर ग्राहकों को पुराने रेट पर ही ईंधन मिल रहा है।
अचानक क्यों बढ़ाई गईं कीमतें? जानिए वजह
नायरा एनर्जी द्वारा अचानक दरों में वृद्धि करने के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रिफाइनरी मार्जिन पर भारी दबाव है:
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कच्चे तेल में भारी तेजी: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार कर रहा है।
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अंडर-रिकवरी और घाटा: निजी कंपनियों को सरकारी तेल कंपनियों की तरह सब्सिडी या वित्तीय बफर का सहारा नहीं मिलता। आयातित कच्चे तेल की लागत और खुदरा विक्रय मूल्य के बीच का अंतर लगातार चौड़ा हो रहा था, जिससे निजी रिटेलरों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था।
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बिक्री पर सीमाएं: घाटे से बचने के लिए कई आउटलेट्स पर वाहनों में तेल भरवाने की अधिकतम सीमा (राशनिंग) तक लागू कर दी गई थी। रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की अंडर-रिकवरी के चलते भारी दैनिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
क्या सरकारी कंपनियां भी बढ़ाएंगी पेट्रोल-डीजल के दाम?
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से ऊपर बनी रहती हैं, तो सरकारी कंपनियों के लिए भी लंबे समय तक मौजूदा खुदरा कीमतें बनाए रखना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
हालांकि, आगामी विधानसभा चुनावों और खुदरा मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क (Excise Duty) या डिविडेंड फॉर्मूले के जरिए संतुलन साधने का प्रयास कर सकती है। फिलहाल निजी और सरकारी पेट्रोल पंपों के बीच प्रति लीटर ₹3 से ₹5 का बड़ा मूल्य अंतर (Price Gap) पैदा हो गया है, जिसके चलते निजी पंपों से वाहनों की आवाजाही सरकारी पंपों की तरफ तेजी से शिफ्ट होने की संभावना है।