UP में नाव और स्टीमरों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, यात्रियों के साथ नाविकों का भी होगा बीमा; योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश की पवित्र नदियों—गंगा, यमुना, सरयू और घाघरा—में संचालित होने वाली नावों और मोटर बोट्स में होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने के लिए योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने एक सख्त और सुव्यवस्थित नीतिगत फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान (यांत्रिक प्रणोदित जलयानों से भिन्न) नियमावली' के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के लागू होने के बाद प्रदेश की किसी भी नदी, जलाशय या झील में बिना वैध पंजीकरण (Registration) और सुरक्षा मानकों के कोई भी नाव या स्टीमर नहीं चल सकेगा। इस फैसले का सबसे मानवीय और अहम पहलू यह है कि अब नाव पर सफर करने वाले आम यात्रियों के साथ-साथ अपनी आजीविका चलाने वाले गरीब मल्लाहों और नाविकों को भी अनिवार्य बीमा सुरक्षा कवर दिया जाएगा।
गैर-यांत्रिक नावों के लिए मात्र ₹50 शुल्क, 3 साल की वैधता
सरकार ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि पारंपरिक नाविकों पर कोई भारी आर्थिक बोझ न पड़े।
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पंजीकरण शुल्क: हाथ से चलने वाली पारंपरिक (गैर-यांत्रिक) नावों के लिए केवल ₹50 का सांकेतिक पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
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वैधता अवधि: यह पंजीकरण 3 वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा, जिसे समय पूरा होने पर मामूली शुल्क देकर नवीनीकृत कराया जा सकेगा।
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यांत्रिक स्टीमर व मोटर बोट: इंजन चालित नावों, मोटर बोट्स, स्पीड बोट्स और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट्स के लिए इंजन क्षमता और सीटिंग कैपेसिटी के हिसाब से अलग स्लैब तय किए गए हैं।
यात्री और नाविक दोनों का बीमा अनिवार्य: हादसों में मिलेगा वित्तीय संबल
नदियों में अक्सर ओवरलोडिंग या खराब मौसम के कारण नाव पलटने की दुखद घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनमें जान गंवाने वाले यात्रियों और नाविकों के परिजनों को मुआवजे के लिए सरकारी घोषणाओं का इंतजार करना पड़ता था।
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अनिवार्य बीमा पॉलिसी: नए नियमों के तहत अब हर पंजीकृत नाव का परिचालन शुरू करने से पहले नाविक और उस पर बैठने वाले यात्रियों की तय क्षमता के अनुसार थर्ड पार्टी व दुर्घटना बीमा कराना अनिवार्य होगा।
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त्वरित दावा भुगतान: किसी भी अनहोनी की स्थिति में पीड़ित परिवारों को बीमा कंपनियों से त्वरित वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
ओवरलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध और अनिवार्य लाइफ जैकेट
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नियमावली में सुरक्षा के कड़े मानक तय किए गए हैं:
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क्षमता का अंकन: प्रत्येक नाव पर उसकी अधिकतम यात्री क्षमता (सीटिंग कैपेसिटी) और रजिस्ट्रेशन नंबर को स्पष्ट रूप से पेंट कराना होगा।
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लाइफ जैकेट की अनिवार्यता: नाव पर सवार सभी यात्रियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणित लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य होगा। लाइफ जैकेट न होने पर नाव को तत्काल जब्त किया जा सकेगा।
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मौसम का अलर्ट: बाढ़ के दिनों, सूर्यास्त के बाद और तेज आंधी-तूफान के समय नावों के संचालन पर स्थानीय प्रशासन की रोक रहेगी।
वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या जैसे धार्मिक केंद्रों पर बड़ा असर
उत्तर प्रदेश में धार्मिक और पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात वाराणसी के 84 घाटों, प्रयागराज के संगम और अयोध्या की सरयू नदी में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु व विदेशी पर्यटक नौका विहार करते हैं। वाराणसी के देव दीपावली और प्रयागराज के माघ मेला व कुंभ आयोजनों के दौरान लाखों की भीड़ नदी पर निर्भर होती है। ऐसे में यह नियम न केवल जल पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों पर ला खड़ा करेगा, बल्कि अवैध रूप से संचालित हो रहीं पुरानी और जर्जर नावों की पहचान कर उन्हें सेवा से बाहर करने में मदद करेगा।
स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन को सौंपी गई निगरानी की कमान
पंजीकरण और निरीक्षण की जिम्मेदारी संबंधित जिलों के नगर निगम, नगर पालिका परिषद, जिला पंचायत और परिवहन विभाग की संयुक्त टीमों को दी जा रही है। जिला स्तर पर अपर जिलाधिकारी (ADM) स्तर के अधिकारी को इसका नोडल नामित किया जाएगा, जो समय-समय पर घाटों पर औचक निरीक्षण करेंगे। गैर-पंजीकृत या क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाली नावों के मालिकों पर भारी जुर्माने और बोट जब्त करने का कानूनी प्रावधान भी इस नियमावली में जोड़ा गया है।