मऊ, कानपुर और सीतापुर समेत यूपी के 5 जिलों में बनेंगे संतकबीर टेक्सटाइल पार्क, कैबिनेट में जल्द रखा जाएगा प्रस्ताव; बुनकरों को मिलेंगे नए पंख

मऊ, कानपुर और सीतापुर समेत यूपी के 5 जिलों में बनेंगे संतकबीर टेक्सटाइल पार्क, कैबिनेट में जल्द रखा जाएगा प्रस्ताव; बुनकरों को मिलेंगे नए पंख

उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया के फलक पर आधुनिक टेक्सटाइल व परिधान उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। प्रदेश के पारंपरिक बुनकरों के हुनर को वैश्विक मंच देने, कपड़ा उद्योग में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 'संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना' के विस्तार की रूपरेखा तैयार कर ली है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूर्वांचल, मध्य यूपी और बुंदेलखंड के पांच प्रमुख औद्योगिक जिलों—मऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, सीतापुर और झांसी में आधुनिक सुविधाओं से लैस विशाल टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क विकसित किए जाएंगे। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने इस व्यापक परियोजना का प्रस्ताव अंतिम रूप से तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

बुनकरों के गढ़ मऊ में 75 एकड़ जमीन चिह्नित, कानपुर और सीतापुर में भी विस्तार

इस पूरी योजना में पारंपरिक हथकरघा और पावरलूम के सबसे बड़े गढ़ माने जाने वाले मऊ जनपद को विशेष प्राथमिकता दी गई है। मऊ के भुजौटी क्षेत्र में लगभग 75 एकड़ सरकारी भूमि इस पार्क के लिए पहले ही चिह्नित की जा चुकी है। मऊ की साड़ियों और वस्त्रों की समृद्ध विरासत को देखते हुए यहां सीधे धागा निर्माण से लेकर अत्याधुनिक डाइंग और फिनिशिंग यूनिट्स लगाई जाएंगी। वहीं, कभी 'पूरब का मैनचेस्टर' कहे जाने वाले कानपुर नगर और उसके औद्योगिक विस्तार कानपुर देहात में भी टेक्सटाइल पार्क स्थापित कर चमड़ा व वस्त्र उद्योग के पारंपरिक ढांचे को पुनर्जीवित किया जाएगा। लखनऊ से सटे सीतापुर और बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार झांसी में भी लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए बड़े भूखंड आरक्षित किए गए हैं। कुल मिलाकर पांचों जनपदों में सैकड़ों एकड़ भूमि पर ये एकीकृत पार्क आकार लेंगे।

'फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन' की थीम पर विकास

राज्य सरकार इन टेक्सटाइल पार्कों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5F विजन—'फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन' की तर्ज पर डिजाइन कर रही है। इन पार्कों में कपड़ा निर्माण से जुड़ी हर कड़ी को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जाएगा।

  • प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर: निवेशकों और उद्यमियों के लिए पहले से तैयार शेड, चौड़ी सड़कें, 24 घंटे निर्बाध बिजली और उच्च क्षमता वाले जलापूर्ति नेटवर्क का निर्माण होगा।

  • कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP): कपड़ा रंगाई और छपाई से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी के सुरक्षित निस्तारण के लिए आधुनिक जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) आधारित ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।

  • लॉजिस्टिक्स और टेस्टिंग लैब: कच्चे माल के भंडारण के लिए आधुनिक वेयरहाउस, गुणवत्ता जांच के लिए मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब्स और डिजाइनिंग स्टूडियो स्थापित होंगे।

कैबिनेट मंजूरी मिलते ही निजी विकासकर्ताओं को आमंत्रित करेगी सरकार

विभागीय सूत्रों के अनुसार, हथकरघा, खादी एवं वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा तैयार कैबिनेट नोट में इन पार्कों के विकास के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP मॉडल) और विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान शामिल किया गया है। कैबिनेट की औपचारिक मुहर लगते ही उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) और उद्योग विभाग के सहयोग से ग्लोबल टेंडर जारी कर निजी विकासकर्ताओं (डेवलपर्स) और प्रमुख टेक्सटाइल घरानों को आमंत्रित किया जाएगा। हाल ही में लखनऊ में आयोजित 'यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव' के दौरान देश-विदेश के कई बड़े कपड़ा समूहों ने राज्य में निवेश की मजबूत इच्छा जताई थी, जिसके बाद सरकार ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

स्थानीय बुनकरों को बिचौलियों से मुक्ति और लाखों रोजगार के अवसर

इस योजना का सबसे सकारात्मक और सीधा सामाजिक असर स्थानीय स्तर पर आजीविका पर पड़ेगा। पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के लाखों बुनकर आज भी कच्चे माल की ऊंची लागत, पुरानी तकनीक और बिचौलियों के सिंडिकेट के कारण अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं पा पाते। टेक्सटाइल पार्कों के चालू होने से स्थानीय बुनकरों को उच्च गुणवत्ता वाला धागा सस्ती दरों पर मिलेगा और उनके तैयार उत्पादों की सीधी मार्केटिंग राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ हो सकेगी। इसके साथ ही परिधान सिलाई (गारमेंटिंग) और पैकेजिंग के क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे महानगरों की ओर होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

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