ग्रेटर नोएडा में 500 ग्राम OG गांजा के साथ 2 शातिर तस्कर गिरफ्तार, क्रेटा कार जब्त
दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र ग्रेटर नोएडा में युवाओं और कॉलेज छात्रों के बीच मादक पदार्थों का अवैध जाल फैलाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग कार्टेल पर पुलिस कमिश्नरेट ने जोरदार प्रहार किया है। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एक गुप्त सूचना और सघन चेकिंग अभियान के आधार पर अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से लाए जाने वाले अत्यधिक महंगे 'ओजी गांजा' (OG Kush/Original Gangster Ganja) की तस्करी करने वाले गिरोह के दो प्रमुख गुर्गों को रंगे हाथों धर दबोचा। पुलिस टीम ने आरोपियों की घेराबंदी कर उनके कब्जे से आधा किलो (500 ग्राम) उच्च गुणवत्ता वाला ओजी गांजा और मादक पदार्थों की खेप ढोने में इस्तेमाल की जा रही एक सफेद रंग की हुंडई क्रेटा कार बरामद की है।
बरामद किए गए इस विशेष किस्म के गांजे की अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय अवैध बाजार में कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक पूछताछ में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि यह पूरा सिंडिकेट नेपाल के रास्ते भारत में इस प्रीमियम ड्रग की तस्करी कर रहा था। आरोपी सीमा पार से सुरक्षित रास्तों के जरिए खेप मंगाते थे और फिर लग्जरी कारों का सहारा लेकर पुलिस की नजरों से बचते हुए दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ और आसपास के प्रमुख शहरों में स्थित नामी शिक्षण संस्थानों के आसपास सक्रिय फुटकर पेडलर्स और अमीर परिवारों के छात्रों तक इसकी आपूर्ति करते थे।
लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगे शौक: लखनऊ के दो शातिर हिस्ट्रीशीटर चढ़े पुलिस के हत्थे
नॉलेज पार्क कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए दोनों तस्कर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं, लेकिन अपराध की दुनिया में पैर पसारने के लिए उन्होंने राजधानी लखनऊ को अपना ठिकाना बनाया हुआ था। पकड़े गए पहले तस्कर की पहचान 23 वर्षीय अमन सिंह पुत्र सुरेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से रायबरेली जनपद के बछरांवा थाना क्षेत्र का रहने वाला है और वर्तमान समय में लखनऊ के पॉश इलाके गोल्फ सिटी स्थित हाई-राइज अपार्टमेंट में रह रहा था। वहीं दूसरा आरोपी 25 वर्षीय हरिविजय सिंह पुत्र विजय बहादुर सिंह है, जो सुल्तानपुर जिले का मूल निवासी है और वर्तमान में लखनऊ के विकास नगर इलाके में अपना ठिकाना बनाए हुए था।
थाना प्रभारी के मुताबिक, शनिवार को जब पुलिस टीम नॉलेज पार्क-वन गोलचक्कर के पास संदिग्ध वाहनों की सघन चेकिंग कर रही थी, तभी एक तेज रफ्तार क्रेटा कार को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस को देखकर कार सवारों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने बैरिकेडिंग लगाकर दोनों को मौके पर ही दबोच लिया। जब कार की गहन तलाशी ली गई, तो डैशबोर्ड और पिछली सीट के नीचे छिपाकर रखी गई प्लास्टिक की विशेष वैक्यूम-पैक्ड थैलियों में 500 ग्राम ओजी गांजा बरामद हुआ। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कम समय में अत्यधिक धन कमाने, लग्जरी लाइफस्टाइल जीने और अपने महंगे शौक पूरे करने के लिए नेपाल से इस प्रतिबंधित ड्रग की तस्करी कर रहे थे।
कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस बने आसान शिकार: 3000 रुपये प्रति ग्राम में बेचते थे पुड़िया
पुलिसिया तफ्तीश में इस रैकेट की बेहद खौफनाक कार्यप्रणाली का खुलासा हुआ है। सामान्य देशी गांजे की तुलना में कई गुना अधिक नशीला और महंगा होने के कारण 'ओजी गांजा' केवल चुनिंदा रईस तबके और बड़े शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं द्वारा ही खरीदा जाता है। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे नेपाल से थोक के भाव बड़ी मात्रा में गांजा उठाते थे और फिर उसे लखनऊ लाकर छोटी-छोटी पारदर्शी सीलबंद पुड़ियों (जिपलॉक पाउच) में पैक करते थे। इन छोटी पुड़ियों को वे प्रति ग्राम 2,500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक की अत्यधिक ऊंची कीमत पर बेचते थे।
आरोपियों का मुख्य फोकस नॉलेज पार्क, ग्रेटर नोएडा, नोएडा एक्सप्रेसवे और दिल्ली से सटे बड़े प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल यूनिवर्सिटीज, हॉस्टल्स और कोचिंग सेंटरों के आसपास होता था। वे सबसे पहले कुछ बिगड़ैल छात्रों से दोस्ती गांठते थे और उन्हें मुफ्त या रियायती दर पर इस गांजे की लत लगाते थे। एक बार जब छात्र इस जानलेवा नशे के दलदल में पूरी तरह फंस जाते थे, तो उनसे मनमाना दाम वसूला जाता था। नशीले पदार्थों की बिक्री से होने वाले भारी-भरकम मुनाफे को अमन सिंह और हरिविजय सिंह आपस में बराबर बांट लेते थे और इसी काली कमाई के दम पर महंगे होटलों में ठहरना, ब्रांडेड कपड़े पहनना और लग्जरी कारों में घूमना उनका रोज का शगल बन चुका था।
छह महीने से एनसीआर में सक्रिय था सिंडिकेट, लखनऊ में पहले से दर्ज हैं दर्जनभर संगीन मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड्स की छानबीन करने पर सामने आया है कि दोनों गिरफ्तार आरोपी कोई नौसिखिए अपराधी नहीं हैं, बल्कि उनका पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह पिछले छह महीनों के दौरान नेपाल से माल लाकर दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ के इलाकों में कई बड़ी खेपें सफलतापूर्वक खपा चुका था। आरोपी लखनऊ के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करते हुए सीधे ग्रेटर नोएडा पहुंचते थे, ताकि टोल प्लाजा और मुख्य मार्गों पर किसी चेकिंग टीम को लग्जरी कार देखकर शक न हो।
पुलिस द्वारा जुटाए गए आपराधिक रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी अमन सिंह के खिलाफ राजधानी लखनऊ के विभिन्न थानों में पहले से ही हत्या के प्रयास, मारपीट, जान से मारने की धमकी, रंगदारी और बलवा जैसी गंभीर धाराओं में 5 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, उसके साथी हरिविजय सिंह के खिलाफ भी लखनऊ के विकासनगर और अन्य थानों में मारपीट, उपद्रव और धमकी देने के 4 संगीन मामले दर्ज पाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पर एनडीपीएस एक्ट की कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। साथ ही, अब पुलिस की विशेष टीमें नेपाल बॉर्डर पर बैठे मुख्य सप्लायरों, कोरियर नेटवर्क और कॉलेज परिसरों के भीतर फैले उनके लोकल संपर्कों की कुंडली खंगालने में जुट गई हैं ताकि इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की जड़ें काटी जा सकें।