सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का तीन दिवसीय रूस दौरा संपन्न: आर्टिलरी आधुनिकीकरण और सैन्य सहयोग पर बनी बड़ी सहमति
वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और रूस के ऐतिहासिक रक्षा संबंध एक नए मुकाम पर पहुंच गए हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 18 सितंबर को अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक रूस यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस कूटनीतिक और सैन्य दौरे का प्राथमिक उद्देश्य दोनों देशों की थल सेनाओं के बीच संयुक्त परिचालन क्षमता का विकास, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण आदान-प्रदान, तोपखाना (आर्टिलरी) प्रणालियों का आधुनिकीकरण और युद्धक्षेत्र के व्यावहारिक अनुभवों को साझा करना रहा।
मॉस्को में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान भारतीय सेना प्रमुख ने रूसी संघ के उप रक्षा मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव समेत वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक युद्ध तकनीकों के परिप्रेक्ष्य में द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों की रूपरेखा तय की। इस द्विपक्षीय संवाद में रक्षा निर्माण, स्पेयर पार्ट्स की निरंतर आपूर्ति श्रृंखला और उभरती सैन्य प्रौद्योगिकियों में अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर सहमति बनी, जिससे दोनों सेनाओं के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को नया संबल मिला है।
सेंट पीटर्सबर्ग में आर्टिलरी अकादमी का दौरा और पीटर एंड पॉल किले पर पारंपरिक सम्मान
दौरे के दूसरे चरण में जनरल धीरज सेठ रूस की ऐतिहासिक सांस्कृतिक और सैन्य राजधानी सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे। वहां उन्होंने प्रतिष्ठित मिखाइलोव्स्काया मिलिट्री आर्टिलरी अकादमी का विस्तृत दौरा किया। इस दौरान भारतीय सेना प्रमुख ने अकादमी के वरिष्ठ संकाय सदस्यों, तकनीकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के साथ आर्टिलरी आधुनिकीकरण के नवीनतम तौर-तरीकों, सटीक मारक क्षमता वाले गाइडेड हथियारों और भविष्य की तोपखाना रणनीति पर विस्तृत तकनीकी संवाद किया।
सेंट पीटर्सबर्ग प्रवास के दौरान जनरल धीरज सेठ को रूस के ऐतिहासिक पीटर एंड पॉल किले में पारंपरिक औपचारिक तोप दागने (Noon Cannon Firing) का दुर्लभ और विशिष्ट सम्मान प्रदान किया गया, जो भारत और रूस के बीच गहरे सैन्य प्रोटोकॉल व सम्मान का प्रतीक है। इसके साथ ही सेना प्रमुख ने द्वितीय विश्व युद्ध के बलिदानियों की स्मृति में बने प्रसिद्ध 'टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर' (अज्ञात सैनिक का मकबरा) पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। यह औपचारिक सम्मान दोनों देशों के बीच दशकों पुराने भावनात्मक और सामरिक जुड़ाव को दर्शाता है।
आधुनिक युद्ध और तोपखाना आधुनिकीकरण के साझा सबक: दोनों सेनाओं का रोडमैप
आधुनिक युद्धक्षेत्र में आर्टिलरी, ड्रोन समन्वय और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका को देखते हुए जनरल सेठ की यह यात्रा भारतीय सेना के भविष्योन्मुखी सुधारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारतीय थल सेना वर्तमान में अपनी मारक क्षमता को डिजिटल, सटीक और लंबी दूरी तक प्रभावी बनाने के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान पर काम कर रही है। रूसी सैन्य संस्थानों के साथ परिचालन अनुभव साझा करने से भारतीय सेना को नई तकनीकी और सामरिक अंतर्दृष्टि प्राप्त होगी।
बैठक में दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेष बलों के साझा अभ्यास और सैन्य अकादमियों के बीच फैकल्टी एक्सचेंज को नई गति देने पर भी निर्णय लिया गया। इससे दोनों देशों के सैन्य कैडेट्स और वरिष्ठ अधिकारियों को एक-दूसरे के कमान नियंत्रण, रणनीति और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन को सूक्ष्मता से समझने का अवसर मिलेगा। पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान का यह नया ढांचा दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा।
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी और सैन्य कूटनीति के लिए दौरे के दीर्घकालिक मायने
जनरल धीरज सेठ की यह यात्रा केवल नियमित सैन्य शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र और संतुलित भारतीय विदेश नीति व सैन्य कूटनीति का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जारी दबाव के बावजूद भारत और रूस ने यह सिद्ध किया है कि उनका रक्षा सहयोग किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से परे और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा पर केंद्रित है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे से रक्षा उपकरणों के रखरखाव, संयुक्त अनुसंधान और भविष्य की रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को गति मिलेगी। सेना प्रमुख के इस सफल दौरे ने दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच अटूट विश्वास, संस्थागत संवाद और रणनीतिक स्वायत्तता की साझा प्रतिबद्धता को विश्व पटल पर एक बार फिर मजबूती से रेखांकित किया है।