गाजा में खत्म होगा खूनी संघर्ष? डोनाल्ड ट्रंप के ऐतिहासिक शांति समझौते से हमास ने छोड़े हथियार; इजराइल की वापसी और नए फिलस्तीनी शासन पर बड़ा ऐलान
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बीते लंबे समय से जारी खूनी संघर्ष, तबाही और भीषण मानवीय संकट के बीच गाजा पट्टी से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को की गई एक ऐतिहासिक घोषणा ने युद्ध की विभीषिका झेल रहे गाजा में स्थायी शांति और सुधार की एक नई उम्मीद जगा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, हाल ही में संपन्न हुए एक महत्वपूर्ण और व्यापक समझौते के तहत फिलस्तीनी संगठन हमास गाजा पट्टी में अपने सभी हथियार छोड़ने पर पूरी तरह राजी हो गया है। इसके साथ ही, इजरायली रक्षा बल (IDF) भी इस समझौते के तहत क्षेत्र से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटने के लिए सहमत हो गए हैं। इस सनसनीखेज और बड़े कूटनीतिक खुलासे ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर मध्य पूर्व के घटनाक्रम की ओर खींच लिया है, जहां पिछले कई महीनों से अनगिनत जिंदगियां तबाह हो चुकी हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का ऐतिहासिक ऐलान और गाजा शांति समझौता
इस बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक समझौते को अमली जामा पहनाने में 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) ने बेहद अहम और निर्णायक भूमिका निभाई है। आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विशेष पहल पर ही इस साल की शुरुआत में 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' ने औपचारिक रूप से अपना कामकाज शुरू किया था। वर्तमान में यह पूरा समझौता इसी समूह द्वारा तैयार किए गए 20-सूत्रीय गाजा शांति फॉर्मूले का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय पड़ाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस बड़ी सफलता की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि आज बोर्ड ऑफ पीस ने गाजा में हमास और अन्य सभी सशस्त्र समूहों के निशस्त्रीकरण के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हासिल कर लिया है, जो क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
बोर्ड ऑफ पीस और 20-सूत्रीय गाजा शांति फॉर्मूला
ट्रंप प्रशासन और मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए इस रोडमैप के तहत निशस्त्रीकरण की पूरी प्रक्रिया को बेहद सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। समझौते के पहले चरण के तहत, हमास और गाजा में सक्रिय अन्य सभी छोटे-बड़े सशस्त्र गुटों को अपने तमाम हथियार, गोला-बारूद और सैन्य उपकरण आधिकारिक रूप से सौंपने होंगे। जैसे-जैसे यह निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर आगे बढ़ेगी और पूरी होगी, ठीक उसी अनुपात में इजराइली रक्षा बल भी गाजा पट्टी के विभिन्न इलाकों से पीछे हटना शुरू कर देंगे। इसके अलावा, क्षेत्र में आम नागरिकों की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक नए और तटस्थ फिलस्तीनी पुलिस बल का गठन किया जाएगा, जो आगे चलकर पूरी कमान अपने हाथों में संभालेगा।
हमास का निशस्त्रीकरण और इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी
युद्ध के बाद के गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू चलाने के लिए इस शांति योजना के दूसरे चरण में एक बहुत बड़ा और ढांचागत कदम उठाया गया है। इसके तहत गाजा में शासन चलाने के लिए फिलस्तीनी विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों की एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा, जिसे 'नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा' (NCAG) का नाम दिया गया है। यह नवगठित समिति 'बोर्ड ऑफ पीस' के साथ मिलकर आपसी समन्वय से गाजा के युद्ध-ग्रस्त इलाकों के पुनर्निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास और आम जनता के कल्याण व राहत कार्यों को गति देगी। मध्यस्थों से जुड़े करीबी सूत्रों का यह भी कहना है कि इस व्यापक रोडमैप के तहत गाजा के भीतर मौजूद सभी गुप्त सुरंगों, हथियारों के बड़े डिपो और हथियार बनाने वाली अवैध फैक्ट्रियों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष की गुंजाइश न बचे।
नए फिलस्तीनी प्रशासन 'NCAG' के हाथ होगी कमान
गाजा में शांति स्थापना के इस जटिल और संवेदनशील समझौते को जमीन पर उतारने के लिए कई प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों ने दिन-रात एक कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सफल और कठिन बातचीत के लिए मिस्र, कतर और तुर्की जैसे अहम मध्यस्थ देशों का खुले तौर पर आभार व्यक्त किया है। इन देशों की खुफिया एजेंसियों और राजनयिकों ने पर्दे के पीछे रहकर हमास और इजराइल के बीच की दूरियों को पाटने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इन इस्लामिक और पश्चिमी देशों के साझा कूटनीतिक दबाव के कारण ही आखिरकार वह ऐतिहासिक पल आया है जब दोनों विरोधी पक्ष एक मंच पर आकर इस शांति समझौते के मसौदे पर विचार करने के लिए मजबूर हुए हैं।
मध्यस्थ देशों की अहम भूमिका और कूटनीतिक प्रयास
हालांकि इस समझौते की घोषणा को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है, फिर भी जमीनी स्तर पर अभी कई चुनौतियां और अनिश्चितताएं बाकी हैं। इस बड़ी घोषणा के बाद से इजराइल की सरकार की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक और सकारात्मक बयान जारी नहीं किया गया है। इजरायली खुफिया और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में जो मसौदा और शर्तें पेश की गई हैं, उससे तेल अवीव पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। इजराइल की सबसे बड़ी और स्पष्ट मांग यह है कि गाजा से हथियारों का शत-प्रतिशत और स्थाई सफाया होना चाहिए, और वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है। दूसरी ओर, हमास के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे मध्यस्थों के माध्यम से इस शांति रोडमैप के कुछ विशिष्ट बिंदुओं पर संशोधन और स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में समझौते के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।
इजराइल की प्रतिक्रिया और हमास का रुख: क्या अभी भी हैं चुनौतियां?
कुल मिलाकर देखा जाए तो, डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान ने मध्य पूर्व की सुलगती राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। यदि यह समझौता अपनी सभी शर्तों के साथ धरातल पर उतरने में सफल रहता है, तो दशकों से युद्ध, खून-खराबे और अविश्वास की आग में झुलस रहे गाजा के लोगों के लिए यह एक नए सवेरे की तरह होगा। हालांकि, इजराइल की आपत्तियों और हमास के आंतरिक संशोधनों के दावों के बीच इस डील की सफलता अभी भी पक्की नहीं कही जा सकती है। दुनिया भर के भू-राजनीतिक विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में हमास अपने हथियार डालने के लिए पूरी तरह तैयार होता है और क्या इजराइल अपनी सेना को वापस बुलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि यह शांति समझौता इतिहास के पन्नों में एक स्थायी शांति का दस्तावेज बनेगा या फिर यह सिर्फ बयानों तक ही सिमट कर रह जाएगा।