'मैं बैलेट पेपर पर होता तो एकतरफा जीतते चुनाव': US मिड-टर्म में रिपब्लिकन पार्टी की करारी शिकस्त पर बोले डोनाल्ड ट्रंप
वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections) में डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पहली सीधी और आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate)—पर डेमोक्रेट्स का पूर्ण नियंत्रण स्थापित होने से रिपब्लिकन खेमे में जहां हड़कंप मचा हुआ है, वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरी हार से खुद को अलग करते हुए अपनी लोकप्रियता का दावा किया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर दो-टूक शब्दों में कहा कि रिपब्लिकन पार्टी की इस पराजय की सबसे बड़ी वजह यह रही कि वे खुद बैलेट पेपर पर मौजूद नहीं थे। यदि उनका नाम चुनावी मैदान में होता, तो यह मुकाबला रिपब्लिकन के पक्ष में एकतरफा और प्रचंड जीत (Landslide Victory) में बदल जाता।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का बयान: 'मैं बैलेट पर नहीं था, वरना प्रचंड जीत दर्ज करते'
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के आधिकारिक रुझान और परिणाम स्पष्ट होते ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक ट्रुथ सोशल हैंडल पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा:
"मैं बैलेट पेपर पर नहीं था और यदि मैं होता, तो हम प्रचंड बहुमत (Landslide) के साथ जीत दर्ज करते! इस मामले पर ध्यान देने के लिए आप सभी का धन्यवाद।"
ट्रंप ने अपने संक्षिप्त लेकिन तीखे संदेश में स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि जनता ने उनकी नीतियों को नहीं, बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के स्थानीय उम्मीदवारों के लचर प्रदर्शन को नकारा है। इसके तुरंत बाद एक अन्य पोस्ट में ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि वे अब एक 'राजनीतिक विश्लेषक' (Political Pundit) की भूमिका निभाने जा रहे हैं और देश को बताएंगे कि कौन सा उम्मीदवार क्यों जीता और कौन सा उम्मीदवार क्यों हारा।
फॉक्स न्यूज से बातचीत: 'उम्मीदवारों को पसंद नहीं कर रहे थे मतदाता'
फॉक्स न्यूज (Fox News) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रंप ने पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन और उनके अभियान की कमजोरियों को हार का मुख्य कारण ठहराया। ट्रंप ने कहा कि कई राज्यों में मतदाता रिपब्लिकन उम्मीदवारों के व्यक्तित्व और उनकी रणनीति को पसंद नहीं कर रहे थे।
ट्रंप ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि डेमोक्रेट्स ने जमीन पर संगठित होकर बेहतर मुकाबला किया और वे लंबे समय से इस चुनाव के लिए संघर्ष कर रहे थे। हालांकि, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने राष्ट्रपति का बचाव करते हुए कहा कि पिछले एक महीने में ट्रंप ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए लगभग हर दिन बड़ी रैलियां कीं और पार्टी के आधार को एकजुट करने में खुद उम्मीदवारों से भी ज्यादा पसीना बहाया।
'वीटो' लिखी लाल टोपी की तस्वीर साझा कर दी चेतावनी: 'सहयोग करें वरना हर बिल पर लगेगा वीटो'
कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने के बाद अब राष्ट्रपति ट्रंप के विधायी एजेंडे पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। इस राजनीतिक समीकरण पर ट्रंप ने डेमोक्रेटिक नेतृत्व को कड़ा संदेश देते हुए अपनी संवैधानिक वीटो शक्तियों (Veto Power) की याद दिलाई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर 'MAGA' स्टाइल की एक लाल रंग की बेसबॉल टोपी की तस्वीर साझा की, जिस पर सफेद अक्षरों में बड़े-बड़े शब्दों में 'VETO' लिखा हुआ था।
ट्रंप ने स्पष्ट किया:
"मेरे पास पूर्ण वीटो अधिकार है, और मुझे पूरा विश्वास है कि हम मिलकर काम करेंगे। मुझे लगता है कि वे (डेमोक्रेट्स) मेरे साथ सहयोग करना चाहेंगे, क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं उनके हर बिल पर वीटो लगा दूंगा, और वे निश्चित रूप से ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे।"
ट्रंप ने यह भी कहा कि वे कुछ साझा मुद्दों—जैसे बुनियादी ढांचा और व्यापार—पर डेमोक्रेट्स के साथ काम करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते विपक्ष उनके मुख्य एजेंडे को रोकने की कोशिश न करे।
व्हाइट हाउस का माहौल 'आक्रामक': आगे के दो वर्षों के लिए संघर्ष के संकेत
मध्यावधि चुनाव के झटके के बावजूद व्हाइट हाउस के आंतरिक हलकों से सामने आई खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति और उनका मुख्य स्टाफ किसी भी तरह के दबाव में नहीं है। न्यूज़नेशन (NewsNation) की व्हाइट हाउस संवाददाता केली मेयर के अनुसार, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इस समय व्हाइट हाउस के भीतर का माहौल पूरी तरह 'डिफायंट' (आक्रामक और लड़ने को तैयार) है।
अधिकारी ने कहा कि चुनावी नतीजे चाहे जो भी रहे हों, कट्टर वामपंथियों और विपक्षी नीतियों का सामना करने का राष्ट्रपति का संकल्प और अधिक मजबूत हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के नियंत्रण के बाद अब ट्रंप प्रशासन को सबपोना (संसदीय समन), जांच समितियों की पूछताछ और संघीय बजट पर भारी खींचतान का सामना करना पड़ेगा।
भारतीय मूल के सांसदों ने फिर लहराया परचम, कुछ को लगा झटका
इस मध्यावधि चुनाव में जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की 'ब्लू वेव' का दबदबा रहा, वहीं भारतीय-अमेरिकी राजनेताओं का प्रदर्शन भी सुर्खियों में रहा:
-
कैलिफोर्निया के तीसरे संसदीय क्षेत्र से डेमोक्रेटिक सांसद अमी बेरा (Ami Bera) ने प्रतिनिधि सभा के लिए लगातार अपनी सीट बरकरार रखी।
-
सिलिकॉन वैली का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना (Ro Khanna) ने कैलिफोर्निया के 17वें जिले से शानदार जीत दर्ज की।
-
इसके अलावा भारतीय मूल के सुहास सुब्रमण्यम और अरुणा मिलर जैसे प्रमुख नेताओं ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत का परचम लहराया।
-
वहीं दूसरी ओर, रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े कुछ चर्चित चेहरों को कांटे के मुकाबले में हार का मुंह देखना पड़ा।
'डिवाइडेड गवर्नमेंट' के दौर में कैसे काम करेगा ट्रंप प्रशासन?
कांग्रेस के दोनों सदनों पर विपक्ष का कब्जा होने के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कानून पारित कराने के विधायी विकल्प बेहद सीमित हो गए हैं। अपने शेष दो वर्षों के कार्यकाल में ट्रंप को अपने नीतिगत निर्णयों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों, टैरिफ नीतियों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से 'कार्यकारी आदेशों' (Executive Orders) और 'प्रेसिडेंशियल वीटो' का ही सहारा लेना पड़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह ताजा बयान यह संकेत देता है कि वे रक्षात्मक मुद्रा अपनाने के बजाय 2028 के अगले राष्ट्रपति चुनावों को ध्यान में रखकर खुद को 'जनता का निर्विवाद नेता' साबित करने की आक्रामक रणनीति पर ही कायम रहेंगे।