'हमें आजमाने की भूल मत करना', इजरायली चुनाव में दखल की कोशिश पर नेतन्याहू की ईरान को दो टूक चेतावनी
पश्चिम एशिया के सबसे संवेदनशील केंद्र इजरायल में होने जा रहे आम चुनावों से ठीक पहले सामरिक और कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संबोधन जारी करते हुए ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठनों को सीधी चेतावनी दी है कि वे देश की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की जरा सी भी हिमाकत न करें। यरुशलम स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी इस आधिकारिक वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने दावा किया कि उनके पास पुख्ता खुफिया इनपुट्स हैं, जिनके अनुसार ईरान समर्थित नेटवर्क मंगलवार को होने वाले मतदान के दिन अशांति फैलाने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए बड़े हमले की साजिश रच रहे हैं।
इस खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने तेहरान की हुकूमत को कड़े शब्दों में आगाह किया कि वे इजरायल की रक्षा क्षमता को परखने की गलती कतई न करें। उन्होंने कहा कि यदि दुश्मन ने हमारी चुनावी संप्रभुता को चुनौती देने का प्रयास किया, तो उसे इसकी ऐसी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि इजरायली रक्षा बल (IDF) सीमा के भीतर और सीमा पार दोनों मोर्चों पर पूरी तरह मुस्तैद हैं तथा सेना रक्षात्मक सुरक्षा घेरे के साथ-साथ अत्यंत आक्रामक जवाबी अभियानों के लिए भी 24 घंटे हाई अलर्ट मोड पर है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित किया पूरा चुनावी प्रचार
मतदान से ठीक पहले प्रचार के अंतिम और निर्णायक दौर में बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पूरी राजनीतिक रणनीति को राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय अस्तित्व और सैन्य दृढ़ता के चारों ओर केंद्रित कर दिया है। घरेलू राजनीति में कई प्रकार की चुनौतियों और कानूनी मुकदमों के बावजूद वे मतदाताओं के बीच यह स्पष्ट संदेश पहुंचाने में जुटे हैं कि वर्तमान में ईरान के परमाणु और मिसाइल खतरे से देश की रक्षा करने का अनुभव और साहस केवल उनके ही नेतृत्व में मौजूद है। वे खुद को एक ऐसे अदम्य नेता के रूप में पेश कर रहे हैं जिसके बिना इजरायल की सीमाएं असुरक्षित हो सकती हैं।
अपने इस रणनीतिक संदेश को मजबूती देने के लिए नेतन्याहू ने इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के सामरिक ठिकानों पर चलाए गए संयुक्त अभियानों का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने मतदाताओं को याद दिलाया कि उनकी सरकार ने हमेशा पहले प्रहार करने की नीति अपनाई है। इतना ही नहीं, हाल के भाषणों में उन्होंने यह साहसिक दावा भी किया था कि उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और सेना को ईरान के मौजूदा धार्मिक शासन की जड़ें हिलाने और उसे उखाड़ फेंकने के लिए रणनीतिक योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया है। कुछ दिन पूर्व एक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान के हैंगर के सामने खड़े होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन वार्ता का दृश्य साझा करते हुए नेतन्याहू ने यह स्पष्ट किया था कि वाशिंगटन और तेल अवीव मिलकर इस अधूरे मिशन को हर हाल में पूरा करेंगे।
तेल अवीव पर परमाणु हमले की एआई तस्वीर ने बढ़ाई हलचल, विपक्ष ने उठाए सवाल
चुनावी अभियान को आक्रामक मोड़ देते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक विवादित और रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर साझा की, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया था। इस तस्वीर में इजरायल की आर्थिक राजधानी तेल अवीव के गगनचुंबी स्काईलाइन के ठीक ऊपर परमाणु विस्फोट से पैदा होने वाला एक विशाल मशरूम क्लाउड उठता हुआ दिखाया गया था। इस भयानक दृश्य के साथ नेतन्याहू ने एक प्रमुख दक्षिणपंथी रक्षा विश्लेषक के विचारों को उद्धृत करते हुए तर्क दिया कि तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षा इजरायल के अस्तित्व के लिए तात्कालिक और सबसे बड़ा खतरा है।
नेतन्याहू ने यह दलील दी कि मौजूदा चुनावी मौसम में महंगाई, सामाजिक नीतियां और आंतरिक विवाद जैसे सभी मुद्दे तब तक पूरी तरह बेमानी हैं जब तक देश की संप्रभुता और जनता के जीवन पर परमाणु विनाश का साया मंडरा रहा है। इस डरावनी छवि और उत्तेजक बयानों ने इजरायल के चुनावी परिदृश्य को अत्यधिक ध्रुवीकृत कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान के ठीक 48 घंटे पहले सुरक्षा का भय और परमाणु टकराव का मुद्दा उछालकर नेतन्याहू अनिर्णायक मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का अंतिम दांव चल रहे हैं।
मंगलवार के मतदान पर टिकी दुनिया की निगाहें, तेहरान और तेल अवीव के बीच टकराव की आशंका
मंगलवार को होने जा रहे इस आम चुनाव के नतीजे न केवल इजरायल के घरेलू राजनीतिक समीकरणों को तय करेंगे, बल्कि इसका सीधा असर पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ने वाला है। यदि नेतन्याहू सत्ता में बने रहते हैं, तो ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य मुद्रा और अधिक आक्रामक होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सीधा सैन्य टकराव भड़क सकता है। वहीं, अगर विपक्षी खेमा बढ़त हासिल करता है, तो भी सुरक्षा नीतियों में बुनियादी बदलाव की उम्मीद कम ही नजर आती है क्योंकि ईरान की परमाणु क्षमताओं को लेकर इजरायल की सभी पार्टियां एकमत हैं।
फिलहाल देश भर के संवेदनशील मतदान केंद्रों, सीमाओं और हवाई अड्डों पर वायु रक्षा प्रणालियों को तैनात कर दिया गया है। आयरन डोम और डेविड्स स्लिंग मिसाइल डिफेंस बैटरी को किसी भी संभावित रॉकेट या ड्रोन घुसपैठ को नाकाम करने के लिए सक्रिय रखा गया है। आम नागरिक जहां एक तरफ नई सरकार चुनने के लिए मतदान की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सीमा पार से आने वाले किसी भी आसमानी खतरे को लेकर पूरे देश में तनावपूर्ण शांति का माहौल बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि मंगलवार को जनता का फैसला किस दिशा में जाता है और क्या तेहरान नेतन्याहू की इस सीधी चेतावनी पर कोई सैन्य प्रतिक्रिया व्यक्त करता है या नहीं।