अमेरिका के 'रूस बिल' पर सीनेटर रोजर विकर का बड़ा हमला, भारत और चीन को ठहराया 'असली दोषी'
रूस से कच्चा तेल और गैस आयात करने वाले देशों पर शिकंजा कसने के लिए अमेरिकी संसद ने एक बेहद कड़ा और विवादित प्रतिबंध विधेयक प्रक्रियागत वोटिंग में पास कर दिया है। इस बिल के प्रावधानों के तहत, रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों के अमेरिकी बाजार में बिकने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है। सीनेट में इस प्रस्ताव पर हुए क्लोजर मोशन में इसे 86-12 के भारी बहुमत से पारित किया गया।
भारत और चीन पर सीधा निशाना
दक्षिण कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की स्मृति में लाए गए 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' पर चर्चा के दौरान अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर ने खुलकर बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस कानून का मुख्य निशाना चीन और भारत हैं। सीनेटर विकर ने दोनों देशों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, "आइए बिल्कुल स्पष्ट बात करें। इस पूरे मामले में चीन और भारत ही मुख्य कसूरवार हैं। वे रूस का अधिकांश तेल और गैस खरीद रहे हैं, जिससे मॉस्को की जंग की मशीन को आर्थिक ईंधन मिल रहा है।"
भारत का राष्ट्रीय हित और वैश्विक ऊर्जा बाजार
भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों और विदेश मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के एकतरफा प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा बाजार को और अधिक अस्थिर कर सकते हैं। भारत ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए हमेशा यह दोहराया है कि रूस से तेल की खरीदारी पूरी तरह से देश के राष्ट्रीय हितों और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि इस कड़े अमेरिकी विधेयक के पूर्ण कानून बनने पर भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर इसका क्या असर पड़ता है।