सर्बिया में ऐतिहासिक सियासी भूचाल: पुतिन समर्थक राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने मानी हार
बाल्कन प्रायद्वीप के प्रमुख देश सर्बिया के राजनीतिक परिदृश्य में एक अभूतपूर्व और युगांतरकारी परिवर्तन दर्ज किया गया है। लंबे अरसे से देश की सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाले और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के घनिष्ठ रणनीतिक सहयोगी माने जाने वाले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने संसदीय चुनावों में अपनी पार्टी की करारी शिकस्त को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर लिया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी शुरुआती आधिकारिक रुझानों और मतगणना के ठोस आंकड़ों के सामने आने के तुरंत बाद राष्ट्रपति वुसिक ने राजधानी बेलग्रेड से राष्ट्र को संबोधित किया। बेहद गंभीर मुद्रा में उन्होंने घोषणा की कि युवाओं और छात्रों के नेतृत्व वाले विपक्षी राजनीतिक गठबंधन 'स्टूडेंट लिस्ट' ने संसद में स्पष्ट और निर्णायक पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है और वह बिना किसी बाधा के देश की अगली लोकतांत्रिक सरकार का गठन करने जा रही है।
राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने अपने संबोधन में किसी भी प्रकार का राजनीतिक संशय न छोड़ते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतपेटियों से निकले रुझानों ने पूरी तस्वीर साफ कर दी है और सत्ताधारी दल यह चुनाव हार चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि विपक्षी खेमे ने एक ऐसी निर्णायक जीत दर्ज की है जिसे नकारा नहीं जा सकता। संसद में सीटों के संभावित और अनुमानित गणित पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 'स्टूडेंट लिस्ट' संख्या बल के मामले में इतनी मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है कि उसे अगली कैबिनेट बनाने के लिए किसी भी तरह की राजनीतिक सौदेबाजी या जोड़-तोड़ की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सत्ताधारी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी का किला ध्वस्त, जानिए संसद की सीटों का पूरा समीकरण
इस चुनाव परिणाम ने सर्बिया की राजनीति में एक दशक से चले आ रहे एकछत्र दबदबे को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अलेक्जेंडर वुसिक की दक्षिणपंथी 'सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' (SNS) सत्ता को बरकरार रखने में नाकाम साबित हुई है। वुसिक ने स्वयं राष्ट्रीय मीडिया के समक्ष सीटों का अनुमानित ब्योरा पेश करते हुए बताया कि 'स्टूडेंट लिस्ट' को देश की संसद में 135 से 140 सीटें मिलने जा रही हैं, जो 250 सदस्यीय सदन में सरकार गठन के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े से कहीं अधिक है। इसके विपरीत, कई वर्षों तक पूर्ण नियंत्रण में रहने वाली सत्ताधारी एसएनएस पार्टी महज 105 सीटों के आसपास सिमटती हुई दिखाई दे रही है।
संसद के नए ढांचे पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक जनादेश के बाद संसद में मुख्य रूप से दो बड़े राजनीतिक ध्रुव ही उपस्थित रहेंगे। बाकी सभी पारंपरिक दल हाशिए पर चले गए हैं और केवल कुछ क्षेत्रीय व जातीय अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि ही सदन तक पहुंचने में सफल रहे हैं। इनमें 'अलायंस ऑफ वोज्वोडिना हंगेरियन' ने तीन संसदीय सीटों पर सफलता प्राप्त की है, जबकि अल्बानियाई अल्पसंख्यक समुदाय को एक सीट मिली है और संदजाक डेमोक्रेटिक एक्शन पार्टी (SDA) को भी एक सीट हासिल होने का अनुमान है। अन्य तमाम छोटे दलों का संसद से पूरी तरह सफाया हो गया है।
52 प्रतिशत वोट शेयर के साथ ऐतिहासिक विजय, जनता ने व्यवस्था परिवर्तन पर लगाई मुहर
यूरोपीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस आम चुनाव में जनता का आक्रोश मतों के विशाल अंतर के रूप में सामने आया है। यूरो न्यूज की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, मतगणना में विजयी विपक्षी दल 'स्टूडेंट लिस्ट' को देश भर से लगभग 22 लाख यानी 2.2 मिलियन नागरिकों का ऐतिहासिक समर्थन प्राप्त हुआ, जो कुल पड़े वैध मतों का 52 प्रतिशत से अधिक बैठता है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक तंत्र और भारी भरकम संसाधनों के बावजूद सत्ताधारी 'सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' केवल 17.2 लाख यानी 1.72 मिलियन वोट ही जुटा सकी, जिसका कुल वोट प्रतिशत गिरकर 32.3 प्रतिशत पर आ गया।
लगभग 20 प्रतिशत के इस भारी मत अंतर ने बाल्कन मामलों के विशेषज्ञों को भी आश्चर्यचकित कर दिया है। सीएनएन की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस बार के संसदीय चुनावों में देश भर में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया था। चुनावी रैलियों के दौरान राजनीतिक तनाव अपने चरम पर था, जहां एक तरफ राज्य की पूरी मशीनरी, सरकारी मीडिया और दक्षिणपंथी तंत्र का समर्थन हासिल करने वाले अलेक्जेंडर वुसिक थे, तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालयों से उपजा छात्रों और प्रबुद्ध युवाओं का वह समूह था जिसने जनता की बुनियादी समस्याओं को सीधे सत्ता से जोड़ दिया। 'स्टूडेंट लिस्ट' ने देश में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार, मीडिया पर कड़े नियंत्रण, भाई-भतीजावाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किए जाने के गंभीर आरोपों को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया था, जिसे सर्बिया के आम नागरिकों का व्यापक और अटूट समर्थन हासिल हुआ।
यूरोपीय संघ ने किया स्वागत, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा- सर्बिया के यूरोपीय भविष्य के लिए तैयार
सर्बिया के इस बड़े सियासी बदलाव की गूंज पूरे यूरोप और पश्चिमी कूटनीतिक हलकों में तेजी से सुनाई देने लगी है। पुतिन समर्थक नेता की इस अप्रत्याशित चुनावी हार को रूस की विदेश नीति के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध के दौर में भी वुसिक सरकार ने मॉस्को के साथ अपने प्रगाढ़ रिश्ते बनाए रखे थे और पश्चिमी प्रतिबंधों को लागू करने से परहेज किया था। 'स्टूडेंट लिस्ट' की इस ऐतिहासिक विजय पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने तुरंत औपचारिक प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी नेतृत्व को बधाई संदेश भेजा।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यूरोपीय संघ सर्बिया की जनता के इस लोकतांत्रिक फैसले का पूरे दिल से सम्मान और स्वागत करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्रुसेल्स नई बनने वाली सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तत्पर है, ताकि सर्बिया में संस्थागत सुधारों को गति दी जा सके, कानून के शासन को मजबूत किया जा सके और यूरोपीय संघ में सर्बिया के पूर्ण प्रवेश के मार्ग को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। छात्रों द्वारा शुरू किया गया यह आंदोलन अब बाल्कन प्रायद्वीप को एक नई भू-राजनीतिक दिशा देने की दहलीज पर खड़ा है, जिससे पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक समीकरणों का एक नया दौर शुरू होना तय माना जा रहा है।