इजरायल में नेतन्याहू के सियासी भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा, 2019 के बाद छठे आम चुनाव के लिए मतदान जारी

इजरायल में नेतन्याहू के सियासी भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा, 2019 के बाद छठे आम चुनाव के लिए मतदान जारी

इजरायल में राजनीतिक स्थिरता और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भविष्य को लेकर देश भर में 26वीं नेसेट (संसद) के 120 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। 2019 से 2022 के बीच राजनीतिक गतिरोध के चलते पांच स्नैप चुनाव देख चुके इजरायल के लिए 2019 के बाद से यह छठा आम चुनाव है। देश के 73 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाता 6,200 से ज्यादा मतदान केंद्रों पर वोट डाल रहे हैं। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही भारी भीड़ देखने को मिली है और शुरुआती मतदान प्रतिशत ने दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

यरुशलम में अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ मतदान करने पहुंचे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे देश के लिए एक "निर्णायक और भाग्यशाली क्षण" बताया और नागरिकों से अपने घरों से निकलकर बढ़-चढ़कर मतदान करने की अपील की।

7 अक्टूबर के बाद पहला राष्ट्रीय जनमत संग्रह: क्या हैं मुख्य चुनावी मुद्दे?

यह चुनाव इजरायल के हालिया इतिहास का सबसे संवेदनशील और निर्णायक मुकाबला माना जा रहा है:

  • सुरक्षा चूक और युद्ध नीति: 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए हमलों के बाद यह पहला आम चुनाव है। विपक्षी खेमा लगातार नेतन्याहू सरकार पर खुफिया और रणनीतिक नाकामी का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच आयोग के गठन की मांग कर रहा है।

  • हारेदी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) सैन्य भर्ती: सुप्रीम कोर्ट द्वारा धार्मिक छात्रों को सैन्य सेवा से दी गई छूट को खत्म करने के आदेश के बाद धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष धड़ों के बीच उपजा टकराव इस चुनाव का सबसे ज्वलंत आंतरिक मुद्दा बन चुका है।

  • न्यायिक सुधार विवाद और अंतरराष्ट्रीय अलगाव: सरकार द्वारा न्यायपालिका के अधिकारों को सीमित करने के प्रयास और गाजा संघर्ष के चलते बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव को लेकर जनता में गहरा विभाजन है।

कांटे की टक्कर: लिकुड बनाम बिखरा हुआ विपक्ष

इजरायल की आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation) में किसी भी दल को संसद में प्रवेश के लिए कम से कम 3.25% वोट थ्रेशोल्ड पार करना अनिवार्य होता है। सरकार बनाने के लिए 120 में से 61 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए होता है, जिसे आज तक इजरायल के इतिहास में कोई अकेली पार्टी हासिल नहीं कर सकी है।

  • नेतन्याहू का गठबंधन (लिकुड व सहयोगी): ओपिनियन पोल्स के अनुसार नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़े एकल दल के रूप में उभर सकती है, लेकिन उनके पारंपरिक धुर-दक्षिणपंथी और धार्मिक सहयोगियों (इतामार बेन-ग्विर, बेजलेल स्मोट्रिच और शास) के साथ मिलकर 61 सीटों का स्पष्ट बहुमत पाना बेहद चुनौतीपूर्ण दिख रहा है।

  • विपक्षी धड़ा: पूर्व सैन्य प्रमुख गादी इसनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की नई पहलकदमी विपक्ष की ओर से नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेश कर रही है। बेनी गैंट्ज़, येर गोलन (द डेमोक्रेट्स) और अविग्डोर लिबरमैन की पार्टियां भी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

सरकार गठन में फंसा पेच: क्या फिर बनेगी त्रिशंकु संसद?

चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों और विश्लेषकों का मानना है कि न तो मौजूदा सत्तारूढ़ गठबंधन को और न ही विपक्षी ब्लॉक को अपने दम पर आसानी से 61 सीटों का स्पष्ट जनादेश मिलता दिख रहा है। अरब दल (जॉइंट लिस्ट और राम) और छोटे दल अगर थ्रेशोल्ड पार कर जाते हैं, तो वे 'किंगमेकर' की भूमिका में आ सकते हैं।

मतदान समाप्त होने के बाद देर रात एग्जिट पोल्स (Exit Polls) के आंकड़े सामने आएंगे, जबकि आधिकारिक मतगणना के बाद राष्ट्रपति द्वारा सरकार बनाने के लिए सबसे मजबूत नेता को आमंत्रित किया जाएगा। यदि कोई भी पक्ष बहुमत का गठबंधन नहीं बना पाता, तो इजरायल एक बार फिर उसी राजनीतिक अनिश्चितता और गठबंधन के अंतहीन दौर में धकेल दिया जा सकता है, जिससे वह पिछले कई वर्षों से जूझता रहा है।