लूला को हराने और बोल्सोनारो परिवार की ताजपोशी के लिए US अधिकारियों का खुफिया खेल बेनकाब

लूला को हराने और बोल्सोनारो परिवार की ताजपोशी के लिए US अधिकारियों का खुफिया खेल बेनकाब

लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश ब्राजील में चल रहे राष्ट्रपति चुनाव के बीच एक बेहद सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक खुलासा सामने आया है। अमेरिकी विदेश विभाग के दो अति वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगा है कि उन्होंने ब्राजील के दक्षिणपंथी बोल्सोनारो परिवार को दोबारा सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाने के लिए एक गुप्त, सुनियोजित और आक्रामक अभियान चलाया। वर्तमान और पूर्व 10 अमेरिकी अधिकारियों के प्रत्यक्ष हवाले से सामने आई इस रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर ब्रासीलिया तक के कूटनीतिक गलियारों में भारी भूचाल ला दिया है। इन अधिकारियों का दावा है कि विदेश विभाग के भीतर बैठकर तैयार किए गए इस गोपनीय मिशन का सीधा मकसद आर्थिक पाबंदियों, दंडात्मक प्रतिबंधों और आक्रामक विदेश नीति के हथकंडों का इस्तेमाल कर मौजूदा वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की सत्ता पर पकड़ को कमजोर करना था, ताकि चुनावी पलड़ा दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के पक्ष में झुकाया जा सके।

मामले की गहराई से पड़ताल करने वाले सूत्रों का कहना है कि यह अभियान केवल सामान्य राजनयिक प्राथमिकताओं तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तहत ब्राजील की आंतरिक राजनीति, उसकी संप्रभु न्यायिक प्रणाली और चुनावी संतुलन को सीधा प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश की गई। इस गुप्त रणनीति के तहत अमेरिकी विदेश नीति के कूटनीतिक तंत्र को इस प्रकार संचालित किया जा रहा था कि ब्राजील की जनता के बीच लूला सरकार की छवि एक विफल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ी व्यवस्था के रूप में उभरे। हालांकि, आधिकारिक रिकॉर्ड पर अभी तक यह पुष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि इस पूरे अभियान को सीधे व्हाइट हाउस का लिखित अनुमोदन प्राप्त था या विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसके लिए कोई स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के करीबी मित्र रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक मंचों से सीधे तौर पर किसी ब्राजीलियाई प्रत्याशी के नाम का औपचारिक ऐलान करने से परहेज किया है, जिससे यह पूरा घटनाक्रम पर्दे के पीछे रची गई एक गहरी कूटनीतिक साजिश का रूप लेता दिख रहा है।

अभियान के कर्ताधर्ता: डैरेन बीटी और रिकार्डो पीटा की रणनीतिक तिकड़म

इस विवादित और अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के केंद्र में अमेरिकी विदेश विभाग के दो प्रमुख रणनीतिकार डैरेन बीटी और रिकार्डो पीटा के नाम सामने आए हैं। डैरेन बीटी पश्चिमी गोलार्ध मामलों के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में सीधे तौर पर ब्राजील से जुड़ी अमेरिकी नीति की निगरानी कर रहे थे। बीटी का ट्रैक रिकॉर्ड पहले से ही विवादों से घिरा रहा है; उन्हें साल 2018 में व्हाइट हाउस के भाषण लेखक (स्पीच राइटर) पद से अचानक हटा दिया गया था। दूसरी ओर, रिकार्डो पीटा को इस वर्ष पदोन्नत कर उत्तरी अमेरिका के उप-सहायक सचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इन दोनों अधिकारियों ने अपनी प्रशासनिक पहुंच और नीतिगत प्रभाव का लाभ उठाकर अमेरिकी राजनयिकों के बीच यह स्पष्ट संदेश प्रसारित करना शुरू कर दिया कि वाशिंगटन का प्राथमिक रणनीतिक उद्देश्य किसी भी कीमत पर बोल्सोनारो परिवार को ब्रासीलिया के राष्ट्रपति महल में पुनः स्थापित करना है।

प्रारंभिक चरण में यह नीति पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को केंद्र में रखकर बनाई गई थी। वर्ष 2022 के चुनाव में लूला डा सिल्वा से मिली शिकस्त के बाद जायर बोल्सोनारो पर देश में लोकतांत्रिक तख्तापलट की हिंसक साजिश रचने के संगीन आरोप लगे थे, जिसके चलते ब्राजील की चुनावी अदालत ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद सितंबर 2025 में जब ब्राजील की स्वतंत्र न्यायपालिका ने पूर्व राष्ट्रपति को तख्तापलट के षड्यंत्र में दोषी करार देते हुए 27 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, तो बीटी और पीटा की इस जोड़ी ने अपनी रणनीति बदलते हुए पूरा समर्थन जायर के सबसे बड़े बेटे सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो की ओर मोड़ दिया। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इन दोनों अधिकारियों ने ब्राजील स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों को कड़े आंतरिक निर्देश जारी किए थे कि वे ब्राजील के किसी भी अन्य मध्यममार्गी या उदारवादी दक्षिणपंथी उम्मीदवार से कोई बातचीत न करें और पूरी शक्ति केवल फ्लावियो के इर्द-गिर्द केंद्रित रखी जाए।

लूला को कमजोर करने के लिए गैंग्स पर आतंकी ठप्पा और सुप्रीम कोर्ट जज पर प्रतिबंध

राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की सरकार को घेरने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ब्राजील को सुरक्षा संकट से घिरा साबित करने के लिए अधिकारियों ने कई विवादास्पद हथकंडे अपनाए। इसके तहत ब्राजील के दो सबसे बड़े और कुख्यात आपराधिक सिंडिकेट्स—प्रिमेइरो कोमांडो दा कैपिटल (PCC) और कोमांडो वर्मेलो (CV)—को अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा औपचारिक रूप से विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित कराने के लिए भारी दबाव बनाया गया। ऐसा होने से ब्राजील की अर्थव्यवस्था और बैंकिंग प्रणाली पर गंभीर वित्तीय प्रतिबंधों का खतरा मंडराने लगता, जिसका सीधा ठीकरा लूला प्रशासन की कानून-व्यवस्था नीति पर फोड़ा जाना तय था।

इसके साथ ही, इस गुप्त अभियान का सबसे आक्रामक प्रहार ब्राजील की न्यायपालिका पर किया गया। अधिकारियों ने जायर बोल्सोनारो के खिलाफ तख्तापलट और लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमले की अदालती जांच का नेतृत्व करने वाले ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के शक्तिशाली जज एलेक्जेंडर डी मोरेस को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने की पुरजोर पैरवी की। डैरेन बीटी ने अपनी तथाकथित 'फ्री स्पीच डिप्लोमेसी' के विचार को आगे बढ़ाते हुए दलील दी कि अमेरिका को उन सभी विदेशी संस्थाओं और न्यायिक अधिकारियों को दंडित करना चाहिए जो दक्षिणपंथी विचारों और ऑनलाइन पोस्ट्स पर कानूनी कार्रवाई करते हैं। वाशिंगटन के इस खेमे ने आरोप लगाया कि जज मोरेस ने भड़काऊ राजनीतिक पोस्ट करने वालों को जेल भेजकर और ब्राजील में काम कर रहे अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़े कानूनी दायरे में लाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किया है।

50% टैरिफ का दांव पड़ा उलटा: अमेरिकी दबाव से ब्राजील में और मजबूत हुए लूला

इस कूटनीतिक दखलंदाजी ने तब अत्यंत आक्रामक मोड़ ले लिया जब साल 2025 में बोल्सोनारो परिवार ने वाशिंगटन में सक्रिय लॉबिंग फर्मों के जरिए जज मोरेस और ब्राजील की न्यायपालिका पर अमेरिकी मानवाधिकार कानून के तहत प्रतिबंध लगवाने के लिए पुरजोर लॉबिंग की। इस लॉबिंग के दबाव में जुलाई 2025 में अमेरिकी प्रशासन ने चौंकाने वाले कदम उठाते हुए जस्टिस अलेक्जेंड्रे डी मोरेस पर कड़े व्यक्तिगत प्रतिबंध थोप दिए, ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट के आठ शीर्ष न्यायाधीशों के अमेरिकी वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए और ब्राजील से अमेरिका निर्यात होने वाले तमाम सामानों पर भारी-भरकम 50 प्रतिशत का दंडात्मक टैरिफ लागू कर दिया।

हालांकि, कूटनीति का यह क्रूर दांव अमेरिका और बोल्सोनारो परिवार दोनों के लिए पूरी तरह उलटा साबित हुआ। लैटिन अमेरिकी मामलों के विश्लेषकों के अनुसार, इस कठोर आर्थिक और न्यायिक दबाव से ब्राजील की अदालतों में बोल्सोनारो के खिलाफ चल रहा मुकदमा रुकने के बजाय ब्राजील के आम नागरिकों के भीतर भारी राष्ट्रीय स्वाभिमान की लहर दौड़ गई। देश की जनता ने इसे ब्राजील की संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं में वाशिंगटन का खुला और अस्वीकार्य हस्तक्षेप माना। परिणामस्वरूप, जवाबी प्रभाव के चलते ब्राजील के भीतर राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की लोकप्रियता में अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया और वे राष्ट्रीय संप्रभुता के रक्षक के तौर पर उभरे। कूटनीतिक नुकसान को देखते हुए बाद में अमेरिका को बैकफुट पर आना पड़ा; टैरिफ में धीरे-धीरे ढील दी गई और दिसंबर महीने में जज मोरेस का नाम भी प्रतिबंध सूची से चुपचाप हटा लिया गया। तनाव इस कदर बढ़ा कि मार्च में ब्राजील सरकार ने डैरेन बीटी के जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो से मिलने पर कानूनी रोक लगा दी। अब जब पहले दौर के चुनाव में फ्लावियो को मामूली बढ़त मिलने पर डोनाल्ड ट्रंप ने उसे 'बड़ी जीत' करार दिया है, तो यह स्पष्ट हो गया है कि ब्राजील का चुनावी मैदान केवल दो स्थानीय नेताओं का संघर्ष नहीं, बल्कि वाशिंगटन की वैश्विक भू-राजनीतिक जोड़-तोड़ का जीवंत अखाड़ा बन चुका है।