एयर इंडिया को चाहिए ₹13,000 करोड़ का बड़ा फंड, 'मालिक' टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से की नई पूंजी की डिमांड
देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) ने अपने कायाकल्प, बेड़े के विस्तार और भारी परिचालन लागत से निपटने के लिए अपने प्रमोटर्स यानी 'मालिकों' से एक विशाल वित्तीय मदद की गुहार लगाई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया ने अपनी मूल कंपनी टाटा संस (Tata Sons) और साझेदार सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines) से करीब 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग 13,000 करोड़ रुपये की ताजा इक्विटी पूंजी (Fresh Equity Capital) की मांग की है।
साल 2022 में भारत सरकार से एयर इंडिया का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बाद से टाटा समूह द्वारा एयरलाइन के पुनरुद्धार पर लगातार भारी निवेश किया जा रहा है। लेकिन हालिया वित्तीय नतीजों में बढ़े घाटे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विमानन क्षेत्र की जटिलताओं के बीच यह अब तक की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से सामने आई फंड की मांग मानी जा रही है। इस प्रस्तावित फंडिंग पर दोनों शेयरधारकों के बीच आंतरिक स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है और आने वाले समय में यह पूंजी कई किस्तों (Tranches) में जारी की जा सकती है।
रिकॉर्ड घाटे के बीच नई पूंजी की मांग: क्यों पड़ी ₹13,000 करोड़ की जरूरत?
एयर इंडिया द्वारा इस आपातकालीन फंड की मांग के पीछे का सबसे बड़ा कारण एयरलाइन का बढ़ता हुआ वित्तीय घाटा है। आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, एयर इंडिया और उसकी बजट एयरलाइन इकाई 'एयर इंडिया एक्सप्रेस' (Air India Express) को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से लगभग 2.33 अरब डॉलर (करीब 19,500 करोड़ रुपये) का शुद्ध घाटा दर्ज करना पड़ा है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
कंपनी के सामने इस भारी वित्तीय दबाव की प्रमुख वजहें इस प्रकार हैं:
-
विमानों का कायाकल्प और नवीनीकरण: एयरलाइन के पास मौजूद पुराने विमानों की आंतरिक केबिन बनावट, सीटों, इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम और वाई-फाई सुविधाओं को विश्वस्तरीय बनाने में भारी पूंजीगत व्यय (Capex) हो रहा है।
-
सप्लाई चेन और मेंटेनेंस लागत: वैश्विक स्तर पर विमान विनिर्माताओं (बोइंग और एयरबस) की सप्लाई चेन बाधित होने के कारण कलपुर्जों की कीमतें और इंजन मेंटेनेंस का खर्च काफी बढ़ गया है।
-
ऊंची ईंधन लागत और घरेलू प्रतिस्पर्धा: विमानन ईंधन (ATF) की ऊंची दरों और घरेलू एविएशन मार्केट में अन्य प्रतिस्पर्धी एयरलाइंस के साथ टिकट दरों की जंग से परिचालन लाभप्रदता पर सीधा असर पड़ा है।
फ्लीट अपग्रेड और 100 नए विमान: क्या है एयर इंडिया का 2 साल का मेगा प्लान?
एयर इंडिया के निवर्तमान मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि एयरलाइन बाजार की अस्थिरता और चुनौतियों से पूरी तरह वाकिफ है, लेकिन वह अपने दीर्घकालिक विजन से पीछे नहीं हटेगी। एयरलाइन ने अगले दो वर्षों के भीतर 100 से अधिक नए और अत्याधुनिक विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इसके अलावा, एयरलाइन वर्ष 2027 तक अपने बेड़े में मौजूद 16 पुराने 'बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर' विमानों का पूर्ण रेट्रोफिटिंग (Retrofitting) कार्य पूरा करने जा रही है। चालू वर्ष के दौरान एयरलाइन अपने बेड़े में दो नए बड़े आकार के एयरबस ए350-1000 (Airbus A350-1000) विमानों को शामिल करने वाली है, जिससे लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रियों को आधुनिकतम और प्रीमियम यात्रा अनुभव मिल सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भू-राजनीतिक संकट और परिचालन लागत का दबाव
एयर इंडिया के वैश्विक परिचालन को पिछले कुछ समय में गंभीर भू-राजनीतिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है।
-
पाकिस्तानी एयरस्पेस पर प्रतिबंध: भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र (Airspace) के बंद होने के कारण एयर इंडिया को पश्चिमी देशों, यूरोप और उत्तरी अमेरिका की उड़ानों के लिए लंबे वैकल्पिक मार्गों (Detour) से होकर गुजरना पड़ता है। इससे उड़ानों का समय बढ़ जाता है और अतिरिक्त ईंधन की भारी खपत होती है, जिससे परिचालन लागत में भारी वृद्धि हुई है।
-
पश्चिम एशिया में तनाव: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और एयरस्पेस डायवर्जन ने भी एयरलाइन के अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर समयबद्धता और लागत प्रबंधन को प्रभावित किया है।
-
इन सभी अप्रत्याशित बाहरी संकटों ने एयर इंडिया के कैश फ्लो (Cash Flow) को प्रभावित किया है, जिसकी भरपाई के लिए नई इक्विटी पूंजी का प्रवेश बेहद अनिवार्य हो गया है।
टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस की हिस्सेदारी: कैसे होगा फंड का बंटवारा?
एयर इंडिया के स्वामित्व ढांचे की बात करें तो टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पास एयरलाइन की बहुलांश (Major) हिस्सेदारी है। वहीं, विस्तारा के एयर इंडिया में विलय के बाद सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) के पास एयर इंडिया समूह में लगभग 25.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
यदि 1.5 अरब डॉलर (₹13,000 करोड़) की यह फंडिंग नई इक्विटी के रूप में मंजूर होती है, तो शेयरधारिता के अनुपात के अनुसार:
-
लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के नाते फंड का बड़ा हिस्सा (करीब ₹9,750 करोड़) टाटा संस द्वारा निवेश किया जाएगा।
-
सिंगापुर एयरलाइंस को अपनी 25.1% शेयरहोल्डिंग बनाए रखने के लिए अपने हिस्से का लगभग ₹3,250 करोड़ (करीब 37.5 करोड़ डॉलर) का योगदान देना होगा।
सिंगापुर एयरलाइंस ने अपने बयान में कहा है कि वह एयर इंडिया के ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम में सहायता के लिए टाटा संस के साथ मिलकर पूरी मजबूती से काम कर रही है, हालांकि उसने एयरलाइन की आंतरिक वित्तीय स्थिति पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
300 विमानों का बेड़ा और लीडरशिप में बदलाव: टर्नअराउंड की लंबी राह
वर्तमान में एयर इंडिया समूह (एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस) के पास कुल मिलाकर करीब 300 विमानों का सक्रिय बेड़ा मौजूद है। अकेले एयर इंडिया के पास 185 से अधिक विमान हैं, जिनमें 35 बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, 19 बोइंग 777-300 ईआर और छह नए एयरबस ए350-900 जैसे वाइड-बॉडी विमान शामिल हैं।
एयरलाइन के प्रशासनिक मोर्चे पर भी बड़ा फेरबदल हो रहा है। इथियोपियन एयरलाइंस समूह के पूर्व प्रमुख टेवोल्डे गेब्रेमरियम (Tewolde GebreMariam) अब एयर इंडिया के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) का पद संभालने जा रहे हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि दशकों पुरानी सरकारी कार्यसंस्कृति, पुराने सिस्टम और बड़े फ्लीट को बदलकर एयर इंडिया को विश्वस्तरीय और लाभदायक एयरलाइन बनाने में कम से कम 5 से 10 वर्ष (एक दशक) का समय लग सकता है।
भारतीय एविएशन सेक्टर में वर्चस्व की जंग और भविष्य की चुनौतियां
भारतीय विमानन बाजार दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता घरेलू पैसेंजर मार्केट है। एक तरफ जहां इंडिगो (IndiGo) अपने 60% से अधिक मार्केट शेयर के साथ दबदबा बनाए हुए है, वहीं एयर इंडिया खुद को एक संपूर्ण वैश्विक नेटवर्क एयरलाइन के रूप में स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर के 470 नए विमानों का ऑर्डर दे चुकी है।
टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से मांगी गई यह ₹13,000 करोड़ की नई पूंजी एयर इंडिया को अपनी वित्तीय बैलेंस शीट को मजबूत करने, आधुनिक विमानों की डिलीवरी लेने और यात्रियों का भरोसा दोबारा जीतने में एक मजबूत जीवनदायिनी का काम करेगी। आने वाले कुछ हफ्तों में टाटा संस के बोर्ड की मंजूरी के बाद इस फंड के औपचारिक रिलीज होने की पूरी संभावना है।