'दंगल' फेम एक्ट्रेस ने नहीं की शादी, 45 की उम्र में गोद ली बेटी और नाम रखा 'दित्या', मिसाल बनी जिंदगी

'दंगल' फेम एक्ट्रेस ने नहीं की शादी, 45 की उम्र में गोद ली बेटी और नाम रखा 'दित्या', मिसाल बनी जिंदगी

ग्लेमर, चकाचौंध और सामाजिक रूढ़ियों से बंधी मनोरंजन की दुनिया में कई ऐसी हस्तियां हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी के फैसले समाज की तयशुदा सीमाओं से परे जाकर अपनी शर्तों पर लिए हैं। ऐसी ही एक मिसाल हैं छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली लोकप्रिय अभिनेत्री साक्षी तंवर। टीवी की दुनिया में कभी 'पार्वती' तो कभी 'प्रिया' बनकर हर भारतीय घर का हिस्सा बनीं साक्षी तंवर ने असल जिंदगी में शादी के पारंपरिक बंधनों को कभी अपनी खुशी के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने न सिर्फ अविवाहित रहकर एक मुकम्मल जिंदगी जी, बल्कि 45 वर्ष की उम्र में एक नन्ही बच्ची को गोद लेकर समाज के सामने मातृत्व और महिला सशक्तिकरण की एक अनोखी मिसाल भी कायम की।

45 की उम्र में बनीं मां, बेटी का नाम रखा 'दित्या'

साक्षी तंवर ने जीवन के 45वें पड़ाव पर आकर जब मां बनने का फैसला किया, तो उनके इस कदम ने हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने नवरात्रि के पावन अवसर पर 9 महीने की एक बच्ची को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद लिया था। साक्षी ने अपनी लाडली का नाम 'दित्या' (Dityaa) रखा, जिसका अर्थ होता है 'प्रार्थनाओं का जवाब' या फिर 'देवी लक्ष्मी का एक स्वरूप'। अभिनेत्री ने उस वक्त साझा किया था कि दित्या का उनकी जिंदगी में आना किसी वरदान जैसा है और यह फैसला उनके जीवन का सबसे खूबसूरत और भावनात्मक मोड़ साबित हुआ। साक्षी का मानना है कि मां बनने के लिए शादी का ठप्पा जरूरी नहीं, बल्कि दिल में अपार प्रेम, ममता और जिम्मेदारी का भाव होना ही सबसे बड़ी योग्यता है।

समाज के दबाव में शादी नहीं, साक्षी ने बताई थी अपनी राय

साक्षी तंवर ने कई साक्षात्कारों में शादी को लेकर अपने खुले और परिपक्व विचार साझा किए हैं। उनका कहना रहा है कि वह कभी शादी के विचार के खिलाफ नहीं थीं, लेकिन उनका मानना हमेशा यह रहा कि शादी केवल समाज, उम्र या रिश्तेदारों के दबाव में आकर नहीं की जानी चाहिए। उनका स्पष्ट रुख रहा कि जब तक जीवन में कोई ऐसा सही इंसान न मिले जिसके साथ पूरी जिंदगी साझी की जा सके, तब तक जल्दबाजी में कोई फैसला लेना सही नहीं है। साक्षी के शब्दों में, जीवन की पूर्णता किसी रिश्ते की मोहताज नहीं होती, इंसान अगर खुद के साथ ईमानदार और खुश है, तो वह अपने तरीके से खुशियों का संसार बसा सकता है।

IAS की तैयारी से एक्टिंग की दुनिया तक का अनूठा सफर

राजस्थान के अलवर में जन्मी साक्षी तंवर का परिवार प्रशासनिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके पिता राजेंद्र सिंह तंवर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में उच्च अधिकारी रहे। साक्षी ने दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्री राम कॉलेज (LSR) से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। पढ़ाई के दौरान उनका सपना प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाकर देश की सेवा करने का था। वह सिविल सेवा परीक्षा की गंभीरता से तैयारी कर रही थीं और उस दौरान अपने खर्च उठाने के लिए उन्होंने एक होटल में बतौर ट्रेनी भी काम किया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। साल 1998 में उन्होंने दूरदर्शन के शो 'अलबेला सुर मेला' के लिए ऑडिशन दिया और बतौर एंकर चुनी गईं। कैमरे के सामने आई उनकी यह सहजता उन्हें सीधे अभिनय के मंच पर ले आई।

'कहानी घर घर की' से 'दंगल' और 'माई' तक का ऐतिहासिक दबदबा

साल 2000 में एकता कपूर के धारावाहिक 'कहानी घर घर की' में 'पार्वती अग्रवाल' के किरदार ने साक्षी तंवर को घर-घर में एक आदर्श बहू और नारी के रूप में अमर कर दिया। इसके बाद 2011 में राम कपूर के साथ उनका शो 'बड़े अच्छे लगते हैं' आया, जिसमें 'प्रिया' के रूप में उनके अभिनय ने टीवी की दुनिया में इतिहास रच दिया। टीवी की दुनिया पर राज करने के बाद साक्षी ने बॉलीवुड की ओर रुख किया और साल 2016 में आमिर खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दंगल' में नजर आईं। फिल्म में उन्होंने पहलवान बहनों गीता-बबीता की मां और आमिर खान की पत्नी 'दया कौर' की भूमिका इतनी सादगी और मजबूती से निभाई कि क्रिटिक्स भी उनके कायल हो गए। हाल के वर्षों में उन्होंने नेटफ्लिक्स की सीरीज 'माई' में एक प्रतिशोधी और साहसी मां का किरदार निभाकर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी अदाकारी की अमिट छाप छोड़ी है।