बैंक अकाउंट या म्यूचुअल फंड में नॉमिनी को लेकर आप भी तो नहीं कर रहे बड़ी भूल? जानिए क्या सचमुच नॉमिनी ही बनता है संपत्ति का असली मालिक
अक्सर लोगों में यह बड़ी गलतफहमी होती है कि बैंक खाते, लॉकर या म्यूचुअल फंड में जिसका नाम नॉमिनी के तौर पर दर्ज है, वही उस पूरी संपत्ति का असली मालिक बन जाता है। वित्तीय नियमों के मुताबिक, नॉमिनी केवल एक ट्रस्टी या कस्टोडियन होता है, जिसका काम खाताधारक की मृत्यु के बाद फंड को सुरक्षित रूप से उसके कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाना है।
कानूनी उत्तराधिकारी और नॉमिनी में क्या है अंतर?
भारतीय कानूनों के अनुसार, वसीयत या उत्तराधिकार कानून के तहत तय किए गए कानूनी वारिस ही संपत्ति के वास्तविक हकदार होते हैं। यदि खाताधारक ने वसीयत बनाई है, तो संपत्ति उसी के अनुसार बांटी जाएगी, भले ही कागजों में नॉमिनी का नाम कुछ और हो। समय रहते सही वसीयत तैयार करना और नॉमिनी से जुड़े नियमों को स्पष्ट रखना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में परिवार को किसी भी तरह के कानूनी विवाद का सामना न करना पड़े।