सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: लुढ़ककर 1.46 लाख पर पहुंचा सोना, जानिए आगे और कितने सस्ते होंगे दाम
सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के बाजारों में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिल रहा है। हर दिन बदलती कीमतों के बीच निवेशकों और आम खरीफदारों की नजरें लगातार वैश्विक बाजारों पर टिकी हुई हैं। आज यानी मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट से जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने एक बार फिर से बाजार में हलचल पैदा कर दी है। मंगलवार दोपहर के कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में एक बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते सोना फिसलकर 1.46 लाख के स्तर पर आ गया है। इस गिरावट ने जहां एक ओर शादी-ब्याह की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीदने वाले निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में आई इस अचानक गिरावट के पीछे मुख्य तौर पर अमेरिकी डॉलर (USD) का मजबूत होना और वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में लगातार हो रही बढ़ोतरी को जिम्मेदार माना जा रहा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर मजबूत होता है, तब सोने जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा, मध्य पूर्व (Middle East) के देशों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के माहौल ने भी कमोडिटी मार्केट की चाल को अस्थिर बना रखा है, जिससे निवेशक हर पल की स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर क्या रहा सोने का ताजा भाव?
भारतीय वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मंगलवार को कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव देखने को मिला। दोपहर करीब 12 बजकर 47 मिनट पर MCX पर सोने के भाव में 0.15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह चमकती धातु लुढ़ककर 1,46,580 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रही थी। सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सर्राफा बाजार (International Bullion Market) में भी सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है। दुनिया भर के निवेशक अमेरिका से आने वाले नए आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इन आंकड़ों के आधार पर ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' (Federal Reserve) द्वारा भविष्य में ब्याज दरों (Interest Rates) में बदलाव को लेकर कोई नया रुख तय किया जाएगा।
क्यों आ रही है सोने की कीमतों में लगातार गिरावट?
वर्तमान समय में सोने की कीमतें जिस दबाव से गुजर रही हैं, उसके पीछे कई मजबूत वैश्विक आर्थिक कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से हो रही बढ़ोतरी है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक सोने के बजाय बॉन्ड और अन्य फिक्स्ड-इनकम एसेट्स में पैसा लगाना ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि वहां उन्हें बेहतर रिटर्न की उम्मीद होती है। इसके साथ ही, डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के कारण अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की भौतिक मांग में कमी आती है। यही वजह है कि लोग सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्प से थोड़ा किनारा करते हुए अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सीधा असर इसके दामों पर दिखाई दे रहा है।
क्या आने वाले दिनों में और गिरेंगे सोने के दाम या आएगी तेजी?
आम निवेशकों और ग्राहकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले हफ्तों में सोने की कीमतें और अधिक नीचे जाएंगी या फिर यह बाजार का निचला स्तर (Bottom) है जहां से कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने का अगला रुख पूरी तरह से अमेरिका के आगामी आर्थिक आंकड़ों, मुद्रास्फीति की दर और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। यदि डॉलर की मजबूती का यह दौर जारी रहता है और बॉन्ड यील्ड उच्च स्तर पर बनी रहती है, तो कीमतों में थोड़ा और दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार हो रही खरीद इस बात का संकेत देती है कि लंबी अवधि में इस कीमती धातु का बुनियादी आधार बेहद मजबूत बना हुआ है।
चांदी की कीमतों में भी भारी मंदी का दौर जारी
केवल सोने में ही नहीं, बल्कि इसके साथ ही चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट का दौर देखा जा रहा है। बीते सत्र के दौरान चांदी के दामों में भी जोरदार मंदी दर्ज की गई थी। 28 सितंबर को MCX पर एक किलोग्राम चांदी की कीमत फिसलकर 2,27,494 रुपये के स्तर पर आ गई थी। सोना और चांदी दोनों ही पारंपरिक रूप से भारतीय परिवारों और निवेशकों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और लोकप्रिय जरिया माने जाते हैं। ऐसे में इन दोनों ही बहुमूल्य धातुओं के दामों में आई यह तेज गिरावट अल्पावधि के लिए निवेशकों को चौंकाने वाली जरूर है, लेकिन यह उन खरीदारों के लिए एक सुनहरा अवसर भी बनकर आई है जो लंबे समय से सोने-चांदी में निवेश करने की सोच रहे थे।