Uber में सबसे बड़ी छंटनी: 3300 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी, सीईओ दारा खुसरोशाही ने बताई पीछे की बड़ी वजह और रीस्ट्रक्चरिंग का पूरा सच

Uber में सबसे बड़ी छंटनी: 3300 कर्मचारियों की जाएगी नौकरी, सीईओ दारा खुसरोशाही ने बताई पीछे की बड़ी वजह और रीस्ट्रक्चरिंग का पूरा सच

दुनिया की दिग्गज राइड-हेलिंग और टेक कंपनी उबर (Uber) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान करके पूरी टेक्नोलॉजी और बिजनेस की दुनिया को चौंका दिया है। कंपनी ने अपने वैश्विक कार्यबल (Global Workforce) के लगभग 10 प्रतिशत यानी करीब 3,300 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का फैसला किया है। यह कदम उबर द्वारा अब तक की सबसे बड़ी और तीखी कॉर्पोरेट रीस्ट्रक्चरिंग (Corporate Restructuring) का हिस्सा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दारा खुसरोशाही ने कर्मचारियों को भेजे गए एक ईमेल में इस बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा की। इस फैसले के बाद टेक सेक्टर में हलचल मच गई है और हर तरफ इसी बात की चर्चा है कि आखिर उबर जैसी मुनाफे में चल रही कंपनी को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा।

सीईओ दारा खुसरोशाही के ईमेल में क्या है छंटनी की असली वजह?

उबर के सीईओ दारा खुसरोशाही ने अपने विस्तृत आंतरिक मेमो में इस बात का खुलकर जिक्र किया है कि पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने अभूतपूर्व वृद्धि (Exponential Growth) देखी है। इन सालों में कंपनी का टॉप-लाइन रेवेन्यू लगभग तीन गुना तक बढ़ गया है। हालांकि, इस तेज रफ्तार ग्रोथ की वजह से कंपनी के भीतर कई तरह की आंतरिक जटिलताएं (Organizational Complexity) भी पैदा हो गई थीं। कंपनी का आकार बढ़ने के साथ ही मैनेजमेंट लेयर्स, कॉर्डिनेशन की जरूरतें और बिखरा हुआ मालिकाना हक (Fragmented Ownership) बहुत ज्यादा बढ़ गया था। खुसरोशाही के मुताबिक, जो स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली छोटे बिजनेस के समय बिल्कुल सही बैठती थी, वह मौजूदा विशाल पैमाने पर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही थी। कंपनी को धीमा करने वाली इन बाधाओं को दूर करने और कामकाज को अधिक सरल व तेज बनाने के लिए यह छंटनी अनिवार्य हो गई थी।

मैनेजमेंट लेयर्स और माइक्रो-टीम्स पर चली कैंची

इस रीस्ट्रक्चरिंग अभियान के तहत उबर ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली और संगठनात्मक ढांचे (Org Chart) को पूरी तरह से बदलने का बीड़ा उठाया है। कंपनी ने उन भूमिकाओं और पदों को मुख्य रूप से निशाना बनाया है जो केवल कॉर्डिनेशन या तालमेल बिठाने तक सीमित थे। आंकड़ों के मुताबिक, सीईओ से सात या उससे अधिक लेयर नीचे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में 20 प्रतिशत की भारी कटौती की गई है। इसके अलावा, ऐसी 'माइक्रो-टीम्स' जिनमें केवल एक या दो डायरेक्ट रिपोर्टिंग कर्मचारी हुआ करते थे, उनकी संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। उबर ने अपने विभिन्न विभागों में काम के डुप्लिकेशन को खत्म करने के लिए कई टीमों को आपस में मिला दिया है। उदाहरण के लिए, रेस्टोरेंट, रिटेल और डायरेक्ट से जुड़ी तीनों डिलीवरी ऑपरेशंस टीमों को अब वैश्विक, क्षेत्रीय और देश स्तर पर एक साथ मर्ज कर दिया गया है। इसी तरह, कोर सर्विसेज इंजीनियरिंग और साइंस टीमों को भी आपस में जोड़ दिया गया है ताकि फैसले तेजी से लिए जा सकें और जवाबदेही साफ हो सके।

रिमोट वर्क और हाइब्रिड नीति पर सख्त नियम

इस बड़े कॉर्पोरेट ओवरहॉल के तहत उबर ने अपनी लोकेशन और रिमोट वर्क पॉलिसी को भी बेहद सख्त बना दिया है। कंपनी ने वैश्विक टीमों को चुनिंदा मुख्य हब्स (Major Hubs) में केंद्रित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को को ग्लोबल टीमों का मुख्य केंद्र बनाया गया है, जबकि क्षेत्रीय और तकनीकी टीमों को उनके निर्धारित डेजिग्नेटेड हब्स से काम करना होगा। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल लगभग 1 प्रतिशत कर्मचारियों को ही पूरी तरह से रिमोट (घर से काम करने) की अनुमति दी जाएगी। बाकी अधिकांश कर्मचारियों को ऑफिस से काम करने के लिए निर्देशित किया गया है। उबर अपनी मौजूदा हाइब्रिड वर्क पॉलिसी को बेहद सख्ती से लागू कर रही है, जिसके तहत कर्मचारियों को हफ्ते में कम से कम तीन दिन ऑफिस आना अनिवार्य है। कंपनी का मानना है कि आमने-सामने बैठकर काम करने से विचारों का आदान-प्रदान और समस्या समाधान की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होती है।

भविष्य की बड़ी तकनीक और रोबोटैक्सी पर फोकस

उबर का यह बड़ा फैसला केवल खर्चों में कटौती करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की बड़ी तकनीकी छलांग की तैयारी है। कंपनी ने आने वाले वर्षों में रोबोटैक्सी (Robotaxi) और स्वायत्त वाहन (Autonomous Vehicle) साझेदारियों में 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। उबर ने एविड, लुसिड, न्यूरो और रिवियन जैसी कंपनियों में निवेश के साथ-साथ अपनी पूंजी को रणनीतिक रूप से रीअलोकेट करना शुरू कर दिया है। हालांकि सीईओ ने अपने संदेश में सीधे तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इस छंटनी की मुख्य वजह नहीं बताया, लेकिन टेक इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि छोटी और अधिक कुशल टीमें एआई के दौर में तेजी से उत्पादकता बढ़ाने में मददगार साबित होती हैं। छंटनी के इस बड़े ऐलान के बाद शेयर बाजार में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और उबर के शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

निष्कर्ष और बाजार पर प्रभाव

उबर द्वारा उठाया गया यह कदम भले ही हजारों कर्मचारियों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ हो, लेकिन कंपनी के नेतृत्व का मानना है कि यह लंबी अवधि की सफलता के लिए एक जरूरी और साहसिक कदम है। एक दुबली-पतली और चुस्त (Leaner) कंपनी बनने से उबर आने वाले समय में अपने ड्राइवरों, कूरियर पार्टनर्स और मर्चेंट्स के लिए और अधिक बेहतर अवसर पैदा कर सकेगी। तकनीकी दुनिया में आज के इस बदलते परिदृश्य में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह रीस्ट्रक्चरिंग उबर को उसकी रफ्तार और मुनाफे के नए मुकाम पर ले जाने में पूरी तरह सफल हो पाती है या नहीं।