$120 के पार जा सकते हैं कच्चे तेल के दाम! गोल्डमैन सैक्स ने दी बड़ी चेतावनी, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों से बढ़ा ऊर्जा संकट

$120 के पार जा सकते हैं कच्चे तेल के दाम! गोल्डमैन सैक्स ने दी बड़ी चेतावनी, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों से बढ़ा ऊर्जा संकट

वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने की आशंका गहरा गई है। वॉल स्ट्रीट के दिग्गज निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अपनी ताजा रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी चेतावनी दी है। बैंक के कमोडिटी रिसर्च विभाग के अनुसार, मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री जहाजों पर बढ़ते हमलों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेकाबू हो सकता है।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव और तेज होता है और आपूर्ति बाधित होती है, तो ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के भाव उछलकर $120 प्रति बैरल के पार जा सकते हैं। बैंक ने अपने पूर्वानुमानों को बदलते हुए दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का बेस अनुमान बढ़ाकर $85 प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड का अनुमान $80 प्रति बैरल कर दिया है। ऑप्शंस मार्केट में भी तेल के $100 के पार निकलने की संभावना तेजी से बढ़ी है।

इस वजह से बढ़ी सबसे बड़ी चिंता: होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग संकट

गोल्डमैन सैक्स द्वारा जारी इस चेतावनी के केंद्र में दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग यानी 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) है:

  • समुद्री जहाजों पर हमलों का खतरा: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक वाणिज्यिक जहाजों पर जारी हमलों ने समुद्री आवाजाही को बेहद जोखिम भरा बना दिया है। हाल के दिनों में होर्मुज से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की दैनिक संख्या में भारी गिरावट आई है।

  • 40 लाख बैरल प्रतिदिन की संभावित कमी: गोल्डमैन सैक्स के ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च हेड डैन स्ट्रुइवेन (Daan Struyven) के नेतृत्व वाली टीम के मुताबिक, यदि फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से तेल का दैनिक उत्पादन और निर्यात पूर्व-युद्ध स्तर से 40 लाख बैरल प्रति दिन (4 million bpd) तक घट जाता है, तो ब्रेंट क्रूड का $120 प्रति बैरल को पार करना तय माना जा रहा है।

  • बीमा और लॉजिस्टिक्स लागत में बेतहाशा वृद्धि: होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद न होने के बावजूद जहाजों के युद्ध बीमा प्रीमियम (War Risk Premium), माल ढुलाई किराए और डिलेवरी समय में भारी इजाफा हो चुका है, जिससे रिफाइनरियों के लिए क्रूड की लागत बढ़ गई है।

2027 तक खिंच सकता है आपूर्ति में व्यवधान

पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि साल के मध्य तक कूटनीतिक समझौतों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति सामान्य हो जाएगी, लेकिन गोल्डमैन सैक्स की ताजा समीक्षा बताती है कि शिपिंग में यह रुकावट अब 2027 तक लंबी खिंच सकती है।

बैंक ने रेखांकित किया कि यूएई और सऊदी अरब के पास पाइपलाइनों के जरिए होर्मुज को बाईपास करने की कुछ क्षमता जरूर है, लेकिन वह वैश्विक बाजार की कुल आपूर्ति कमी को पूरी तरह पाटने के लिए नाकाफी साबित होगी। बाजार अब 'टेलरस्क' यानी सबसे खराब स्थिति (Worst-Case Scenario) को ध्यान में रखकर ट्रेडिंग कर रहा है।

आम आदमी और भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आता है। ऐसे में यदि गोल्डमैन सैक्स की यह आशंका सच साबित होती है, तो इसका सीधा असर घरेलू स्तर पर देखने को मिलेगा:

  • पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतें: कच्चे तेल के $100 से $120 के दायरे में पहुंचने पर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर मार्जिन का भारी दबाव पड़ेगा, जिससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा पैदा होगा।

  • महंगाई (Inflation) में तेज उछाल: परिवहन लागत महंगी होने से फल, सब्जियां, दूध और रोजमर्रा के आवश्यक उपभोक्ता सामानों की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।

  • विमानन ईंधन (ATF) और हवाई किराया: कच्चे तेल में उछाल से एविएशन टरबाइन फ्यूल के दाम बढ़ेंगे, जिससे त्योहारी सीजन में हवाई सफर काफी महंगा हो सकता है।

  • रुपये और चालू खाता घाटे (CAD) पर दबाव: तेल के महंगे आयात बिल के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में कमजोरी देखने को मिल सकती है, जिससे आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी भी महंगी होगी।

गोल्डमैन सैक्स ने वैश्विक निवेशकों और रिफाइनर्स को चेतावनी दी है कि वे आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार में आने वाली तेज अस्थिरता से निपटने के लिए हेजिंग स्ट्रैटेजी और रिस्क मैनेजमेंट को मजबूत रखें।