इस बैंक के ग्राहक अब निकाल सकेंगे सिर्फ ₹5,000; खस्ताहाल वित्तीय स्थिति देख RBI ने 6 महीने के लिए लगाया कड़ा प्रतिबंध
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर में जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए एक और सहकारी बैंक के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने केंद्र शासित प्रदेश के प्रमुख सहकारी बैंक 'पुडुचेरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक' (Puducherry Co-operative Urban Bank) की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और लिक्विडिटी की भारी कमी को देखते हुए उस पर कड़े प्रतिबंध (Directions) लगा दिए हैं। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) की धारा 35A के तहत जारी इन निर्देशों के बाद अब इस बैंक के ग्राहक अपने बचत या चालू खातों में से कुल मिलाकर केवल ₹5,000 तक की रकम ही निकाल सकेंगे। रिजर्व बैंक का यह कड़ा आदेश 21 अक्टूबर 2026 को कारोबार बंद होने के समय से अगले छह महीने की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा।
खाते में चाहे लाखों जमा हों, कुल निकासी सिर्फ ₹5,000 तक सीमित
रिजर्व बैंक द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, बैंक की मौजूदा लिक्विडिटी स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नए नियमों के तहत, किसी भी खाताधारक को—चाहे उसके पास सेविंग्स अकाउंट (Savings Account), करंट अकाउंट (Current Account) या कोई अन्य जमा खाता क्यों न हो—सभी खातों को मिलाकर कुल शेष राशि में से ₹5,000 से अधिक निकालने की अनुमति नहीं होगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी ग्राहक के खाते में ₹50,000 या ₹5 लाख भी जमा हैं, तब भी वह फौरी तौर पर बैंक से ₹5,000 से अधिक की नकदी नहीं निकाल सकेगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने यह छूट दी है कि यदि किसी जमाकर्ता का बैंक में कोई वैध कर्ज (Loan) चल रहा है, तो वह अपने खाते में मौजूद शेष राशि से उस कर्ज की किस्तों या देनदारी का समायोजन (Set-off) नियमों के तहत करवा सकता है।
नए कर्ज बांटने, निवेश करने और फंड ट्रांसफर पर भी पूरी तरह रोक
आरबीआई ने केवल ग्राहकों की निकासी पर ही पाबंदी नहीं लगाई है, बल्कि बैंक के दैनिक परिचालन पर भी व्यापक अंकुश लगा दिए हैं। अब पुडुचेरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक बिना आरबीआई की पूर्व लिखित मंजूरी के किसी भी नए लोन या अग्रिम (Advances) को मंजूर या रिन्यू नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, बैंक पर किसी भी प्रकार का नया निवेश करने, बाजार से कोई नई देनदारी लेने, फंड उधार लेने या किसी नई जमा राशि को स्वीकार करने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बैंक अपनी किसी भी संपत्ति या परिसंपत्ति को न तो बेच सकता है और न ही ट्रांसफर कर सकता है। कर्मचारियों के वेतन, दफ्तर के किराए और जरूरी कानूनी खर्चों जैसी अनिवार्य देनदारियों को छोड़कर बैंक किसी भी अन्य मद में मनमाना भुगतान नहीं कर पाएगा।
लाइसेंस रद्द नहीं हुआ, सुधार के लिए दिया गया 6 महीने का वक्त
अक्सर बैंकों पर इस तरह की सख्त पाबंदियां लगते ही खाताधारकों और आम जनता के बीच बैंक बंद होने का खौफ फैल जाता है। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए रिजर्व बैंक ने जोर देकर कहा है कि इन पाबंदियों को कतई यह न समझा जाए कि बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, यह कदम किसी दंडात्मक भावना से नहीं, बल्कि बैंक की वित्तीय स्थिति को और ज्यादा गर्त में जाने से रोकने और आम जमाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा के लिए उठाया गया है। बैंक तब तक इन पाबंदियों और सीधी निगरानी के साथ अपना बुनियादी कामकाज जारी रखेगा जब तक कि उसकी वित्तीय स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं आ जाता। अगर प्रबंधन अपनी बैलेंस शीट, वसूली और लिक्विडिटी में सुधार दिखाता है, तो रिजर्व बैंक समय-समय पर इन निर्देशों की समीक्षा कर प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर सकता है।
DICGC के तहत सुरक्षित है ₹5 लाख तक का डिपॉजिट
बैंक पर पाबंदी लगने के बाद सबसे बड़ा सवाल छोटे और मध्यम जमाकर्ताओं की रकम की सुरक्षा को लेकर उठता है। रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि पुडुचेरी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक के सभी पात्र जमाकर्ता डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) एक्ट, 1961 (संशोधन 2021) की धारा 18A के तहत बीमा सुरक्षा के हकदार हैं। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, देश के प्रत्येक बैंक जमाकर्ता की मूलधन और ब्याज मिलाकर कुल ₹5 लाख तक की जमा राशि डीआईसीजीसी द्वारा पूरी तरह बीमित (Insured) होती है। यदि बैंक की स्थिति भविष्य में नहीं सुधरती है या समाधान प्रक्रिया लंबी खिंचती है, तो भी पात्र ग्राहक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत ₹5,00,000 तक की अपनी जमा पूंजी पर सीधे क्लेम हासिल कर सकते हैं। इससे उन लाखों आम ग्राहकों को बड़ा संबल मिलता है जिनकी जीवनभर की कमाई बैंक में सुरक्षित रखी है।