अनशन खत्म कराने लिए थे 500 करोड़? मनोज जरांगे के दावे से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल

अनशन खत्म कराने लिए थे 500 करोड़? मनोज जरांगे के दावे से महाराष्ट्र में सियासी भूचाल

महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण को लेकर चल रही रार ने अब तक का सबसे सनसनीखेज और विस्फोटक मोड़ ले लिया है। बीड जिले के नारायणगढ़ में आयोजित विशाल दशहरा रैली में मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने सीधे तौर पर एकनाथ शिंदे पर ₹500 करोड़ के लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल दाग दिए।

जरांगे पाटिल ने दावा किया कि दिल्ली और भाजपा के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि उनके अनशन और आंदोलन को शांत कराने के नाम पर एकनाथ शिंदे ने भाजपा आलाकमान से ₹500 करोड़ की भारी-भरकम रकम ली थी। जरांगे ने मंच से चुनौती भरे लहजे में पूछा कि क्या शिंदे ने भाजपा से यह कहा था कि उन्होंने यह 500 करोड़ रुपये अपने सांसद बेटे डॉ. श्रीकांत शिंदे के जरिए जरांगे तक पहुंचा दिए हैं? जरांगे के इस बयान के बाद महाराष्ट्र के सियासी हलकों में भारी हड़कंप मच गया है।

'मैंने कभी एक साथ 5 हजार नहीं देखे, 500 करोड़ से तो दो एकड़ का खेत भर जाए': जरांगे का तंज

नारायणगढ़ के मंच से लाखों समर्थकों को संबोधित करते हुए मनोज जरांगे ने कहा कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित और गहरी साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि जब वह अंतरवाली सराटी में भूख हड़ताल पर बैठे थे, तभी से उन्हें इस तरह की साजिशों की भनक लग रही थी।

जरांगे ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा:

"500 करोड़ रुपये होते कितने हैं, क्या इसका अंदाजा भी है? इतनी रकम से तो दो एकड़ का बड़ा शेततले (तालाब) भर जाएगा! मैंने तो अपनी जिंदगी में कभी 5 हजार रुपये एक साथ नहीं देखे। मराठा समाज ने तो आंदोलन के दौरान ही तीन से चार हजार करोड़ रुपये के फूल बरसा दिए होंगे। अगर मेरा समाज 100-100 रुपये भी दे, तो एक आवाज पर 2,500 करोड़ रुपये खड़े हो जाएंगे। ऐसे में मेरे नाम पर 500 करोड़ का खेल किसने खेला? शिंदे साफ बताएं कि क्या उन्होंने मुझे पैसे दिए या यह मुझे और मराठा समाज को बदनाम करने का षड्यंत्र है?"

जरांगे ने दावा किया कि उनके पास इन चर्चाओं और एक पूर्व मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई 40 मिनट की गुप्त बातचीत के ऑडियो व पुख्ता सबूत मौजूद हैं, जिसे वे जल्द ही सार्वजनिक करेंगे।

एकनाथ शिंदे का दो-टूक जवाब: 'न किसी से 500 करोड़ लिए, न किसी को दिए'

मनोज जरांगे के इन आरोपों पर एकनाथ शिंदे ने भी कड़ा और सीधा पलटवार किया है। मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए शिंदे ने कहा कि मनोज जरांगे को बोलने से पहले तथ्यों की थोड़ी पड़ताल कर लेनी चाहिए थी।

शिंदे ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

"मैंने न तो किसी को 500 करोड़ रुपये दिए हैं और न ही किसी से 500 करोड़ रुपये लिए हैं। एकनाथ शिंदे को पूरा राज्य और देश जानता है। मेरी कार्यशैली सबके सामने खुली किताब है। जब मैं मुख्यमंत्री था, तब भी मैंने मराठा समाज को टिकाऊ आरक्षण और न्याय देने के लिए ईमानदारी से काम किया। अगर जरांगे के पास कोई सबूत हैं, तो वे संबंधित जांच एजेंसियों को सौंपें, ताकि 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो सके। केवल हेडलाइन बनाने के लिए किसी का भी नाम घसीट देना उचित नहीं है। जरांगे मराठा समाज के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें समाज का ही काम करना चाहिए, इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।"

शिंदे गुट का तीखा हमला: 'जरांगे की हो जांच, कौन है पर्दे के पीछे की अदृश्य शक्ति?'

जरांगे के इस बयान के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ मंत्रियों और नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है:

  • उदय सामंत (उद्योग मंत्री): कैबिनेट मंत्री उदय सामंत ने कहा कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की छवि खराब करने के लिए कोई 'तीसरा व्यक्ति' और 'अदृश्य शक्ति' जरांगे के पीछे काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जरांगे का 'बोलवता धनी' (कठपुतली नचाने वाला) कोई और है और वे इसके सबूत सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। सामंत ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

  • रामदास कदम (वरिष्ठ नेता): पूर्व मंत्री रामदास कदम ने मुंबई में आयोजित अपनी पार्टी की दशहरा रैली में कहा कि जरांगे के इस बेबुनियाद आरोप के पीछे की साजिश की गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने मराठा आरक्षण छीना, जरांगे उन पर कभी सवाल नहीं उठाते, लेकिन जिन्होंने समाज को आरक्षण दिया, उन पर मनगढ़ंत लांछन लगा रहे हैं।

  • भरत गोगावले (कैबिनेट मंत्री): मंत्री भरत गोगावले ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे ने मराठा समाज के लिए जो किया है, वह इतिहास में दर्ज है। अगर कोई अनर्गल आरोप लगाकर समाज को गुमराह करेगा, तो उसे रायगढ़ के मावलों का शाप लगेगा और इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

महाराष्ट्र की सियासत पर क्या होगा इस टकराव का असर?

यह नया विवाद उस समय छिड़ा है जब राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद के समीकरण और स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में मनोज जरांगे का मराठा युवाओं के बीच बड़ा प्रभाव माना जाता है। पहले जहां जरांगे का मुख्य निशाना भाजपा और देवेंद्र फडणवीस हुआ करते थे, वहीं अब उनके निशाने पर सीधे एकनाथ शिंदे और उनके सांसद पुत्र श्रीकांत शिंदे का आना एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस 500 करोड़ के आरोप ने मराठा आरक्षण आंदोलन को विशुद्ध राजनीतिक दंगल में तब्दील कर दिया है। अब सबकी नजरें जरांगे पाटिल की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं कि क्या वे वास्तव में कोई दस्तावेजी या ऑडियो सबूत सामने रख पाते हैं या यह विवाद बयानों की जुबानी जंग तक ही सीमित रह जाता है।