FSSAI Big Relief to Liquor Companies: पुराने स्टॉक की बिक्री के लिए मिला 90 दिन का समय, कंपनियों को बड़ी राहत
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा शराब विनिर्माण और पैकेजिंग नियमों के कड़े पालन को लेकर हाल ही में बड़ी कार्रवाई की गई थी। खाद्य नियामक ने देश की कई नामी-गिरामी शराब निर्माता कंपनियों के प्रोडक्ट्स पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। दरअसल, जांच के दौरान यह पाया गया था कि कुछ प्रमुख ब्रांड्स अपने उत्पादों में तय मानकों से हटकर बाहरी और कृत्रिम स्वादों (Artificial Flavours) का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा, व्हिस्की और रम जैसी बोतलों पर उम्र से जुड़े भ्रामक दावे (Age Claims) और गलत लेबलिंग के मामले भी सामने आए थे। इन तकनीकी और नियामक उल्लंघनों के कारण बाजार में मौजूद कई लोकप्रिय ब्रांड्स की बिक्री अचानक रोक दी गई थी, जिससे शराब बनाने वाली कंपनियों और डिस्टिलरीज के सामने भारी वित्तीय संकट खड़ा हो गया था। गोदामों और सप्लाई चेन में पहले से फंसे करोड़ों रुपये के स्टॉक को लेकर कंपनियों की चिंताएं काफी बढ़ गई थीं।
90 दिनों की ट्रांजिशन विंडो और स्टॉक निकासी की अनुमति
कंपनियों की परेशानियों और उद्योग संगठनों के आग्रह को ध्यान में रखते हुए FSSAI ने अब एक बड़ा मानवीय और व्यावहारिक कदम उठाया है। नियामक ने सभी प्रभावित शराब निर्माताओं को उनके पास मौजूद मौजूदा पुराने स्टॉक (Existing Stock) को खपाने के लिए 90 दिनों की एक विशेष मोहलत दी है। इस 90 दिन के ट्रांजिशन पीरियड के भीतर कंपनियां अपने गोदामों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क में पड़े पुराने माल को बाजार में बेच सकेंगी। इस राहत से यूनाइटेड स्पिरिट्स (Diageo), ओल्ड मोंक बनाने वाली कंपनियां, और एसोसिएटेड अल्कोहॉल जैसी बड़ी दिग्गज कंपनियों को भारी नुकसान से बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह छूट पूरी तरह से बिना शर्तों के नहीं है और कंपनियों को इसके लिए नियामक के कुछ कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
सख्त शर्तें और जनता के लिए स्पष्ट डिस्क्लोजर नियम
इस 90 दिन की अवधि के दौरान पुराने स्टॉक को बेचने की अनुमति पाने वाली कंपनियों को कुछ कड़े नियमों का पालन करना होगा। FSSAI के निर्देशानुसार, कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग और प्रकृति के संबंध में स्पष्ट पब्लिक नोटिस जारी करना होगा। यदि किसी उत्पाद में अतिरिक्त फ्लेवर या एसेंस का इस्तेमाल किया गया है, तो उसकी जानकारी पारदर्शी तरीके से ग्राहकों तक पहुंचानी होगी। इसके अलावा, नियामक ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि उम्र के दावों (Age Claims) से जुड़े नियमों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। यदि कोई ब्रांड अपनी बोतल पर उम्र या पुरानी स्पिरिट के मिश्रण का दावा करता है, तो उसे मानकों पर खरा उतरना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना और उपभोक्ताओं के हितों की पूरी तरह से रक्षा करना है।
भविष्य के लिए फॉर्मूलेशन बदलने में जुटीं दिग्गज कंपनियां
इस पूरी नियामक कार्रवाई के बाद देश की प्रमुख शराब निर्माता कंपनियों ने भविष्य के लिए अपने उत्पादों के फॉर्मूलेशन में बदलाव करना शुरू कर दिया है। रॉयल चैलेंज, एंटीक्विटी ब्लू, मैकडॉवेल और ओल्ड मोंक जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स अपनी निर्माण प्रक्रिया और रेसिपी को FSSAI के तय मानकों के अनुसार ढाल रहे हैं। कंपनियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आने वाले दिनों में उनके किसी भी उत्पाद में नियमों का उल्लंघन न हो और वे खाद्य सुरक्षा के सभी पैमानों पर खरे उतर सकें। जानकारों का मानना है कि इस 90 दिन की समयसीमा से कंपनियों को अपने पुराने स्टॉक को व्यवस्थित रूप से निकालने और भविष्य की नई पैकेजिंग व फॉर्मूलेशन की तैयारी करने का पर्याप्त अवसर मिल जाएगा।