पैसे का कर लीजिए इंतजाम! आ रहा है कोल इंडिया की दिग्गज कंपनी SECL का ₹6,700 करोड़ का मेगा IPO;

पैसे का कर लीजिए इंतजाम! आ रहा है कोल इंडिया की दिग्गज कंपनी SECL का ₹6,700 करोड़ का मेगा IPO;

प्राइमरी मार्केट और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSU) के शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) की सबसे बड़ी और सर्वाधिक मुनाफा कमाने वाली सहायक कंपनियों में शुमार साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने अपने इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। बाजार सूत्रों और मर्चेंट बैंकरों के अनुसार, यह पब्लिक इश्यू लगभग 800 मिलियन डॉलर यानी करीब 6,500 से 6,700 करोड़ रुपये का हो सकता है। यह इश्यू पूर्ण रूप से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, जिसमें प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 66.80 करोड़ इक्विटी शेयर खुले बाजार में बेचेगी। चूंकि यह शुद्ध रूप से ओएफएस है, इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी पूंजी मूल कंपनी कोल इंडिया के पास जाएगी।

देश की दूसरी सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है SECL

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मुख्यालय वाली साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) एक मिनीरत्न (कैटेगरी-1) सीपीएसई है, जिसकी स्थापना 1985 में हुई थी।

  • उत्पादन में भारी हिस्सेदारी: SECL कोल इंडिया की कुल कोयला आपूर्ति में लगभग 22.95% और देश के कुल कोयला उत्पादन में करीब 17% का प्रत्यक्ष योगदान देती है।

  • विश्व स्तरीय खदानें: कंपनी के पास वर्तमान में 53 से अधिक चालू खदानें हैं। इसमें छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र में स्थित गेवरा (Gevra) और कुसमुंडा (Kusmunda) ओपनकास्ट खदानें उत्पादन क्षमता के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खदानों में गिनी जाती हैं।

  • 26 साल का मजबूत रिजर्व: 1 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के पास कुल 47.55 अरब टन के भूवैज्ञानिक कोयला संसाधन और 4.61 अरब टन के ऑडिटेड रिजर्व मौजूद हैं, जो मौजूदा उत्पादन दर के हिसाब से अगले 26 वर्षों तक निर्बाध खनन के लिए पर्याप्त हैं।

वित्तीय सेहत: 6 महीने में 91% उछला मुनाफा, सालाना कमाई 33,000 करोड़ के पार

आईपीओ दस्तावेजों में दिए गए वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, कंपनी की बैलेंस शीट और कैश फ्लो असाधारण रूप से मजबूत हैं:

  • चालू वित्त वर्ष की छमाही (H1 FY27): 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई पहली छमाही में कंपनी का परिचालन राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर 16,593.7 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 15,090.2 करोड़ रुपये था। वहीं, इस छमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) सालाना आधार पर 91 प्रतिशत के जबरदस्त उछाल के साथ 2,174.3 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

  • वार्षिक प्रदर्शन (FY26): पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने 32,956.5 करोड़ रुपये का राजस्व और 4,754.5 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया था।

  • नेटवर्थ और मार्जिन: कंपनी की कुल नेटवर्थ 21,000 करोड़ रुपये से अधिक है और इसका एबिटा मार्जिन (EBITDA Margin) करीब 23 से 26 प्रतिशत के बीच बना हुआ है, जो इस सेक्टर में काफी आकर्षक माना जाता है।

रिटेल निवेशकों और कोल इंडिया के शेयरधारकों के लिए क्या होगा खास?

सेबी के नियमों के अनुसार बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के तहत इस इश्यू में विभिन्न श्रेणियों के लिए कोटा आरक्षित रहेगा:

  1. रिटेल कोटा (RII): शुद्ध इश्यू का 35 प्रतिशत हिस्सा व्यक्तिगत खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा, जिसमें ₹2 लाख तक की बोली लगाई जा सकेगी।

  2. संस्थागत और गैर-संस्थागत कोटा: योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs) के लिए 50% और गैर-संस्थागत निवेशकों (NII/HNI) के लिए 15% कोटा तय किया गया है।

  3. शेयरहोल्डर और कर्मचारी कोटा: चूंकि यह कोल इंडिया की सहायक कंपनी है, इसलिए मूल कंपनी 'कोल इंडिया लिमिटेड' के मौजूदा शेयरधारकों के लिए भी इसमें एक विशेष शेयरहोल्डर रिजर्वेशन कोटा मिलने की पूरी उम्मीद है, जैसा कि पूर्व में अन्य पीएसयू इश्यूज में देखा गया है। इसके अतिरिक्त पात्र कर्मचारियों के लिए भी अलग कोटा निर्धारित रहेगा।

एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, आईडीबीआई कैपिटल और मोतीलाल ओसवाल इस इश्यू के बुक रनिंग लीड मैनेजर्स नियुक्त किए गए हैं।

कोल इंडिया की मूल्य अनलॉक करने की व्यापक रणनीति

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (SECL) का यह आईपीओ केंद्र सरकार और कोल इंडिया की अपनी सहायक कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराकर पूंजी व मूल्य सृजन (Value Unlocking) की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। इससे पहले बीसीसीएल (BCCL) और हाल ही में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL) के भी 1 अरब डॉलर के आईपीओ के ड्राफ्ट दस्तावेज बाजार में आगे बढ़ाए जा चुके हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बिजली क्षेत्र में बढ़ती कोयला मांग और कैप्टिव बिजली संयंत्रों के विस्तार के चलते इस पीएसयू आईपीओ को संस्थागत और खुदरा दोनों निवेशकों से तगड़ा रिस्पॉन्स मिल सकता है। सेबी से ड्राफ्ट पेपर की अंतिम मंजूरी मिलते ही कंपनी द्वारा प्राइस बैंड, लॉट साइज और बिडिंग की तारीखों का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।