सितंबर की 6% गिरावट के बाद सोने में यू-टर्न: MCX पर फिर ₹1.50 लाख के पार पहुंचा भाव

सितंबर की 6% गिरावट के बाद सोने में यू-टर्न: MCX पर फिर ₹1.50 लाख के पार पहुंचा भाव

सितंबर महीने में आई तेज गिरावट और मुनाफावसूली के बाद भारतीय वायदा बाजार में कीमती धातुओं की चमक एक बार फिर लौट आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के भाव ने जोरदार वापसी करते हुए एक बार फिर से ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर लिया है। पिछले महीने यानी सितंबर के दौरान सोने की कीमतों में 6 फीसदी से ज्यादा का बड़ा करेक्शन देखने को मिला था, जिससे भाव फिसलकर ₹1.47 लाख के स्तर के करीब आ गए थे। हालांकि, फेस्टिव सीजन की शुरुआत और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच खरीदारों की वापसी से सोने और चांदी दोनों में ताजा लिवाली का दौर शुरू हो गया है।

MCX पर सोने-चांदी की चाल: इंट्रा-डे में बंपर उछाल

अक्टूबर के पहले कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोने के वायदा अनुबंधों में दिन की शुरुआत से ही मजबूती देखी गई:

  • सोना (Gold Futures): MCX पर दिसंबर एक्सपायरी वाला सोना करीब 1,000 से 1,300 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी के साथ ₹1,50,030 से ₹1,50,100 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

  • चांदी (Silver Futures): सोने की तरह ही चांदी की कीमतों में भी जोरदार तेजी रही। दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी ₹2,100 से अधिक की बढ़त के साथ ₹2,25,800 से ₹2,26,600 प्रति किलोग्राम के दायरे में पहुंच गई।

  • स्पॉट मार्केट (हाजिर बाजार): देश के प्रमुख महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई) में 24 कैरेट शुद्ध सोने के रिटेल भाव भी ₹1.49 लाख से ₹1.495 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बने हुए हैं।

सितंबर में क्यों आई थी 6% से ज्यादा की गिरावट?

कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, सितंबर महीने में सोने में आई 6% से अधिक की तेज गिरावट के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण थे:

  1. डॉलर इंडेक्स और यील्ड्स में मजबूती: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स और डॉलर इंडेक्स में आई रिकवरी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बना था, जिससे ग्लोबल फंड्स ने प्रॉफिट बुकिंग की थी।

  2. चीन का स्टिमुलस असर: चीन द्वारा बड़े आर्थिक पैकेज के ऐलान के बाद वैश्विक निवेशकों ने बुलियन और गोल्ड से पैसा निकालकर इक्विटी बाजारों में लगाना शुरू कर दिया था।

  3. उच्च स्तरों पर तकनीकी सुधार: रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद तकनीकी चार्ट्स पर सोना ओवरबॉट (अत्यधिक खरीद) जोन में पहुंच चुका था, जिसके चलते स्वस्थ करेक्शन (Healthy Correction) स्वाभाविक था।

फिर क्यों उछले दाम? तेजी के पीछे के 4 बड़े ट्रिगर

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निचले स्तरों से आई यह रिकवरी दर्शाती है कि सोने में गिरावट पर खरीदारी (Buy on Dips) का रुझान बेहद मजबूत है:

  • फेस्टिव और वेडिंग सीजन की मांग: नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली के त्योहारी सीजन के साथ-साथ आगामी शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए घरेलू ज्वैलर्स और खुदरा खरीदारों की ओर से फिजिकल गोल्ड की मांग तेज हो गई है।

  • पश्चिम एशिया में गहराता तनाव: ईरान, लेबनान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) के रूप में सोने की मांग को फिर से बढ़ा दिया है। युद्ध के हालात में निवेशक हमेशा सोने की शरण में जाते हैं।

  • रुपये में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में बनी नरमी ने भी घरेलू स्तर पर आयातित सोने की लागत को बढ़ा दिया है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर की तुलना में ज्यादा तेजी से उछलती हैं।

  • केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीद: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक (Central Banks) अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जो लॉन्ग-टर्म में सोने के लिए मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है।

निवेशकों के लिए आगे क्या हैं संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव शांत नहीं होता और ब्याज दरों में कटौती का चक्र जारी रहता है, तब तक सोने का ओवरऑल ट्रेंड सकारात्मक बना रहेगा। ट्रेडर्स के लिए MCX पर ₹1,47,000 का स्तर मजबूत स्टॉप-लॉस/सपोर्ट बना हुआ है, जबकि ऊपर की ओर ₹1,52,500 से ₹1,55,000 का स्तर आने वाले हफ्तों में देखने को मिल सकता है। खुदरा निवेशकों को अत्यधिक उतार-चढ़ाव से बचने के लिए एकमुश्त खरीद के बजाय गिरावट पर किस्तों में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या डिजिटल गोल्ड में निवेश की सलाह दी जा रही है।