शेयर बाजार : 8 नेक्स्ट जेनरेशन युद्धपोत बनाने के लिए 53,866 करोड़ रुपये के मेगा सौदे पर मुहर; GRSE के शेयरों में 9% तक की तूफानी तेजी

शेयर बाजार : 8 नेक्स्ट जेनरेशन युद्धपोत बनाने के लिए 53,866 करोड़ रुपये के मेगा सौदे पर मुहर; GRSE के शेयरों में 9% तक की तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों (Defence Stocks) के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। भारतीय नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को अभूतपूर्व विस्तार देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 8 नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट्स (NGCs—युद्धपोत) के निर्माण हेतु 53,866.50 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक अनुबंध पर अंतिम मुहर लगा दी है। इस परियोजना की सबसे बड़ी ऐतिहासिक विशेषता यह है कि पहली बार भारतीय नौसेना द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए अग्रिम युद्धपोतों का निर्माण पूरी तरह प्रतिस्पर्धी बोली (Competitive Bidding) के आधार पर चुनी गई भारतीय सार्वजनिक रक्षा शिपयार्ड कंपनियों द्वारा किया जाएगा। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षरित यह सौदा न केवल 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि इससे घरेलू रक्षा विनिर्माण और शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम को नई उड़ान मिलेगी।

GRSE को मिला 5 युद्धपोत का सबसे बड़ा काम, 9% तक उछला शेयर भाव

इस मेगा डील में सबसे कम बोली (L-1 बिडर) लगाने वाली कोलकाता स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की शिपबिल्डिंग कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) को सबसे बड़ा लाभ मिला है। कंपनी को कुल 8 में से 5 नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट युद्धपोत बनाने का अनुबंध सौंपा गया है, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 32,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इस महा-अनुबंध की आधिकारिक पुष्टि होते ही शेयर बाजार में निवेशकों और संस्थागत खरीदारों ने GRSE के शेयरों पर आक्रामक दांव लगाया। मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर GRSE के शेयर इंट्रा-डे में 9 प्रतिशत से अधिक की तूफानी बढ़त दर्ज करते हुए अपने हालिया उच्च स्तर पर पहुंच गए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की ऑर्डर बुक में हुआ यह ऐतिहासिक इजाफा अगले 6 से 8 वर्षों तक कंपनी की वित्तीय आय और मार्जिन को स्थिरता व मजबूती प्रदान करेगा।

गोवा शिपयार्ड (GSL) बनाएगी 3 युद्धपोत, मझगांव डॉक और कोचीन शिपयार्ड में भी हलचल

रक्षा मंत्रालय द्वारा तय किए गए कार्य-विभाजन के तहत अनुबंध के शेष 3 युद्धपोतों के निर्माण का जिम्मा गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) को सौंपा गया है। जीआरएसई और गोवा शिपयार्ड दोनों ही रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाली प्रतिष्ठित 'डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स' (DPSUs) हैं। इस भारी-भरकम डिफेंस ऑर्डर के फ्लोट होते ही पूरे शिपबिल्डिंग और रक्षा उपकरण बनाने वाले सेक्टर में सकारात्मक माहौल बन गया। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders) और कोचीन शिपयार्ड (Cochin Shipyard) के शेयरों में भी शुरुआती सत्रों में 2 से 4 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई, क्योंकि इस स्तर के विशालकाय नौसैनिक प्रोजेक्ट्स में हथियार, सेंसर, रडार, सब-कॉन्ट्रैक्ट्स और सहायक उपकरणों की आपूर्ति के लिए पूरा शिपिंग व डिफेंस सप्लाई चेन नेटवर्क सक्रिय हो जाता है।

नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट्स (NGC) की ताकत: समुद्र, हवा और पानी के नीचे अचूक प्रहार

भारतीय नौसेना में शामिल होने वाले ये नए नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट्स पारंपरिक युद्धपोतों की तुलना में तकनीकी और रणनीतिक रूप से कहीं अधिक उन्नत हैं।

  • अत्याधुनिक मारक हथियार: ये युद्धपोत अत्याधुनिक सतह-से-सतह (Surface-to-Surface) पर मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों, एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों और सब-सर्फेस टॉरपीडो से लैस होंगे।

  • स्टील्थ टेक्नोलॉजी और सेंसर: रडार की पकड़ से बचने के लिए उन्नत स्टील्थ डिजाइन और आधुनिक रडार व सोनार सर्विलांस सिस्टम लगाए जाएंगे, जिससे दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों का कई समुद्री मील दूर से पता लगाया जा सकेगा।

  • तटीय सुरक्षा और सुदूर महासागरीय मिशन: ये युद्धपोत भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की निगरानी, तटीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों (SLOCs) की रक्षा करेंगे। इनके नौसेना में आने से भारी और अधिक खर्चीले फ्रिगेट्स व डिस्ट्रॉयर्स को गहरे समुद्र (Blue Water) के अंतरराष्ट्रीय अभियानों के लिए खाली कराया जा सकेगा।

रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता और 530 लाख से अधिक श्रम दिवसों का रोजगार सृजन

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना भारतीय नौसेना को मजबूत करने के साथ-साथ देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। इस परियोजना के तहत अगले 10 वर्षों में युद्धपोत निर्माण के दौरान शिपयार्ड्स में लगभग 72 लाख पर्सन-डेज (श्रम दिवस) का सीधा रोजगार पैदा होगा। इसके अतिरिक्त, सहायक उद्योगों, कच्चे माल के सप्लायर्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) में लगभग 460 लाख पर्सन-डेज का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान लगाया गया है। युद्धपोतों में लगने वाले अधिकांश उपकरण, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और आग्नेयास्त्र स्वदेशी भारतीय कंपनियों और एमएसएमई द्वारा ही तैयार किए जाएंगे। रक्षा क्षेत्र में बजट का एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी खरीद के लिए आरक्षित करने की केंद्र सरकार की नीति का सीधा असर अब भारतीय रक्षा कंपनियों की बैलेंस शीट और शेयर बाजार के प्रदर्शन में साफ तौर पर दिखने लगा है।