Jio IPO के शोर में दबा पारस हेल्थकेयर का इश्यू: पहले दिन ठंडा रिस्पॉन्स, GMP 78 से गिरकर ₹35 पर आया

Jio IPO के शोर में दबा पारस हेल्थकेयर का इश्यू: पहले दिन ठंडा रिस्पॉन्स, GMP 78 से गिरकर ₹35 पर आया

प्राइमरी शेयर बाजार में 21 अक्टूबर को दो बड़े पब्लिक इश्यू एक साथ खुले—एक तरफ जहां बहुप्रतीक्षित रिलायंस जियो आईपीओ में निवेश के लिए हर वर्ग में होड़ मची रही, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख हॉस्पिटल चेन पारस हेल्थकेयर (Paras Healthcare Ltd) के आईपीओ को पहले दिन निवेशकों से काफी ठंडा रिस्पॉन्स मिला है। बड़े आकार के इश्यू में निवेशकों की लिक्विडिटी बंट जाने और अनलिस्टेड मार्केट में सतर्क रुख के चलते कंपनी का पहले दिन का कुल सब्सक्रिप्शन आंकड़ा दहाई के आंकड़े को बमुश्किल छू सका। यह पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक बोली के लिए खुला रहेगा, जबकि एंकर निवेशकों से कंपनी 19 अक्टूबर को ही ₹652.50 करोड़ जुटा चुकी है।

पहले दिन केवल 15% सब्सक्रिप्शन, रिटेल निवेशकों ने संभाला मोर्चा

शेयर बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पहले दिन पारस हेल्थकेयर का पब्लिक इश्यू कुल मिलाकर महज 15 प्रतिशत (0.15 गुना) ही सब्सक्राइब हो पाया है। हालांकि, छोटे रिटेल निवेशकों ने इसमें कुछ दिलचस्पी दिखाई, जिसके चलते रिटेल कोटा 73 प्रतिशत तक भर गया। संस्थागत निवेशकों (QIB) की तरफ से पहले दिन शून्य बोली देखने को मिली, जो कि अक्सर बड़े आईपीओ के आखिरी दिन ही पूरी ताकत से दांव लगाते हैं। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII/HNI) के हिस्से में भी केवल 0.08 गुना ही सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया, जिससे पहले दिन बाजार में उत्साह की भारी कमी साफ नजर आई।

ग्रे मार्केट प्रीमियम में लगातार गिरावट: ₹78 से फिसलकर ₹35 पर अटका GMP

बाजार में कमजोर मांग का सीधा असर पारस हेल्थकेयर के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) पर देखने को मिला है। अनलिस्टेड मार्केट के जानकारों के अनुसार, कुछ दिन पहले तक जो शेयर ₹78 के प्रीमियम पर कारोबार कर रहा था, वह 20 अक्टूबर को टूटकर ₹50 और 21 अक्टूबर को पहले दिन की क्लोजिंग तक ₹35 के प्रीमियम पर आ गया। अपर प्राइस बैंड ₹693 के मुकाबले ₹35 का प्रीमियम केवल 5 प्रतिशत के अनुमानित लिस्टिंग गेन की ओर इशारा करता है। बाजार जानकारों का मानना है कि जियो आईपीओ में रिटेल और संस्थागत फंड्स का बड़ा हिस्सा ब्लॉक होने की वजह से शॉर्ट-टर्म लिस्टिंग गेन चाहने वाले ट्रेडर इस आईपीओ में आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं।

प्राइस बैंड, लॉट साइज और इश्यू के प्रमुख वित्तीय तथ्य

पारस हेल्थकेयर ने अपने इस पब्लिक इश्यू के लिए प्रति शेयर मूल्य दायरा (Price Band) ₹660 से ₹693 तय किया है। एक लॉट में 21 इक्विटी शेयर शामिल हैं, जिसके चलते रिटेल निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए ₹14,553 का न्यूनतम निवेश करना अनिवार्य है। इस आईपीओ का कुल आकार ₹1,450 करोड़ का है, जिसमें कंपनी नए इक्विटी शेयर जारी करने के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल (OFS) भी लेकर आई है:

  • कुल इश्यू साइज: ₹1,450 करोड़

  • ऑफर फॉर सेल (OFS): ₹950 करोड़ (प्रमोटर और मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी बिक्री)

  • फ्रेश इश्यू: 72.15 लाख नए शेयर जारी होंगे

फ्रेश इश्यू से जुटाई पूंजी का कहां होगा इस्तेमाल?

कंपनी ने अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में स्पष्ट किया है कि फ्रेश इश्यू के जरिए जुटाई जाने वाली रकम में से ₹320.90 करोड़ का बड़ा हिस्सा अपने मौजूदा बैंक कर्जों और देनदारियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से चुकाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ₹54.10 करोड़ की राशि का निवेश कंपनी अपनी सहायक इकाइयों (Subsidiaries) के विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में करेगी, जबकि शेष बची धनराशि को सामान्य कॉरपोरेट कार्यों और परिचालन खर्चों में लगाया जाएगा। कर्ज कम होने से कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होगी और ब्याज लागत में कमी आएगी, जो कि मध्यम से लंबी अवधि में वित्तीय मार्जिन सुधारने में मददगार साबित हो सकता है।

निवेशकों के लिए आगे क्या हैं अहम संकेत?

हेल्थकेयर और हॉस्पिटल सेक्टर में लंबे समय से विस्तार की अपार संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन पारस हेल्थकेयर जैसे मध्यम आकार के प्लेयर्स के लिए वैल्युएशन और सेक्टर के दिग्गज प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) बेहद महत्वपूर्ण पैमाना होता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पहले दिन सब्सक्रिप्शन कमजोर रहा हो, लेकिन दूसरे और तीसरे दिन क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) और बड़े वेल्थ फंड्स के रुख से ही यह तय होगा कि इश्यू पूरी तरह ओवरसब्सक्राइब हो पाता है या नहीं। यदि आप लिस्टिंग गेन के बजाय कंपनी के बुनियादी ढांचे और लंबी अवधि के विस्तार पर भरोसा करते हैं, तो कर्ज चुकाने के बाद सुधरने वाले मार्जिन पर नजर रखना समझदारी भरा कदम होगा।