चौतरफा मार्केट क्रैश के बीच IT शेयरों में जोरदार तेजी: Mphasis और Coforge 5% तक उछले
सेंसेक्स और निफ्टी में चौतरफा बिकवाली और ऑटो सेक्टर के शेयरों में मचे हाहाकार के बीच इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर के शेयरों ने बाजार में विपरीत दिशा पकड़ते हुए शानदार रैली दिखाई है। जहां एक तरफ घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स अपने 52-सप्ताह के निचले स्तरों के करीब संघर्ष कर रहे थे, वहीं निफ्टी आईटी इंडेक्स 2% से ज्यादा चढ़कर हरे निशान में चमकता नजर आया। मिडकैप और लार्जकैप आईटी स्टॉक्स में निवेशकों ने आक्रामक लिवाली की। कॉफोर्ज (Coforge), हेक्सावेयर, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एम्फैसिस (Mphasis) जैसे शेयरों में 3% से लेकर 5% तक की तेजी दर्ज की गई। बाजार के इस क्रैश में आईटी शेयरों का यह यू-टर्न सीधे तौर पर अमेरिकी बाजार और मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतों से जुड़ा हुआ है।
इन आईटी शेयरों में दिखा सबसे ज्यादा दम
दलाल स्ट्रीट पर जब ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग स्टॉक्स दबाव में थे, तब आईटी कंपनियों ने मोर्चा संभाला:
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Coforge और Hexaware: मिडकैप आईटी स्पेस में कॉफोर्ज करीब 4.8% से 5% तक उछलकर ₹1,803 के पार पहुंच गया, जबकि हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज में 4.3% से ज्यादा की तेजी रही।
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Mphasis और OFSS: एम्फैसिस के शेयर इंट्रा-डे में तेज उछाल के साथ कारोबार करते दिखे, वहीं ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज (OFSS) 3.9% चढ़कर बीएसई मिडकैप के टॉप गेनर्स में शामिल रहा।
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TCS और Tech Mahindra: लार्जकैप सेगमेंट में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 3.2% की बढ़त के साथ निफ्टी की टॉप गेनर बनी, जबकि टेक महिंद्रा में 2.6% और विप्रो में 2.7% की तेजी देखी गई।
अमेरिका से क्या है इस तेजी का सीधा कनेक्शन?
भारतीय आईटी सेवा कंपनियों का 50% से 65% तक का कुल राजस्व सीधे तौर पर अमेरिकी बाजार से आता है। इसलिए मुंबई से ज्यादा वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क में होने वाले आर्थिक घटनाक्रम भारतीय आईटी स्टॉक्स की दिशा तय करते हैं। इस ताजा उछाल के पीछे मुख्य रूप से 3 बड़े यूएस ट्रिगर्स रहे हैं:
1. यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नरम रुख (Easing Rate Hike Bets)
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माताओं की ओर से ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी के दावों में नरमी के संकेत मिले हैं। जब भी अमेरिकी ब्याज दरों में ठहराव या कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो वहां के कॉरपोरेट क्लाइंट्स के टेक स्पेंडिंग (आईटी बजट) में कटौती का डर कम हो जाता है। इसी राहत के चलते वॉल स्ट्रीट और घरेलू बाजार में टेक स्टॉक्स को हाथों-हाथ लपका गया।
2. डॉलर इंडेक्स में मजबूती का डबल फायदा
ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स और अमेरिकी डॉलर में आई हालिया मजबूती भारतीय आईटी कंपनियों के लिए वरदान साबित हो रही है। भारतीय आईटी कंपनियां अपनी बिलिंग अमेरिकी डॉलर में करती हैं और उनका खर्च भारतीय रुपये में होता है। डॉलर मजबूत होने और रुपये में नरमी आने से कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और प्रति शेयर आय (EPS) में ऑटोमैटिक इजाफा होता है।
3. Q2 अर्निंग्स सीजन से पहले रिलीफ रैली (Pre-Earnings Value Buying)
अक्टूबर के पहले पखवाड़े से वित्तीय वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजों का ऐलान शुरू होने जा रहा है, जिसकी शुरुआत 8 अक्टूबर को टीसीएस के नतीजों से होगी। पिछले कई महीनों से लगातार गिरावट झेल रहे आईटी शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक स्तर पर आ चुका था। फंड मैनेजर्स नतीजों और नए क्लाइंट सौदों (Deal Pipeline) से पहले शॉर्ट-कवरिंग और वैल्यू बाइंग करते नजर आए।
निवेशकों के लिए विश्लेषकों की राय
बाजार जानकारों के अनुसार, यह रैली सेक्टर के लिए तात्कालिक राहत जरूर है, लेकिन लंबी अवधि की निरंतरता दूसरी तिमाही के नतीजों में मैनेजमेंट द्वारा दी जाने वाली भविष्य की गाइडेंस (Revenue Guidance) और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। खुदरा निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक दांव लगाने के बजाय लार्जकैप आईटी कंपनियों में सिस्टेमैटिक तरीके से धीरे-धीरे निवेश बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।